विवादित वेब सीरीज ‘तांडव’ को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, बहुसंख्यक लोगों के मूल अधिकारों का किया गया हनन

चिरौरी न्यूज़

नई दिल्ली: विवादित वेब सीरीज ‘तांडव’ को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि इसमें बहुसंख्यक लोगों के मूल अधिकारों का हनन किया किया गया है। कोर्ट ने तांडव के कंटेंट को लेकर भी तल्ख़ टिप्पणियां की है। अदालत ने कहा है कि कला और अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर बहुसंख्यक लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ की सिंगल बेंच ने आज अपना अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में चार फरवरी को ही अपना जजमेंट रिजर्व कर लिया था। चार फरवरी को दिए गए अंतरिम आदेश में कोर्ट ने अपर्णा पुरोहित की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

बता दें कि अमेज़न प्राइम की इंडिया हेड अपर्णा पुरोहित ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दी थी, जिसे कोर्ट ने आज ख़ारिज कर दिया। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान ही कोर्ट ने कहा कि खुद को मिले अधिकार की आड़ में देवी-देवताओं का मज़ाक उड़ाकर या फिर अपमान कर लोगों की भावनाओं को कतई ठेस नहीं पहुंचाया जा सकता। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अपर्णा पुरोहित की अग्रिम जमानत की अर्जी को खारिज कर दिया है जिससे उनकी गिरफ्तारी पर तलवार लटक गयी है।

अदालत ने अपने फैसले में तांडव सीरीज के तमाम सीन्स और डायलॉग्स का उदहारण देते हुए कहा कि सीरीज का कंटेंट बहुत ही आपत्तिजनक है। अपर्णा पुरोहित ने अग्रिम जमानत की यह अर्जी गौतमबुद्ध नगर जिले के रबूपुरा थाने में दर्ज एफआईआर के मामले में दाखिल की थी। बता दें कि वेब सीरीज तांडव को लेकर पूरे देश में हंगामा मच गया था और कई जगहों पर इस को लेकर प्रदर्शन हुए थे। कई संगठनों ने तांडव के निर्माता, निर्देशक और कलाकारों के विरुद्ध केस दर्ज करने को लेकर सरकार से मांग की थी। गौतमबुद्ध नगर सहित कुछ जगहों पर उनके खिलाफ केस भी दर्ज किया गया था।

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