लाॅकडाउन में किसानों को दोहरी मार

सुभाष चन्द्र

जब पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है और राहत बचाव कार्य जारी है, उसमें जो चीज सबसे पहले आई वह है राशन। तमाम सरकारें इस बात में लगी रही कि किसी को राशन यानी अनाज की दिक्कत नहीं हो। तमाम सरकारी घोषणाएं हुईं। लोगों तक राशन पहुंचाई गई। इस क्रम में राजनीति चमका गई और सोशल मीडिया मंे अपने लोगांे के माध्यम से वाहवाही लूटी गई। लेकिन इससे बडा प्रपंच और क्या हो सकता है कि जिसके माध्यम से अनाज होता है, वही अन्नदाता परेशान है। अन्नदाता यानी किसान अपनी चिंता में दुबला होता गया। एक तो लाॅकडाउन की दुश्वारियां और उपर से प्रकृति का कोपभाजन। बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बारिश के साथ पडे ओलो ने किसानों के पेशानी पर बल ला दिया।

असल में, कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए देश में लॉकडाउन ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर पूरा देश जहां कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव से चिंतित है वहीं दूसरी ओर किसान खेतों में खड़ी अपनी फसल नहीं काट पाने के चलते चिंतित नजर आ रहे है। इस बीच लॉकडाउन को बढ़ाए जाने की आहट ने उसकी परेशानियों में और इजाफा कर दिया है।खेतों में खड़ी फसल को लेकर किसान चिंतित हैं। अगर समय से कटाई और भंडारण नहीं हुआ तो परेशानी बढ़ेगी। सरकार से मांग की जा रही है कि इन हालातों में किसानों के लिए खास रियायत दी जाए। आमतौर पर गेहूं, चना, सरसों सहित अन्य रबी फसलों की कटाई का समय मार्च और अप्रेल में होता है। अभी कहीं फसल की कटाई चल रही है तो कहीं कटाई की तैयारी चल रही है। इसी बीच कोरोना वायरस की महामारी ने दुनिया के अन्य देशों के साथ हमारे देश में भी संकट बढ़ा दिया है। किसानों का खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। ऐसी स्थिति में फसल की कटाई संभव नहीं होगी।

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्काजी और युवा इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिमन्यु कोहाड़ा ने किसानों की समस्या को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने लॉकडाउन के निर्णय का समर्थन किया है। साथ ही उन्होंने कहा है कि महासंघ एवं देश के अन्य करोड़ों किसान कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में केंद्र व राज्य सरकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में किसानों की फसल सफाई कटाई को लेकर आने वाली समस्या की तरफ इशारा किया है। उन्होंने लिखा है कि इन दिनों रबी की फसलों की कटाई का समय है। कुछ राज्यों में तो किसान फसलें काट चुके हैं। कुछ राज्यों में अभी इसकी तैयारी चल रही है और आगामी दिनों तक यह सिलसिला जारी रहेगा। जहां फसल कटाई हो चुकी है, वहां किसानों की सारी मेहनत और लागत इस समय खेतों में खुली पड़ी है। साथ ही खेतों में खड़ी फसल को बेमौसम बारिश और जानवरों से खतरा होने की आशंका है।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि देश की हमारी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। इस लॉकडाउन के चलते किसानों का खेत पर जाना मुश्किल हो जाएगा और इससे अर्थव्यवस्था पर असर पडऩे के साथ ही विषम परिस्थितियां निर्मित होने का खतरा बना रहेगा। इसके अलावा अनाज का सही भंडारण नहीं हो पाएगा, अगर किसानों और खेती को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई तो भविष्य में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं क्योंकि अगर यह कोरोना की महामारी लंबे समय तक चली तो भुखमरी के हालात भी पैदा हो सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा प्रभावी रणनीति बनाई जाए और राज्यों को जरूरी आदेश जारी किए जाएं। फसल कटाई में लगे किसानों, मजदूरों और अन्य को निर्धारित समय सीमा के लिए पास भी जारी किए जाएं।

दिल्ली, पंजाब समेत दूसरे राज्यों से कई मजदूर फसल काटने के उद्देश्य से भी आए थे लेकिन उन्हें क्वारंटाइन सेंटर्स भेज दिया गया। दरअसल बाहर से आ रहे मजदूर व श्रमिकों को सरकार द्वारा उन्हें डिस्ट्रिक्ट बाॅर्डर पर ही रोक कर सेंटर्स पर भेजा जा रहा है तो वहीं जो अपने गांव तक पहुंच चुके हैं उनके लिए गांव के प्राइमरी स्कूलें में क्वारंटाइन किया जा रहा है। कई मजदूरों क्वारंटाइन सेंटर्स में अपने खेतों और मजदूरी की चिंता सता रही है। यही कारण है कि कई मजदूर इन सेंटर्स से भाग भी जा रहे हैं जिसके कारण अधिकारी परेशान हैं। योगी सरकार के मंत्री व प्रवक्ता महेंद्र सिंह के मुताबिक, सरकार को किसानों की बेहद चिंता है इसीलिए उन्हें लाॅकडाउन में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए खेतों में काम करने को कहा गया है. बाकि फसल खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) समेत दूसरे जरूरी मुद्दों पर भी सरकार समय से व्यवस्था करने में जुटी है।

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एमएसपी पर सरकार 2.64 लाख मीट्रिक टन सरसों, 2.01 लाख मीट्रिक टन चना और 1.21 लाख मीट्रिक टन मसूर किसानों से खरीदेगी। ये खरीद 90 दिन तक होगी। वहीं सरकार से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, योगी सरकार की ओर से रबी फसलों की कटाई में इस्तेमाल होने वाले कंबाइन हारवेस्टर समेत दूसरे उपकरणों को लॉकडाउन से छूट दे दी है। वहीं उर्वरक, बीज और कृषि रक्षा रसायनों के बिक्री केंद्र को खोलना और उनके निर्माण-आपूर्ति को जारी रखने का फैसला भी किया गया है। सरकार से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि सरकार ग्राम प्रधानों के जरिए किसानों से संवाद कायम करने की पूरी कोशिश कर रही है। वहीं दूसरी ओर कई किसानों ने दिप्रिंट से बातचीत में अपने-अपने ग्राम प्रधानों पर ही कई आरोप लगाते हुए कहा कि अक्सर कई योजनाओं का लाभ मिल ही नहीं पाता। प्रधान कई बार सरकार के संदेश ठीक तरह से नीचे तक नहीं पहुंचाते।

किसान अपनी फसलों का उचित दाम नहीं मिलने से परेशान है, तो वही जिन किसानों की अभी गेहूं की फसल पकी खड़ी है। उन्हें कटाई के लिया मजदूर नहीं मिल रहे है। जिन किसानों की फसल खेतों में काटी पड़ी है। वह अपने फसल को घर तक भी नहीं का पा रहे हैं क्योंकि खेतों के रास्ते भी कई जगह बंद पड़े है। वहीं जिन किसानों को गेहूं सरकारी क्रय केंद्र तक लेकर जाना था। उनके सामने भी कई चुनौती सा रही हैं। इसलिए किसान हर तरह से चिंतित नजर आ रहा है।

भोपाल और उसके आसपास जिलों में खेतों में गेंहू की फसल तैयार खड़ी है। हर साल अब तक आधी से ज्यादा फसल खेतों से कटकर बिकने के लिए मंडियों में पहुंच जाती थी लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते अब तक पूरी फसल खेतों में ही खड़ी है। किसानों को न तो फसल काटने के लिए मजदूर मिल पा रहे है और न ही पंजाब से हर साल आने वाले हार्वेस्टर इस बार आए है जिससे अब किसानों को अपनी फसल के बर्बाद होने का डर सताने लगा है। कर्ज के जाल में पहले से ही फंसे किसान पर जहां हर बार मौसम की मार पड़ती थी वहीं इस कोरोना का काला साया है। फसल खेत में तैयार खड़ी हैं लेकिन कटाई का इंतज़ाम नही हो पा रहा है। कहीं पर मजदूरों और मशीनों की समस्या है तो कहीं पैसों की। इन सब के बीच किसान बैंक एवं बाजार से लिये कर्ज की वापसी को लेकर चिंतित है।

बिहार के मुख्य सचिव के एक आदेश ने बिहार के 11 जि‍लों के किसानों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी। गेहूं की फसल खेतों में पड़े हुए हैं और फसल काटने वाली मशीनें भी खेतों में बंद खड़ी हैं। किसानों के साथ-साथ उन जिलों के सांसद भी परेशान हैं। दरअसल, ये पूरी परेशानी तब से शुरू हुई जब से बिहार के मुख्य सचिव डॉ दीपक कुमार ने तमाम जिलाधिकारियों को पत्र लिखा। स्वास्थ्य विभाग की आपत्ति के बाद आदेश जारी किया कि कोरोना वायरस को देखते हुए बिहार के बाहर से आए सभी 690 हार्वेस्टर ड्राइवर को क्‍वारंटाइन कराकर उनके प्रदेश में वापस भेजा जाए। साथ ही मुख्य सचिव ने 11 जिलों- पटना, नालंदा, नवादा, जहानाबाद, अरवल, भोजपुर, रोहतास, कैमूर, बक्सर, औरंगाबाद और गोपालगंज के जिलाधिकारियों को आदेश दिया कि आगे से कोई पास निर्गत नहीं करें।

इसी आदेश के बाद बिहार के इन 11 जिलों में किसान परेशान हो गए हैं, जहां गेहूं का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है। इन जिलों में गेहूं की कटाई हार्वेस्टर मशीन से होती है और ड्राइवर के नहीं होने से गेहूं की फसल प्रभावित हो रही है। गेहूं की फसल पक कर पूरी तरह से तैयार है लेकिन फसल काटने वाली मशीन हार्वेस्टर भी खड़ी है लेकिन इसे चलाने वाले ड्राइवर नही मिल पा रहे हैं. गर्मी भी बहुत ज्यादा है। ऊपर से लॉडाउन की वजह से मजदूर भी नहीं मिल पा रहे हैं ताकि गेहूं की फसल को जल्द से जल्द काट कर खलिहान तक पहुंचाया जा सके। ऊपर से आग का खतरा भी बढ़ गया है। खेतों में आग लग जा रही है और फसलों को भारी नुकसान हो रहा है।

वहीं, किसानों की परेशानी देख जिलों के सांसद सक्रिय हो गए हैं और अपनी सरकार से कोई नाराजगी भरे तो कोई आग्रह के भाव से किसानों की समस्या को जल्द से जल्द दूर करने की बात कह रहे हैं। जहानाबाद के सांसद चंदेश्वर चंद्रवंशी ने कहा कि सरकार पूरी हालात पर नजर बनाए हुए है। हम लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं कि किसानों की परेशानी दूर किया जाए। पाटलीपुत्र के सांसद रामकृपाल यादव तो कुछ ज्यादा ही नाराज़ है और उन्होंने किसानो की समस्या पर इशारों में सरकार की मंशा पर ही सवाल उठा मुख्यमंत्री को पत्र तक लिख दिया। वहीं, बिहार की सरकार कह रही है कि किसानों के हितों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है लेकिन लॉकडाउन का हवाला देकर मजबूरी भी जाहिर कर रही है। कृषि मंत्री प्रेम कुमार का दावा है कि किसानों के खेत से गेहूं कटनी करवाने की पूरी कोशिश सरकार की तरफ से की जा रही है। बहुत जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा।

हालांकि, कहीं कहीं सुनने में आ रही है कि किसानों को भी सरकार की ओर से राहत देने की घोषणा हुई है। केन्द्र सरकार ने कोरोना को लेकर लॉकडाउन के साथ ही यह घोषणा कर दी थी किसान सम्मान निधि के एक किस्त का पैसा किसानों को जुलाई के पहले सप्ताह में ही दे दिया जाएगा। उसी के तहत केन्द्र ने इन किसानों की सूची भेजी और राज्य सरकार ने उनका मिलान कर एफपीओ जारी कर दिया। बावजूद कुछ किसान इस लाभ से वंचित रह जाएंगे। उन किसानों के आवेदन में कुछ न कुछ गड़बड़ी है। इस कारण पैसा नहीं जाएगा। गड़बड़ी दुरुस्त करने के बाद उन्हें योजना का लाभ मिलेगा।

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