आकाश चोपड़ा ने टीम इंडिया के टेस्ट ट्रांज़िशन और टीम संयोजन पर उठाए सवाल

1st Test: Jadeja's four-wicket haul leaves South Africa 93/7, India still lead by 63 runsचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: भारत के पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने भारतीय टेस्ट टीम के चल रहे संक्रमण काल और लगातार बदलते संयोजनों पर गहराई से बात की है। जियोस्टार पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इंग्लैंड में एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में पाँच मैचों की सीरीज़ ड्रॉ करना भले ही उत्साहजनक था, लेकिन टीम अभी भी “नई वृद्धि से पहले की प्रसव पीड़ा” झेल रही है।

चोपड़ा ने कहा, “ट्रांज़िशन हमेशा कठिन होता है। इंग्लैंड सीरीज़ की असामान्य परिस्थितियों ने इस सच्चाई को कुछ समय के लिए ढक दिया। हालांकि वह सीरीज़ ड्रॉ होना अच्छा लगा, लेकिन हमें स्वीकार करना होगा कि हम अभी भी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, जहाँ नई टीम के उभरने से पहले चुनौतियाँ सामने आती हैं।”

टीम संयोजन और भूमिका स्पष्टता पर सवाल

उन्होंने भारत की प्लेइंग इलेवन में अस्थिरता पर चिंता जाहिर करते हुए कहा, “नंबर तीन की पोज़िशन अब भी तय नहीं है—साई सुदर्शन, करुण नायर और अब वॉशिंगटन सुंदर वहाँ बल्लेबाज़ी कर चुके हैं। ध्रुव जुरेल में प्रतिभा है, लेकिन उन्होंने केवल पाँच टेस्ट खेले हैं। भूमिका स्पष्टता भी मुद्दा है। सुंदर को हम बल्लेबाज़ मानें या गेंदबाज़, जब उन्होंने सिर्फ एक ओवर फेंका? नितेश कुमार रेड्डी के साथ भी यही असमंजस रहा। हमें यह दिखावा नहीं करना चाहिए कि टीम तैयार है, बल्कि स्वीकार करना चाहिए कि ट्रांज़िशन जारी है और इसमें कठिन दौर आएँगे।”

भारत हाल में कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका से 30 रन से हार गया, जिससे खिलाड़ियों की तैयारी और मानसिकता पर सवाल उठे। मैच तीसरे दिन के दूसरे सत्र में ही खत्म हो गया, जिसके बाद पिच क्यूरेटर और पिच दोनों की आलोचना हुई।

हेड कोच गौतम गंभीर ने बाद में स्पष्ट किया कि टीम को वही पिच मिली जिसकी उसने माँग की थी।

इस पर चोपड़ा ने कहा, “प्रैक्टिस सेशन असली मैच की तरह होने चाहिए। पंत और जुरेल जैसे खिलाड़ियों को टर्निंग ट्रैक्स पर समय चाहिए था। वहीं, गिल जैसे खिलाड़ी जो ऑस्ट्रेलिया की बाउंसी पिचों से आए, उन्हें भी एडजस्टमेंट की ज़रूरत थी।” उन्होंने आगे कहा, “पिच तैयार करना विज्ञान नहीं है, लेकिन हमें सोचना होगा कि क्या इतनी अधिक टर्निंग पिचें हमारे लिए सही हैं। जब टेस्ट ढाई दिन में खत्म हो जाए, तो संतुलन कहीं न कहीं खराब है। हमारे पास चार स्पिनर थे, उनके पास दो—तो मैच को उनके स्तर तक क्यों ले आए? अगर यही हमारी होम स्ट्रैटेजी बन गई, तो हर बल्लेबाज़ को अलग तरह की तैयारी करनी होगी।”

जहाँ पिच की कठिनाई पर बहस जारी थी, वहीं दक्षिण अफ्रीका के कप्तान तेम्बा बावुमा ने शानदार अर्धशतक खेलकर मैच की दिशा बदल दी। उनकी पारी और गेंदबाज़ों के अनुशासित प्रदर्शन ने मेहमान टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी।

चोपड़ा ने कहा, “38 विकेट गिरे और बावुमा की पारी अपवाद बनकर उभरी। अगर बल्लेबाज़ी आसान होती, तो एक से ज्यादा खिलाड़ी रन बनाते। बावुमा की तारीफ होनी चाहिए, लेकिन यह भी सच है कि सिर्फ एक बल्लेबाज़ सफल हुआ। जीत में सीखना अच्छा लगता है, लेकिन हार से मिलने वाली सीख टीम विकास के लिए और बड़ी चुनौती बनती है।”

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच दूसरा और अंतिम टेस्ट 22 नवंबर से गुवाहाटी के बारसापारा स्टेडियम में खेला जाएगा।

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