असम सरकार का आदेश, एक अप्रैल से बंद किए जाएंगे मदरसे

(फोटो का केवल प्रतीकात्मक इस्तेमाल किया गया है.)

चिरौरी न्यूज़

गुवाहाटी: असम सरकार द्वारा धार्मिक शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता देना बंद कर देने के कारण राज्य में 1 अप्रैल से वैसे मदरसे बंद हो जायेंगे जो सरकार की आर्थिक सहायता से चल रहे थे।  राज्य में सरकार के खर्च पर चले रहे वैदिक शिक्षा दे रहे संस्कृत स्कूलों को भी सरकारी मदद से वंचित कर दिया जाएगा और इन स्कूलों का संचालन अब कुमार भास्करवर्मा संस्कृति विश्वविद्यालय के हवाले कर दिया जाएगा।

बता दें कि असम सरकार ने पिछले साल 30 दिसंबर को विधानसभा में एक कानून पारित किया था जिसके तहत सरकारी खर्च से चलने वाले राज्य के सभी मदरसों को आम स्कूलों में बदलने का फैसला लिया गया था। इसकी वजह दरअसल गुवाहाटी विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने सर्वेक्षण कराया था जिसमें पाया गया कि अधिकांश माता-पिता को यह भी पता नहीं है कि उनके बच्चों को मदरसे में सामान्य विषय पढ़ाए ही नहीं जाते हैं।

अब असम सरकार ने आदेश दिया है कि राज्य में सभी सरकारी मदरसों को आगामी एक अप्रैल से बंद किया जा रहा है और ऐसे 620 से अधिक मदरसों को अब आम स्कूलों में बदल दिया जाएगा। सरकार को अब तक इन मदरसों के संचालन के लिए हर साल 262 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे थे।

असम के शिक्षा और वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट करके कहा कि असम सरकार का यह फैसला ऐतिहासिक और प्रगतिशील है। मदरसा एजुकेशन प्रॉवैंशियलाइजेशन एक्ट, 1995 और असम मदरसा एजुकेशन एक्ट, 2018 को खत्म कर दिया गया है। अब सभी सरकारी मदरसे सामान्य स्कूलों की तरह ही संचालित होंगे। असम सरकार के इस फैसले को कांग्रेस समेत राज्य की विपक्षी पार्टियां विरोध कर रही हैं।

सरमा ने बुधवार को कहा था कि शिक्षा विभाग को असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने असम रिपीलिंग एक्ट-2020 को मंजूरी दे दी है। हालांकि राज्य सरकार को अभी निजी स्तर पर चल रहे सैकड़ों मदरसों पर फैसला लेना बाकी है।

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