नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक दशक: केंद्र सरकार की रणनीति से हिंसा में 53% की कमी, विकास और पुनर्वास ने बदली तस्वीर

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की व्यापक “सुरक्षा, विकास और पुनर्वास” आधारित रणनीति ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर पहुँचा दिया है। पिछले एक दशक (2014–2024) में नक्सली हिंसा में 53% की कमी आई है, जबकि नक्सल प्रभावित ज़िले 126 से घटकर मात्र 18 रह गए हैं।
अक्टूबर 2025 तक सुरक्षा बलों ने 270 नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया, 1,225 को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर किया और 680 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक देश को पूर्णतः नक्सल-मुक्त बना दिया जाए।
हिंसा में गिरावट और सुरक्षा बलों की उपलब्धियां
पिछले दशक में नक्सली हिंसा में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
- 2004–2014: नक्सल हिंसा की 16,463 घटनाएं
- 2014–2024: घटनाओं की संख्या घटकर 7,744 रह गई
- सुरक्षाकर्मी शहीद: 1,851 से घटकर 509
- नागरिकों की मौतें: 4,766 से घटकर 1,495
2025 में सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट समेत कई अभियानों में बड़ी सफलता हासिल की। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और झारखंड में नक्सलियों के बड़े आत्मसमर्पण ने इस अभियान को नई दिशा दी है।
सशक्त सुरक्षा ग्रिड और तकनीकी आधुनिकीकरण
सरकार ने नक्सल क्षेत्रों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए:
- 576 किले-जैसे पुलिस स्टेशन बनाए गए।
- पिछले 6 वर्षों में 336 नए सुरक्षा शिविर स्थापित हुए।
- 68 नाइट लैंडिंग हेलीपैड बनाए गए, जिससे ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ी।
- ड्रोन सर्विलांस, सैटेलाइट इमेजिंग और AI-बेस्ड डेटा एनालिटिक्स के ज़रिए नक्सलियों की निगरानी सटीक और तेज़ हुई।
अब सुरक्षा बल मोबाइल डेटा, कॉल लॉग, सोशल मीडिया एनालिसिस और फोरेंसिक टूल्स से नक्सली नेटवर्क पर लगातार नज़र रख रहे हैं।
नक्सलियों के आर्थिक नेटवर्क पर चोट
केंद्र सरकार ने नक्सलवाद को समर्थन देने वाले फाइनेंशियल नेटवर्क को लगभग ध्वस्त कर दिया है।
- NIA ने अब तक ₹40 करोड़ की नक्सली संपत्ति ज़ब्त की।
- ED ने ₹12 करोड़ की संपत्ति जब्त की।
- राज्यों ने ₹40 करोड़ से अधिक की ज़ब्ती की।
इस वित्तीय कार्रवाई ने न केवल नक्सलियों की आर्थिक रीढ़ तोड़ी, बल्कि शहरी नेटवर्क को भी कमजोर कर दिया, जिससे उनके “सूचना युद्ध” की क्षमता में भारी गिरावट आई है।
राज्यों के साथ समन्वय और क्षमता निर्माण
केंद्र ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों को सुरक्षा, आधारभूत ढांचा और प्रशिक्षण के लिए अभूतपूर्व सहायता दी है।
- सिक्योरिटी रिलेटेड एक्सपेंडिचर (SRE) के तहत ₹3,331 करोड़ जारी — पिछले दशक से 155% अधिक।
- स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम (SIS) के तहत ₹991 करोड़ स्वीकृत।
- स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस (SCA) से ₹3,769 करोड़ की विकास परियोजनाएँ स्वीकृत।
इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए ₹12.56 करोड़ और सुरक्षा शिविरों के निर्माण हेतु ₹122 करोड़ दिए गए हैं।
विकास: सड़क, संचार और वित्तीय समावेशन
नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने रिकॉर्ड स्तर पर काम किया है।
सड़क संपर्क:
- 2014 से 2025 के बीच ₹20,815 करोड़ की लागत से 17,589 किमी सड़कें स्वीकृत।
- 12,000 किमी से अधिक सड़कें पूरी हो चुकीं।
मोबाइल कनेक्टिविटी:
- दो चरणों में 4,885 मोबाइल टावर स्थापित किए गए।
- इनमें से 1,139 (4G) टावर चालू हैं और 8,500 से अधिक टावरों को मंज़ूरी मिल चुकी है।
वित्तीय समावेशन:
- 1007 बैंक शाखाएं, 937 एटीएम, 37,850 बैंकिंग संवाददाता।
- 90 जिलों में 5,899 डाकघर सक्रिय।
शिक्षा और कौशल विकास:
- 48 जिलों में 48 ITI और 61 स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने के लिए ₹495 करोड़ स्वीकृत।
- इनमें से 46 ITI और 49 SDC चालू हैं, जो युवाओं को आजीविका के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं।
पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी
सरकार की “ट्रेस, टारगेट, न्यूट्रलाइज” रणनीति ने नक्सली नेटवर्क को तोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
- बुध पहाड़, पारसनाथ, बरमशिया और चक्रबंधा जैसे इलाके अब लगभग नक्सल-मुक्त हैं।
- सुरक्षा बलों ने अबूझमाड़ में ऐतिहासिक प्रवेश किया है।
- 2024 में नक्सलियों द्वारा शुरू किए गए जवाबी हमले (TCOC) को सुरक्षा बलों ने विफल किया।
वर्ष 2024 में 26 बड़े मुठभेड़ों में:
- 1 ज़ोनल कमेटी मेंबर, 5 सब-ज़ोनल, 2 स्टेट कमेटी, 31 डिवीजनल और 59 एरिया कमेटी मेंबर मारे गए।
पुनर्वास नीति के तहत:
- उच्च रैंक नक्सलियों को ₹5 लाख, मध्यम/निम्न रैंक वालों को ₹2.5 लाख सहायता।
- 36 महीनों के लिए ₹10,000 मासिक वजीफा और व्यवसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- 2025 में अब तक 521 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि पिछले दो वर्षों में 1,053 नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में हथियार डाले हैं।
केंद्र सरकार की एकीकृत रणनीति ने नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति, विकास और विश्वास का माहौल स्थापित किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मानव विकास, सामाजिक न्याय और पुनर्वास के माध्यम से इसे एक व्यापक आंदोलन बना दिया है।
देश अब 2026 तक “नक्सल-मुक्त भारत” के लक्ष्य की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है — यह एक निर्णायक सरकार की दूरदर्शी नीति और शांति व विकास के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
