आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में बड़ा बदलाव; ऑपरेशन सिंदूर पर बोले जयशंकर, अब भारत चुप नहीं बैठता

Big change in India's policy against terrorism; Jaishankar said on Operation Sindoor, India does not remain silent nowचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को राज्यसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई चर्चा के दौरान केंद्र की मोदी सरकार की आतंकवाद के खिलाफ नीति को पिछली यूपीए सरकार की रणनीति से स्पष्ट रूप से अलग बताया। उन्होंने कहा कि बीते दस वर्षों में भारत की आतंकवाद के प्रति सोच और कार्रवाई में निर्णायक परिवर्तन आया है।

जयशंकर ने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर का हवाला देते हुए कहा कि अब भारत आतंकवादी घटनाओं का जवाब केवल बयान देकर नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से देता है। उन्होंने पिछली सरकार के समय हुए बड़े आतंकी हमलों की याद दिलाते हुए कहा, “2006 में मुंबई लोकल ट्रेन में धमाके हुए, 186 लोग मारे गए; 2007 में हैदराबाद में 44 की मौत; 2008 में 26/11 के हमले में मुंबई दहला; जयपुर में 64, अहमदाबाद में 57 और दिल्ली में भी धमाके हुए। दुनिया देख रही थी कि भारत ने तब क्या प्रतिक्रिया दी।”

उन्होंने 2006 के मुंबई धमाकों के बाद भारत की प्रतिक्रिया को ‘सिर्फ संवाद और निंदा’ तक सीमित बताते हुए कहा कि तब पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा करने की हिम्मत नहीं दिखाई गई। जयशंकर ने कहा, “26/11 के बाद भी भारत ने कहा था कि आतंकवाद भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए खतरा है। यही सोच थी उस समय की।”

विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार ने पिछले एक दशक में आतंकवाद को वैश्विक मंचों पर प्राथमिकता के साथ उठाया है, चाहे वह ब्रिक्स हो, एससीओ, क्वाड या द्विपक्षीय मंच। उन्होंने बताया कि भारत की लगातार कोशिशों से दुनिया आज आतंकवाद पर खुलकर बात कर रही है। उन्होंने मसूद अजहर और अब्दुल रहमान मक्की जैसे कुख्यात आतंकवादियों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित कराने को एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया।

जयशंकर ने 26/11 हमले के स्थलों में से एक, मुंबई के ताज होटल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद विरोधी बैठक आयोजित करने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन दुनिया को भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति का स्पष्ट संदेश था। उन्होंने यह भी बताया कि 26/11 हमले के आरोपी ताहावुर हुसैन राणा को भारत वापस लाने में भी मोदी सरकार सफल रही है।

उन्होंने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा की छद्म शाखा ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) को संयुक्त राष्ट्र से आतंकी संगठन घोषित करवाना भी मोदी सरकार की कूटनीतिक उपलब्धि रही है। यूएन की निगरानी टीम की रिपोर्ट में पहली बार टीआरएफ का नाम और उसके लश्कर से संबंध को स्वीकार किया गया, साथ ही पहलगाम हमले की जिम्मेदारी भी उस पर डाली गई।

जयशंकर ने बताया कि हाल ही में ब्रिक्स के संयुक्त वक्तव्य में पहली बार किसी विशिष्ट आतंकी हमले—पहलगाम पर हुए हमले—का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया, जो भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है। उन्होंने कहा कि आज भारत सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ मुखर भूमिका निभा रहा है और यह बदलाव बीते दस वर्षों की स्पष्ट और निर्णायक नीति का परिणाम है।

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