सुनील गावस्कर को व्यक्तित्व और पब्लिसिटी अधिकारों की कानूनी सुरक्षा, भारतीय खिलाड़ियों के लिए ऐतिहासिक फैसला

Sunil Gavaskar receives legal protection for his personality and publicity rights, a landmark decision for Indian players.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: क्रिकेट जगत के दिग्गज सुनील गावस्कर अपने व्यक्तित्व (Personality Rights) और पब्लिसिटी अधिकारों के लिए अदालत से संरक्षण पाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। यह फैसला खेल, सेलिब्रिटी और डिजिटल कानून के क्षेत्र में एक अहम कानूनी मिसाल माना जा रहा है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार, 23 दिसंबर को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए सुनील गावस्कर के नाम, तस्वीर और पहचान के कथित गलत इस्तेमाल में शामिल व्यक्तियों को 72 घंटे के भीतर सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से सभी संबंधित पोस्ट, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित व्यक्ति इस आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म स्वयं ऐसे उल्लंघनकारी कंटेंट को हटाने के लिए बाध्य होंगे।

डिजिटल युग में व्यक्तित्व अधिकारों की ऐतिहासिक सुरक्षा

यह आदेश इसलिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह भारत में पहला ऐसा न्यायिक हस्तक्षेप है, जिसमें किसी खिलाड़ी के व्यक्तित्व और पब्लिसिटी अधिकारों को स्पष्ट और प्रभावी कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। खास तौर पर ऐसे मामलों में, जहां बिना अनुमति नाम और छवि का ऑनलाइन इस्तेमाल, डिजिटल प्रचार और व्यावसायिक लाभ शामिल हो।

सुनील गावस्कर ने अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया था कि उनके नाम और तस्वीर का बिना अनुमति इस्तेमाल कर वस्तुओं की बिक्री की जा रही है, साथ ही सोशल मीडिया पर उनके नाम से जुड़े भ्रामक और गलत बयान प्रसारित किए जा रहे हैं। उनका तर्क था कि इस तरह की गतिविधियाँ एक वरिष्ठ क्रिकेट कमेंटेटर और ब्रॉडकास्टर के रूप में उनकी विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा सकती हैं।

अदालत का संतुलित रुख

गावस्कर की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल जैन ने पक्ष रखा, जिन्हें क्रीड़ा लीगल ने ब्रीफ किया था। इस कानूनी टीम में मैनेजिंग पार्टनर विदुपत सिंघानिया और उनकी टीम शामिल थी। अदालत ने ऑनलाइन प्रसारित हो रहे अश्लील और भ्रामक कंटेंट से जुड़ी दलीलों पर गंभीरता से विचार किया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सोशल मीडिया पर हास्य और व्यंग्य की निश्चित रूप से जगह है, लेकिन ऐसा कोई भी कंटेंट जो पहली नज़र में किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व और पब्लिसिटी अधिकारों का उल्लंघन करता हो, उसे अनुमति नहीं दी जा सकती।

सेलिब्रिटी अधिकारों की बढ़ती कानूनी मान्यता

गावस्कर का यह कदम भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हस्तियों के बीच व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है। जो अधिकार पहले एक सीमित कानूनी अवधारणा माने जाते थे, वे अब डिजिटल युग में तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं, क्योंकि सेलिब्रिटी अपनी पहचान पर नियंत्रण और उससे व्यावसायिक लाभ सुनिश्चित करना चाहते हैं।

भारत में इससे पहले अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन जैसे फिल्मी सितारों ने भी अपने पब्लिसिटी अधिकारों के संरक्षण के लिए अदालत का रुख किया है। हालिया फैसलों से सलमान खान, ऋतिक रोशन और आर. माधवन सहित अन्य मनोरंजन जगत की हस्तियों को भी लाभ मिला है, जिनके मामलों में अदालतों ने उनके व्यक्तित्व के बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में व्यक्तित्व अधिकार

वैश्विक स्तर पर खेल सितारे लंबे समय से अपने व्यक्तित्व अधिकारों के आर्थिक और कानूनी महत्व को पहचानते आए हैं। अमेरिका में “राइट टू पब्लिसिटी” एक व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त अधिकार है, जिसके तहत माइकल जॉर्डन और लेब्रोन जेम्स जैसे खिलाड़ी अपने नाम और छवि के इस्तेमाल पर सख्त कानूनी नियंत्रण रखते हैं। इसी तरह, क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेस्सी जैसे फुटबॉल सितारे ट्रेडमार्क पंजीकरण और लाइसेंसिंग समझौतों के माध्यम से अपने निजी ब्रांड की सुरक्षा करते हैं।

डिजिटल कंटेंट, सोशल मीडिया की तेज़ी से बढ़ती पहुँच और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में डीपफेक, बिना अनुमति मर्चेंडाइजिंग और पहचान के दुरुपयोग जैसी चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। ऐसे में अदालतों का यह रुख और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

भारतीय खिलाड़ियों के लिए नई मिसाल

न्यायिक संरक्षण की औपचारिक मांग करके सुनील गावस्कर ने भारतीय खिलाड़ियों—चाहे वे मौजूदा हों या सेवानिवृत्त—के लिए एक मजबूत मिसाल कायम की है। यह फैसला दर्शाता है कि खिलाड़ियों की पहचान और निजी ब्रांड तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य में कानूनी सम्मान, सुरक्षा और नियंत्रण के पूरी तरह हकदार हैं।

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