45 साल बाद तिरुवनंतपुरम नगर निगम से वामपंथ का सफाया करने वाली पूर्व डीजीपी आर. श्रीलेखा मेयर पद की दावेदार
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: केरल की राजनीति में शनिवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर कब्जा कर 45 वर्षों से चली आ रही वामपंथी शासन की परंपरा को तोड़ दिया। यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि राज्य की पहली महिला आईपीएस अधिकारी आर. श्रीलेखा ने शानदार जीत दर्ज कर बीजेपी की इस ऐतिहासिक सफलता को और मजबूत किया।
पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आर. श्रीलेखा ने सस्थामंगलम डिवीजन से रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की। उनकी इस जीत के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या 64 वर्षीय श्रीलेखा को बीजेपी तिरुवनंतपुरम की पहली मेयर के रूप में आगे करेगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीलेखा ने कहा कि इस बारे में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा।
उन्होंने जीत के बाद कहा, “मुझे जानकारी मिली है कि सस्थामंगलम वार्ड में अब तक किसी भी उम्मीदवार ने इतना बड़ा अंतर हासिल नहीं किया। मैं अपने वार्ड के लोगों का आभार व्यक्त करती हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीदवार घोषित होने के बाद से एलडीएफ और कांग्रेस की ओर से उनके खिलाफ लगातार आलोचना की गई, लेकिन जनता ने उन सभी आरोपों को खारिज कर दिया।
शनिवार को घोषित नतीजों के अनुसार, 101 सदस्यीय तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी ने 50 वार्डों में जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) को 29 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) को 19 सीटों से संतोष करना पड़ा। दो वार्ड निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीते। हालांकि बीजेपी बहुमत से एक सीट दूर रह गई, लेकिन यह परिणाम वामपंथ का गढ़ माने जाने वाले शहर में बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
टॉप कॉप से मेयर पद की दावेदार तक
तिरुवनंतपुरम में जन्मी और पली-बढ़ी आर. श्रीलेखा जनवरी 1987 में केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनी थीं। 33 वर्षों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने सीबीआई, केरल क्राइम ब्रांच, विजिलेंस, फायर फोर्स, मोटर वाहन विभाग और जेल विभाग सहित कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2017 में उन्हें डीजीपी पद पर पदोन्नत किया गया, जिससे वह इस पद तक पहुंचने वाली केरल की पहली महिला बनीं। सीबीआई में रहते हुए उनके सख्त भ्रष्टाचार विरोधी रुख के कारण उन्हें ‘रेड श्रीलेखा’ के नाम से जाना गया।
दिसंबर 2020 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी वह सार्वजनिक चर्चाओं में बनी रहीं। उन्होंने 2017 के यौन उत्पीड़न मामले में अभिनेता दिलीप को झूठा फंसाए जाने का दावा किया था और हाल ही में कांग्रेस से निष्कासित नेता राहुल मामकूटाथिल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने में देरी पर सवाल उठाकर विवाद खड़ा किया।
अक्टूबर 2024 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर बीजेपी की सदस्यता ली थी। उनका कहना है कि पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के काम किया।
अब जब बीजेपी तिरुवनंतपुरम में अभूतपूर्व सफलता का जश्न मना रही है, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आर. श्रीलेखा को नगर निगम की कमान सौंपी जाएगी, जो केरल की नगर राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।
