हर कसौटी पर खरे उतरे हैं नरेंद्र सिंह तोमर

कृष्णमोहन झा
गत वर्ष संपन्न लोक सभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की प्रचण्ड विजय के पश्चात जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी दूसरी पारी शुरू करने के लिए अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के नाम तय कर रहे थे तब मध्यप्रदेश से जिस सांसद का नाम मंत्री पद के लिए सुनिश्चित माना जा रहा था वह नाम था राज्य के कर्मठ और यशस्वी भाजपा नेता नरेन्द्र सिंह तोमर का जिनका जन्म 12 जून 1957 को मुरैना के किसान परिवार में हुआ था।

नरेंद्र सिंह तोमर के व्यक्तित्व में नेतृत्व के गुण तो उनके महाविद्यालयीन छात्र जीवन से हो उभरने लगे थे। वे जब छात्र संघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए तभी छात्रों के बीच उनकी अपार लोकप्रियता से यह संकेत मिलने लगे थे कि आगे चल कर एक दिन यह छात्र नेता राष्ट्रीय राजनीति में यश अर्जन का अधिकारी बनेगा। तोमर ने राजनीति में प्रवेश तो नगर निगम के पार्षद के रूप में किया परंतु .उन पर ‘होनहार बिरवान के, होत चीरने पात’ कहावत चरितार्थ होने में ज्यादा वक्त नहीं लगा।

जब उन्हें भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई तो उन्होंने अपने विलक्षण नेतृत्व कौशल तथा संगठन क्षमता के बल पर प्रदेश में पार्टी के जनाधार को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद तो प्रदेश की राजनीति में उनका कद इतनी तेज़ी से बढता गया कि पार्टी की अग्रिम पंक्ति के रणनीतिकारों में उनकी प्रमुखता से गणना होने लगी।

2003 में संपन्न मध्यप्रदेश विधान सभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहसिक विजय सुनिश्चित करने में नरेन्द्र सिंह तोमर की विशिष्ट भूमिका थी। प्रदेश में पहली बार प्रचंड बहुमत से बनी भाजपा सरकार में तोमर को जनसंपर्क मंत्री मनोनीत किया गया जिसकी जिम्मेदारी का उन्होंने कुशलतापूर्वक निर्वाह किया। बाद में भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने जब प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की बागडोर शिवराज सिंह चौहान को सौंपी जब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद का उत्तर दायित्व संभालने के लिए केन्द्रीय नेतृत्व ने नरेंद्र सिंह तोमर के नेतृत्व कौशल पर भरोसा किया और वे अध्यक्ष के रूप में हर कसौटी पर खरे उतरे।

प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच जो तालमेल नरेंद्र सिंह तोमर के अध्यक्षीय कार्यकाल में स्थापित हुआ उसकी मिसाल आज भी दी जाती है। मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में नरेंद्र सिंह तोमर के पहले कार्यकाल में पार्टी ने 2008 में संपन्न राज्य विधान सभा के चुनावों में जो शानदार सफलता हासिल की थी उसमें उनके रणनीतिक कौशल की विशिष्ट भूमिका को स्वयं तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी स्वीकार किया था और यही वजह थी कि 2013 में जब राज्य विधान सभा का वक्त नजदीक आया तो मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद की बागडोर एक बार फिर नरेन्द्र सिंह तोमर को सौंपने का पार्टी हाईकमान से अनुरोध किया और जब उनकी मुंह मांगी मुराद पूरी कर दी गई तो 2008 के विधान सभा चुनाव जैसी प्रचंड विजय के इतिहास की पुनरावृत्ति में संशय की कोई गुंजायश ही नहीं बची थी।

शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र सिंह की यह मैत्री समय की कसौटी पर हमेशा खरी उतरी है और प्रदेश की राजनीति में दोनों एक दूसरे के पूरक माने गए हैं। 2018 में संपन्न राज्य विधान सभा चुनावों में जब भाजपा 2008 और 2013 जैसी शानदार जीत हासिल करने में असफल रही तो अधिकांश राजनीतिक विश्लेषकों की राय यही थी कि इस बार चुनाव में शिवराज सिंह चौहान के पुराने जोड़ीदार नरेंद्र सिंह तोमर उनके साथ नहीं थे।

मैं आज भी यह मानता हूं कि 2018 के राज्य विधान सभा चुनावों में भी यदि पार्टी को नरेंद्र सिंह तोमर के रणनीतिक कौशल का लाभ मिला होता तो चुनाव के बाद की तस्वीर ही कुछ और होती। उन चुनावों के बाद गठित कमलनाथ सरकार जब अपने अंतर्विरोधों के कारण सवा साल में ही अल्पमत में आ गई और राज्य में सत्ता परिवर्तन सुनिश्चित हो गया तब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर तोमर के ही आसीन होने की संभावनाएं बलवती मानी जा रही थीं। मुझे भी यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि उस समय मैंने भी एक राजनीतिक विश्लेषक के रूप यह संभावना व्यक्त की थी कि भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व नरेंद्र सिंह तोमर को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की बागडोर सौंप सकता है परंतु आज मैं मानता हूं कि यदि नरेंद्र सिंह तोमर को केंद्र से मध्य प्रदेश नहीं भेजा गया तो उसका सबसे बडा कारण यही था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगी के रूप में उनकी केंद्र में कहीं अधिक आवश्यकता महसूस कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र में अपनी सरकार के प्रथम कार्य काल में उन्हें ग्रामीण विकास,पंजायती राज,खननऔर संसदीय कार्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी थी। सारे विभागों की जिम्मेदारी का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने में तोमर ने जिस दक्षता का परिचय दिया उससे प्रधानमंत्री इतने प्रभावित हुए कि केंद्र में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उनका कद और बढ़ गया। इसका प्रमाण गत वर्ष मोदी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में तब मिला जब तोमर को पांचवें क्रम में पद और गोपनीयता की शपथ लेने हेतु आमंत्रित किया गया। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के प्रारंभ से ही तोमर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे जानते हैं कि देश में किसानों के आर्थिक उन्नयन को प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी प्राथमिकताओं में सर्वोपरि ऱखा है इसलिए उनकी किसानी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर ही उन्हें कृषि मंत्रालय की बागडोर मिली देश में किसानों के कल्याण हेतु केंद्रसरकार द्वारा प्रारंभ की गई बहुमुखी योजनाओं के द्रुतगामी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए उनकी क्षमताओं पर भरोसा करके ही प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है और तोमर ने मात्र एक साल की अवधि में यह सिद्ध कर दिया है कि वे प्रधानमंत्री के भरोसे की कसौटी पर खरा उतरने की सामर्थ्य की उनके पास कोई कमी नहीं है।
नरेंद्र सिंह तोमर मजबूत जनाधार वाले राजनेता हैं। उनकी कार्य शैली की यह विशेषता है कि वे विवादों से दूर रहना पसंद करते हैं । वे स्पष्ट वक्ता अवश्य हैं परंतु अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों की आलोचना करने में कभी मर्यादा का उल्लंघन नहीं करते इसीलिए उनके राजनीतिक बयानों पर कभी विवाद की स्थिति निर्मित नहीं होती।

मौलिक सूझबूझ, अद्भुत रणनीतिक कौशल तथा विलक्षण संगठन क्षमता के धनी नरेन्द्र सिंह तोमर से मेरा परिचय लगभग एक दशक पुराना है। मैंने उनके साक्षात्कार भी लिए हैं और उस दौरान मेरे तीखे सवालों पर भी उन्हें असहज होते हुए मैने कभी नहीं देखा। वे जब मीडिया से मुखातिब होते हैं तो उनके पास तथ्यों की कोई कमी नहीं होती। वे प्रमाणों के साथ अपनी बात करते हैं। संसद के अंदर भी अपने विभागों के बारे में पूछे गए जटिल प्रश्नों के जबाब देते समय वे पूरी तरह सहज नजर आते हैं। मुझे गर्व है कि मेरे एक राजनीतिक लेख संग्रह की भूमिका लिखने का आग्रह उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया था। नरेंद्र सिंह तोमर आज अपने यशस्वी जीवन के 64वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इस शुभ अवसर पर मैं उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभ कामनाएं प्रेषित करता हूं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक हैं। ये उनका निजी विचार हैचिरौरी न्यूज का इससे सहमत होना आवश्यक नहीं है।)

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