पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच टेलीफोन पर बातचीत, यूक्रेन युद्ध पर शांति का समर्थन दोहराया
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर बातचीत की। यह बातचीत अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पुतिन की अलास्का में हालिया मुलाकात के कुछ दिन बाद हुई, जहां दोनों नेताओं ने यूक्रेन युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के प्रयासों पर चर्चा की थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर भारत की स्पष्ट स्थिति दोहराते हुए कहा कि भारत फरवरी 2022 से जारी युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से बताया गया कि श्री मोदी ने रूस को भरोसा दिलाया कि भारत इस दिशा में हरसंभव सहयोग प्रदान करने को तैयार है।
पीएमओ के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई और उन्होंने निकट संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।
बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अपने मित्र राष्ट्रपति पुतिन का फोन कॉल और हालिया ट्रंप से हुई बैठक की जानकारी साझा करने के लिए धन्यवाद। भारत लगातार यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है और इस दिशा में किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है। आने वाले दिनों में हमारे संवाद जारी रहने की उम्मीद है।”
शनिवार को ट्रंप के साथ बैठक के बाद पुतिन ने कहा था कि उन्होंने यूक्रेन युद्ध को “न्यायसंगत आधार पर समाप्त करने के तरीकों” पर चर्चा की। उन्होंने इस बैठक को “समयोचित और अत्यंत उपयोगी” करार दिया और कहा, “इस स्तर पर इतने लंबे समय बाद सीधे वार्तालाप का यह अवसर मिला। हमें अपनी स्थिति को शांतिपूर्वक और विस्तार से दोहराने का मौका मिला। यह बातचीत खुली और सारगर्भित रही।”
वहीं ट्रंप ने इसे “बहुत उत्पादक” बैठक बताया लेकिन स्पष्ट जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “हम अभी मंज़िल तक नहीं पहुंचे हैं, लेकिन प्रगति हुई है। जब तक कोई समझौता नहीं होता, तब तक कुछ भी तय नहीं है।” उन्होंने यूक्रेन पर दबाव डाला कि वह रूस की संघर्षविराम की शर्तों को माने।
गौरतलब है कि पुतिन का यह फोन कॉल ऐसे समय में आया जब कुछ घंटों बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की – जिन्हें अलास्का ‘शांति सम्मेलन’ में नहीं बुलाया गया था – व्हाइट हाउस में ट्रंप से मिलने वाले हैं। इस बार ज़ेलेंस्की अकेले नहीं होंगे – उनके साथ जर्मनी के फ्रेडरिक मर्ज़ और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी होंगे।
भारत और रूस के नेताओं के बीच 10 दिन पहले भी एक विस्तृत टेलीफोनिक बातचीत हुई थी, जो ट्रंप-पुतिन बैठक से पहले हुई थी। उस दौरान वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, विशेष रूप से अमेरिकी टैरिफ के प्रभावों पर चर्चा की गई थी।
अमेरिका ने ऐलान किया है कि वह भारतीय वस्तुओं पर 25% ‘पेनल्टी ड्यूटी’ लगाएगा क्योंकि भारत रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदना जारी रखे हुए है। ट्रंप ने कहा था कि यह तेल खरीदना रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए “फंडिंग” करना है। ट्रंप ने पिछले साल दावा किया था कि वह एक फोन कॉल से युद्ध खत्म कर देंगे, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो पाया है।
भारत ने इस ‘पेनल्टी ड्यूटी’ पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे ‘अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक’ करार दिया। भारत ने पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए कहा कि विकसित देश, जो ऊर्जा पर कम निर्भर हैं, वे ज्यादा कीमत देकर कहीं और से तेल खरीद सकते हैं, लेकिन 1.4 अरब आबादी वाले विकासशील देश को ऊर्जा ज़रूरतों और लागत के बीच संतुलन बनाना होता है
