हाँ,’कालू’ का मतलब श्रेष्ठ और ताकतवर है

राजेंद्र सजवान

वेस्ट इंडीज के पूर्व कप्तान डेरेन सैमी आईपीएल में की गई एक नस्ली टिप्पणी से बेहद नाराज़ हैं। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाड़ी को किसी ने एक बार या कई एक ने बार-बार ‘कालू’ कह कर संबोधित किया। वह यह समझ बैठे थे कि किसी बहुत मजबूत इंसान को भारत में शायद कालू कहा जाता होगा। उनकी ग़लत फ़हमी तब दूर हुई जब अमेरिका में जार्ज फ्लायड की हत्या गोरे पुलिस अधिकारी के घुटने से दब कर हुई।

सैमी ने नस्लवाद का मुद्दा तब उठाया है जब कोविद 19 के प्रकोप के चलते आईपीएल वापसी की राह खोज रहा है। भले ही कोरोना एक महामारी बन चुकी है लेकिन रंगभेद इस धरती की सबसे बड़ी महामारी रही है और अनेकों बार नश्ल और रंग को लेकर दुनिया भर में दंगे फ़साद होते आए हैं। भले ही सैमी को किसी गोरे खिलाड़ी या अश्वेत भारतीय दर्शकों ने नस्ली टिप्पणी की हो लेकिन मामला गंभीर है और हो सकता है यह मुद्दा आईपीएल, बीसीसीआई और आईसीसी में गंभीरता से उठाया जा सकता है।

सैमी की नाराज़गी वाजिब है। लेकिन कौन नहीं जानता कि काले या अश्वेत हमेशा से मज़बूत रहे हैं। वह अपने देश के क्रिकेट इतिहास को टटोल कर देख लें। सर गैरी सोबर्स, विवियन रिचर्ड्स, क्लाइव लायड, मार्शल, गार्नर, एंडी रॉबर्ट और कई अन्य महान क्रिकेटरों को कौन नहीं जानता! उनके स्तर के खिलाड़ी आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अन्य देश पैदा नहीं कर पाए। यह उनकी मज़बूती ही थी कि लंबे समय तक कैरेबियन खिलाड़ियों ने क्रिकेट मैदान पर जीत का डंका बजाया और गोरों को घुटने टेकने पर मज़बूर किया।

शायद सैमी को इतने सब से भी तसल्ली नहीं होगी। तो फिर यह भी जान लें कि जिस किसी सिर फिरे मक्कार नें उन पर नस्ली फब्ती कसी है उसे यह भी बता दें कि अब्राहम लिंकन, नेल्सन मंडेला, मार्टिन लूथर किंग और महात्मा गाँधी भी काले थे। अगर ये सब नहीं होते तो यह धरती इतनी खूबसूरत नहीं होती। गोरे रंग पर कोई भी रंग चढ़ सकता है लेकिन काला  रंग स्वाभाविक है और उसका रंग बदरंग नहीं किया जा सकता।

कालों को इस बात का गर्व होना चाहिए कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबाल का सबसे खूबसूरत खिलाड़ी काले हीरे के नाम से विख्यात ‘पेले’ है तो धरती का तेजतम मानव उनका अपना हमरंग उसैन बोल्ट है, जिसके सामने गोरे कहीं नहीं ठहरते।  बोल्ट का देश जमैका आज अपने काले महिला पुरुष धावकों के दम पर पूरी दुनिया का सरताज बना है तो केन्या और इथोपिया के मैराथन धावकों के सामने कोई टिक नहीं पाता। जिस अमेरिकी पुलिस ने जार्ज के साथ घोर अमानवीय कृत्य किया उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि तानाशाह हिटलर के सामने सीना तान कर खड़ा होने वाला उसका अपना जेसी ओवेंस भी काला था।

इस परंपरा को फ्लोरेंस ज़ायनर,जैकी ज़ायनर, माइकल जानसन और दर्जनों अन्य चैम्पियनों ने आगे बढ़ाया। खुद को श्रेष्ठ मानने वाले गोरों को यह नहीं भूलना चाहिए कि मुहम्मद अली, सुगररे, माइक टायसन, जार्ज फोरमैन, होली फील्ड  ने अमेरिकी मुक्कों का लोहा मनवाया। माइकल जार्डन, मैजिक जानसन, आर्थर एश, टाइगर वुड्स सेरेना विलियम्स, वीनस विलियम्स जैसे दमखम और प्रतिभा वाले खिलाड़ियों ने दुनिया के अश्वेतों को आसमान की बुलंदियों  तक पहुँचाया और उन्हें आत्मसम्मान से जीने का हकदार बनाया।

फिर भी यदि कुछ भ्रमित और बिगड़ैल अश्वेतों को कमतर आँकते हैं, उन पर फब्तियाँ कसते हैं तो ऐसों को माफ़ कर देने में ही भलाई है। उन्हें नहीं पता कि हमारे भगवान कृष्ण और नीलकंठ शिव भी साँवले या काले ही थे।

भारत के सर्वकालीन श्रेष्ठ हॉकी खिलाड़ी दद्दा ध्यानचन्द और उनके पुत्र अशोक भी काले थे और हमारी उड़न परी पीटी उषा का रंग भी तो काला ही कहेंगे।

(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार और विश्लेषक हैं। ये उनका निजी विचार हैचिरौरी न्यूज का इससे सहमत होना आवश्यक नहीं है।आप राजेंद्र सजवान जी के लेखों को  www.sajwansports.com पर  पढ़ सकते हैं।)

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