महात्मा बुद्ध आज ज्यादा प्रासंगिक हैं: मोदी

न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली: जब भारत सहित पूरी दुनियां वैश्विक महामारी से लड़ रही है, ऐसे में भगवान बुद्ध की सीख और भी प्रासंगिक हो जाती है।  बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग आज के दौर में मानवता की सेवा कर रहे हैं, वो प्रणम्य हैं।

मोदी ने कहा, कि बुद्ध सिर्फ एक नाम नहीं है बल्कि एक पवित्र विचार भी है। प्रत्येक जीवन की मुश्किल को दूर करने के संदेश और संकल्प ने भारत की सभ्यता को, संस्कृति को हमेशा दिशा दिखाई है। भगवान बुद्ध ने भारत की इस संस्कृति को और समृद्ध किया है।’ आज जब सारी दुनियां परेशान है, भगवान बुद्ध की सीख पहले से भी अधिक प्रासंगिक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार परिस्थितियां अलग हैं, दुनिया मुश्किल समय से गुजर रही है। आपके बीच आना मेरा सौभाग्य होता है लेकिन मौजूदा स्थिति इसकी इजाजत नहीं देती है। बुद्ध के कदम पर चलकर भारत आज दुनिया की मदद कर रहा है। फिर चाहे वो देश में हो या फिर विदेश में, इस दौरान लाभ-हानि को नहीं देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत बिना किसी स्वार्थ के दुनिया के साथ खड़ा है। हमें अपने, अपने परिवार के साथ ही दूसरों की भी सुरक्षा करनी होगी। संकट के समय हर किसी की मदद करना ही सबका धर्म है। हमारा काम निरंतर सेवा भाव होना चाहिए। दूसरों के लिए करुणा-सेवा का भाव रखना जरूरी है।

उन्होंने कहा, ‘उनका (भगवान बुद्ध) कहना था कि मानव को निरंतर यह प्रयास करना चाहिए कि वह कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करे, उनसे बाहर निकले। थक कर रुक जाना, कोई विकल्प नहीं होता।’ मोदी ने कहा कि बुद्ध भारत के बोध और भारत के आत्मबोध, दोनों का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि इसी आत्मबोध के साथ भारत निरंतर पूरी मानवता एवं पूरे विश्व के हित में काम कर रहा है और करता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बुद्ध किसी एक परिस्थिति तक सीमित नहीं हैं। वह हर किसी को मानवता की मदद करने का संदेश देते हैं। समय बदला, स्थिति बदली, समाज की व्यवस्थाएं बदलीं, लेकिन भगवान बुद्ध का संदेश जीवन में निरंतर विद्यमान रहा है। हम सभी के जीवन में उसका विशेष स्थान रहा है।

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