मानहानिकारक बयान: पवन खेड़ा की पत्नी कोटा नीलिमा ने कांग्रेस के विदेशी फंडिंग कनेक्शन के दावे से इनकार किया

Defamatory statement: Pawan Khera's wife, Kota Neelima, denied claims of the Congress party's foreign funding connections.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक विस्तृत थ्रेड के बाद राजनीतिक और मीडिया हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। इस थ्रेड में कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक कथित विदेशी फंडिंग वाले मीडिया-इन्फ्लुएंसर नेटवर्क का आरोप लगाया गया है, जिसके केंद्र में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा की पत्नी और लेखिका कोटा नीलिमा को रखा गया है। नीलिमा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह मनगढ़ंत और मानहानिकारक बताया है तथा संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सिविल और आपराधिक कार्रवाई की घोषणा की है।

यह थ्रेड, जो विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर साझा किया जा रहा है, नीलिमा पर कांग्रेस पार्टी, विदेशी फंडिंग और मीडिया के कुछ हिस्सों को जोड़ने वाले एक कथित “इकोसिस्टम” का हिस्सा होने का आरोप लगाता है। पोस्ट में उन्हें कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सदस्य और तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी की पूर्व उपाध्यक्ष के रूप में प्रस्तुत किया गया है, साथ ही उन्हें दिल्ली-स्थित संगठन PROTO से जोड़ा गया है।

थ्रेड के अनुसार, PROTO की स्थापना 2018 में अमेरिका-आधारित इंटरनेशनल सेंटर फॉर जर्नलिस्ट्स (ICFJ) के एक फेलो द्वारा की गई थी और बाद में यह इसके दक्षिण एशिया संचालन का साझेदार बना। पोस्ट में दावा किया गया है कि ICFJ से जुड़े पत्रकारिता कार्यक्रमों के माध्यम से पश्चिमी सरकारों, फाउंडेशन और मीडिया संस्थानों से भारत में फंडिंग आती है, जिसका उपयोग भाजपा-नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना करने वाले नैरेटिव को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।

थ्रेड में आगे आरोप लगाया गया है कि 2017 के बाद से कोटा नीलिमा कई प्लेटफॉर्म और पहलों से जुड़ी रही हैं, जिनमें इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज, रेट द डिबेट, हक्कू इनिशिएटिव और स्टूडियोअड्डा शामिल हैं। दावा किया गया है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने भाजपा की आलोचना करने वाले पत्रकारों को मंच प्रदान किया और विदेशी फंडिंग वाली पत्रकारिता परियोजनाओं के चयन को प्रभावित किया हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज़ या आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

व्यापक राजनीतिक आरोप

थ्रेड में PROTO के संस्थापकों और जमात-ए-इस्लामी से जुड़ी पहलों के बीच कथित वैचारिक और संगठनात्मक संबंधों का भी दावा किया गया है। पोस्ट के अनुसार, यह नेटवर्क विदेशी फंडिंग वाली पत्रकारिता, राजनीतिक विरोध नैरेटिव और इस्लामी लामबंदी के बीच भूमिकाओं के “समन्वित विभाजन” को दर्शाता है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि 2020 से 2024 के बीच ICFJ-समर्थित कार्यक्रमों के तहत प्रकाशित कई रिपोर्टों में अल्पसंख्यक अधिकारों, हेट स्पीच, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और विध्वंस जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया, जबकि सांप्रदायिक हिंसा के अन्य रूपों को नजरअंदाज किया गया।

इन दावों को आगे बढ़ाते हुए पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस पार्टी द्वारा विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के कुछ प्रावधानों का विरोध इसी कथित नेटवर्क की “रक्षा” से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को भी इसी इकोसिस्टम से जोड़ने की कोशिश की गई है। इन सभी आरोपों की अब तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

कोटा नीलिमा की प्रतिक्रिया

इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए कोटा नीलिमा ने इन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं जांच के नाम पर फैलाई जा रही इस मानहानिकारक बकवास से हैरान हूं। यह जानबूझकर गढ़ा गया झूठ है, जिसे मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। हर प्रमुख दावा झूठा और दुर्भावनापूर्ण है।”

उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि इस थ्रेड के लेखक, प्रकाशक और उन सभी लोगों के खिलाफ—जो जानते-बूझते इसे फैला रहे हैं—तत्काल सिविल और आपराधिक कार्रवाई शुरू की जा रही है। नीलिमा ने कहा कि कानून के तहत उपलब्ध सभी उपायों का उपयोग किया जाएगा।

फिलहाल, कांग्रेस पार्टी, पवन खेड़ा, PROTO या सोशल मीडिया थ्रेड में नामित अन्य संगठनों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ये सभी आरोप फिलहाल ऑनलाइन दावों तक सीमित हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

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