किसानों और सरकार के बीच बैठक फिर बेनतीजा, कृषि मंत्री का रुख हुआ कड़ा

चिरौरी न्यूज़

नई दिल्ली: एक बार फिर सरकार और किसानों के बीच कृषि कानूनों को लेकर बातचीत बेनतीजा रही। देश भर के किसान कृषि कानूनों  के खिलाफ पिछले 56 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्होंने सरकार से मांग रखी हुई है कि कृषि कानून को वापस लिया जाय, हालांकि सरकार ने किसानों को प्रस्ताव दिया था कि कुछ समय के लिए तीनों कानूनों को निरस्त किया जा सकता है और एक कमिटी बना कर इस बार भाष्य में बातचीत की जा सकती है।  लेकिन किसनों के प्रतिनिधियों  को यह प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ।

आज एक बार फिर सरकार के साथ उनकी बातचीत हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया। आज की बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि हमने जो प्रस्ताव दिया था वह आपके हित में था। लेकिन आप हमारी बात नहीं मान रहे हैं, मेरा यह कहना है कि आप हमारे प्रस्ताव पर फिर से विचार करें, अगर आप प्रस्ताव पर विचार करते हैं तो हमारी फिर वार्ता होगी।

कृषि मंत्री ने अगले बैठक की कोई तारीख नहीं दी है। इधर किसान नेताओं का कहना है कि वे कानूनों को रद्द करवाये बिना नहीं मानेंगे। उनका कहना था कि सरकार राजा नहीं है। लोकतंत्र में जनता की सरकार होती है, इसलिए सरकार को हमारी बात माननी ही होगी। आज सुबह बातचीत के लिए किसान नेता और कृषि मंत्री विज्ञान भवन पहुंचे थे। बातचीत से पहले किसानों ने सरकार ने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिसमें उन्होंने कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक होल्ड पर रखने की बात कही थी।

किसान मजदूर संघर्ष समिति के किसान नेता एसएस पंधेर ने बैठक से पहले कहा था कि सरकार हमें फंसाकर हमारा आंदोलन खत्म करवाना चाहती है। इसलिए वह कानून को होल्ड पर रखने की बात कह रही है। वे हमारा प्रदर्शन रद्द करने के लिए जाल फेंक रही है, उनकी मिठाई के अंदर जहर छिपा है। इसलिए हमने अपनी बैठक में एकमत से उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।

किसान नेता राकेश टिकैत ने भी बैठक से पहले कहा कि हमें ट्रैक्टर मार्च की अनुमति मिलनी चाहिए। हम तिरंगे के साथ अपना प्रदर्शन कर रहे हैं, इसमें बुराई क्या है, हमें क्यों नहीं मिलनी चाहिए इजाजत।

गौरतलब है कि किसानों के साथ आज की बैठक के एक दिन पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। किसानों द्वारा सरकार का प्रस्ताव ठुकराये जाने के बाद समस्या किस तरह सुलझे इसपर मंथन करने के लिए दोनों नेताओं की बैठक हुई। किसान नेता यह चाहते हैं कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द करे और सभी किसानों के लिए सभी फसलों पर एमएसपी तय करे।

 

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