पैदल घिसटते,मरते,कटते मजदूर जा रहे घर,भाजपा गई डर

संदीप ठाकुर

मजदूराें के पलायन और पैदल ही घर जाने के दाैरान उन पर हाे रहे पुलिसिया अत्याचार से भाजपा डर गई है। उसे डर सताने लगा है अपना वोट-बैंक खोने का। तभी ताे कोरोना से उपजे हालात पर चर्चा के लिए कल बुलाई गई बैठक में काेराेना से अधिक मुद्दा छाया रहा प्रवासी मजदूरों का। बैठक 14 मई काे पार्टी चीफ जेपी नड्डा के घर पर हुई थी। लॉकडाउन की घोषणा के बाद, बीजेपी के बड़े नेता पहली बार इस तरह मिले थे। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के अलावा कई केंद्रीय मंत्री भी माैजूद थे। लेकिन काेराेना से अधिक चर्चा प्रवासी मजदूराें पर हाेना पार्टी के डर काे दर्शाता है।

सूत्राें ने बताया कि पार्टी अपने नेताओं से यही जानना चाहती थी कि जो हालात अभी बने हैं उसकी भरपाई के लिए क्या किया जा सकता है। बैठक में यह बात उबर कर सामने आई कि जिस हालात में मजदूर पलायन कर रहे हैं उसके लिए वे सरकार काे जिम्मेदार मानते हैं और इसे लेकर उनके भीतर गुस्सा भी है। कुछ नेताओं ने कहा कि जब उन्हें सरकारी मदद की सबसे अधिक जरूरत थी, उस समय वे ठोकर खाने को मजबूर थे। पार्टी काे इस बात को महसूस करना चाहिए । इस मुद्दे पर पार्टी अब बैकफुट पर है। देश के बंटवारे के बाद पलायन का ऐसा दौर कभी नहीं देखा गया था।

देशभर से प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा की रिपोर्ट्स आ रही हैं। जो पैदल चलते-चलते दम तोड़ गए, उनकी कोई गिनती नहीं हुई। हादसों में अनुमानत:100 से अधिक मजदूर जान गंवा चुके हैं। राजनीति के जानकार मानते हैं कि लॉकडाउन के बाद उपजे हालात ने देश को दो अलग-अलग धड़ों में बांट दिया है। एक धड़ा वह है जो घरों में राशन पानी जमा करके बैठा है और लॉकडाउन काे सही ठहरा रहा है। यह वे लाेग हैं जिन्हें घर बैठे बैठे सैलरी मिल रही है। दूसरा तबका दिहाड़ी पर काम करने वालाें का है जिनमें से बहुतों की सैलरी कटी है,नौकरियां चली गई हैं।

प्रवासी मजदूरों के साथ जाे हाे रहा है उसने भाजपा की ‘मिडल क्लास व बिजनेस क्लास की पार्टी’ वाली छवि को और मजबूत किया है । पार्टी का यह नारा कि प्रवासी मजदूर, किसान और गरीब हमारी प्राथमिकता है सिर्फ नारा बन कर रह गया है। जिस तरह मजदूर सड़क पर पिट रहे हैं,मर रहे हैं,कट रहे हैं वह भाजपा की कथनी करनी में अंतर साफ दर्शाता है। भाजपा को सत्ता में लाने के पीछे गरीबों का समर्थन एक बड़ी वजह है। सरकार ने जिस तरह से अचानक लॉकडाउन के कदम उठाए, उससे मजदूरों को कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि नुकसान जबरदस्त हुआ है। इसकी भरपाई आसान नहीं होगी और भाजपा काे इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। चिरौरी न्यूज परिवार का इससे पूर्ण सहमत होना जरूरी नहीं है। )

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