बापू और स्‍वतंत्रता सेनानियों के लिए ‘वोकल फॉर लोकल’ एक अद्भुत श्रद्धांजलि है : प्रधानमंत्री

चिरौरी न्यूज़

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी आज अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से ‘पदयात्रा’ (स्‍वतंत्रता मार्च) को झंडी दिखाकर रवाना किया। आजादी के 75 साल पूरे होने पर आज अहमदाबाद में आजादी का अमृत महोत्स्व कार्यक्रम का आगाज हुआ। इस कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 15 अगस्त 2022 तक आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि “वोकल फॉर लोकल” को अपनाना बापू और हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक अद्भुत श्रद्धांजलि है।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट करते हुए कहा,“ आज के अमृत महोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत साबरमती आश्रम से हुई, जहां से दांडी मार्च शुरू हुआ था। उस पदयात्रा ने भारत के लोगों के बीच गर्व और आत्‍मनिर्भरता की भावना को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका अदा की थी। “वोकल फॉर लोकल” को अपनाना बापू और हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक अद्भुत श्रद्धांजलि है।

कोई भी स्‍थानीय उत्‍पाद खरीदें और ‘वोकल फॉर लोकल’ का इस्‍तेमाल करते हुए उसकी एक तस्‍वीर सोशल मीडिया पर पोस्‍ट करें। साबरमती आश्रम में मगन निवास के पास एक चरखा स्थापित किया जाएगा। यह आत्‍मनिर्भरता से संबंधित प्रत्येक ट्वीट के साथ पूरा चक्र घुमाएगा। यह जन आंदोलन के लिए एक उत्‍प्रेरक बन जाएगा।”

मोदी ने आजादी के 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर गुजरात के साबरमती से दांडी यात्रा और नमक के महत्व को बतलाया। साबरमती से आजादी के अमृत महोत्सव का आगाज करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आजादी का अमृत महोत्सव यानी आजादी की ऊर्जा का अमृत, आजादी का अमृत महोत्सव यानी स्वाधीनता सेनानियों से प्रेरणाओं का अमृत, आजादी का अमृत महोत्सव यानी नए विचारों का अमृत, नए संकल्पों का अमृत, आजादी का अमृत महोत्सव यानी आत्मनिर्भरता का अमृत’ है।

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि किसी राष्ट्र का भविष्य तभी उज्ज्वल होता है, जब वो अपने अतीत के अनुभवों और विरासत के गर्व से पल पल जुड़ा रहता है। फिर भारत के पास तो गर्व करने के लिए अथाह भंडार है, समृद्ध इतिहास है, चेतनामय सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने कहा कि 1857 का स्वतंत्रता संग्राम, महात्मा गांधी का विदेश से लौटना, देश को सत्याग्रह की ताकत फिर याद दिलाना, लोकमान्य तिलक का पूर्ण स्वराज्य का आह्वान, सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज का दिल्ली मार्च, दिल्ली चलो का नारा कौन भूल सकता है।

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