बिहार चुनाव: महागठबंधन में सीट बंटवारे पर सहमति नहीं, पहले चरण में ही 8 सीटों पर आपस में भिड़े सहयोगी दल
चिरौरी न्यूज
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हो गई, लेकिन महागठबंधन अब तक सीट बंटवारे पर किसी ठोस सहमति पर नहीं पहुंच पाया है। इस समन्वयहीनता का परिणाम यह हुआ कि पहले चरण में ही महागठबंधन के सहयोगी दल आपस में ही आठ सीटों पर आमने-सामने आ गए हैं।
महागठबंधन में शामिल राजद (RJD), कांग्रेस, भाकपा (CPI), भाकपा-माले (CPI-ML), माकपा (CPIM) और वीआईपी (VIP) जैसे दलों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे कितनी-कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। इससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है और विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आपस में टकरा रहे महागठबंधन के उम्मीदवार
लालगंज: RJD ने शिवानी शुक्ला (माफिया डॉन मुन्ना शुक्ला की बेटी) को टिकट दिया है, वहीं कांग्रेस ने आदित्य कुमार राजा को मैदान में उतार दिया।
वैशाली: RJD के अजय कुशवाहा बनाम कांग्रेस के संजय कुमार।
तारापुर: RJD के अरुण शाह का मुकाबला VIP के सकलदेव बिंद से।
बछवाड़ा (बेगूसराय): CPI के अवधेश राय बनाम कांग्रेस के गरीब दास।
गौड़ा बौराम: RJD के अफज़ल अली बनाम VIP के संतोष साहनी।
राजापाकर: CPI के मोहित पासवान बनाम कांग्रेस की प्रतिमा दास।
रोसड़ा: CPI के लक्ष्मण पासवान बनाम कांग्रेस के बी.के. रवि।
एक अन्य सीट, जहां महागठबंधन के घटक दल आपस में ही आमने-सामने हैं।
अब तक किसने कितनी सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए: कांग्रेस: अब तक 48 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है।
भाकपा-माले (CPI-ML): 18 प्रत्याशियों की घोषणा की है।
समन्वयहीनता से कमजोर हो सकता है विपक्ष
चुनावों में एकजुट होकर एनडीए का मुकाबला करने के बजाय, महागठबंधन के घटक दल आपस में ही लड़ रहे हैं, जिससे मतदाताओं के बीच गलत संदेश जा रहा है और इसका सीधा लाभ एनडीए (NDA) को मिलने की संभावना जताई जा रही है।
बीते 10 दिनों से पटना से दिल्ली तक सीट शेयरिंग को लेकर गहन मंथन चल रहा था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने कई असंतुष्ट नेताओं को मनाने की कोशिश की, लेकिन बात बन नहीं सकी।
सीटों को लेकर सहमति न बन पाने के चलते अंतिम समय में चुनाव चिन्हों का बंटवारा कर दिया गया और उम्मीदवारों ने जल्दबाज़ी में नामांकन दाखिल कर दिए। इससे पूरे महागठबंधन की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब देखना होगा कि महागठबंधन आने वाले दिनों में इस आपसी संघर्ष से कैसे उबरता है, या यह अंदरूनी कलह 2025 के विधानसभा चुनाव में उसकी राह मुश्किल बना देगी।
