कांग्रेस सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा नहीं दिया: भूपेंद्र यादव

Delhi-NCR pollution: The central government has issued instructions to improve air quality within a week.चिरौरी न्यूज़

केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय आरक्षण योजना के अंतर्गत मौजूदा शैक्षणिक सत्र 2021-22 से स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा और दंत पाठ्यक्रमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर तबके (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की है।

अब इस फैसले पर राजनीति शुरू हो गयी है। मेडिकल में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण देने के मोदी सरकार के फैसले को कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।

विपक्ष के आरोप का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कांग्रेस पर आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के पिछले 10 वर्ष में पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग के आयोग को संवैधानिक दर्जा देने करने की मांग एक लंबे समय से चली आ रही थी लेकिन यूपीए की सरकार ने मांग नहीं मानी। ये दर्शाता है कि कांग्रेस और विपक्षी पार्टियाँ इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है।”

उन्होंने कहा, ‘’प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक आयोग का दर्जा दिया गया है।’’ उन्होंने कहा, ‘’बीजेपी OBC समाज और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के युवाओं को मेडिकल कॉलेज की PG और UG की पढ़ाई में आरक्षण का निर्णय लेने के लिए पीएम मोदी को बधाई देती है और उनका अभिनंदन करती है।’’

भूपेंद्र यादव ने कहा, ‘’मोदी सरकार में पिछले 5 सालों में 179 नए मेडिकल कॉलेज खुले हैं. देश में अब 558 मेडिकल कॉलेज हैं. देश में यूजी की सीटों में 56% के करीब और पीजी की सीटों में 80% के करीब बढ़ोतरी की गई.’’

बता दें कि कल बहुजन समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मायावती ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि ये चुनावी फैसला है. मायावती ने ट्वीट कर कहा था कि, ”देश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की अखिल भारतीय स्नातक और स्नातकोत्तर सीटों में ओबीसी आरक्षण की घोषणा काफी देर से उठाया गया कदम है।” उन्होंने कहा, ”केंद्र सरकार अगर यह फैसला पहले ही समय से ले लेती तो इन वर्गों को अब तक काफी लाभ हो जाता, किन्तु अब लोगों को यह चुनावी राजनीतिक स्वार्थ हेतु लिया गया फैसला लगता है।”

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