दिग्विजय सिंह की टिप्पणी से कांग्रेस में फिर उभरी अंदरूनी कलह, RSS-BJP पर बयान बना विवाद की जड़

Digvijay Singh's comments have reignited internal conflict within the Congress party; his statement on the RSS and BJP is at the root of the controversyचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की एक टिप्पणी ने एक बार फिर कांग्रेस के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है। उनके बयान को RSS और BJP के पक्ष में देखा जा रहा है, जिससे पार्टी में असहजता और वरिष्ठ नेतृत्व के बीच असंतोष के संकेत मिले हैं।

दिग्विजय सिंह ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि BJP-RSS अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को संगठन में ऊपर तक बढ़ने का मौका देते हैं और इसी प्रक्रिया से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष नेता निकलते हैं। उन्होंने इस पोस्ट के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें वह BJP के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के पास ज़मीन पर बैठे नजर आ रहे हैं। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

हालांकि, विवाद बढ़ने पर दिग्विजय सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि वह RSS-BJP के कट्टर विरोधी रहे हैं और रहेंगे, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। इस बयान के बाद उनके एक हफ्ते पुराने उस बयान को भी फिर से चर्चा में लाया गया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस में सुधार और सत्ता के विकेंद्रीकरण की ज़रूरत पर जोर दिया था और इस पोस्ट में उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को टैग किया था।

कांग्रेस ने संभाला मोर्चा, नेताओं की अलग-अलग राय

विवाद के बाद कांग्रेस ने ‘फायरफाइटिंग मोड’ में आते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी RSS की विचारधारा में विश्वास नहीं करती। हालांकि, पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर नेताओं की राय बंटी हुई नजर आई।

कांग्रेस की शीर्ष निर्णयकारी संस्था के सदस्य और मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने दिग्विजय सिंह की टिप्पणी से असहमति जताई। उन्होंने कहा, “मैं उनके बयान से सहमत नहीं हूं। गोडसे के समर्थक गांधी के समर्थक नहीं हो सकते।”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, जिन्होंने पहले RSS पर प्रतिबंध की मांग की थी, ने भी बिना नाम लिए पार्टी और RSS-BJP के बीच वैचारिक अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी धर्म की राजनीति नहीं करती।

खड़गे ने कहा, “हमारे पास भले ही सत्ता कम हो, लेकिन हमारी रीढ़ कमजोर नहीं है। हम धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगते। कुछ लोग धर्म को राजनीति में बदल चुके हैं। RSS ने कभी तिरंगे और वंदे मातरम् को स्वीकार करने से इनकार किया था और आज वही जनता के अधिकारों को कुचल रहे हैं।”

एकजुटता का दावा, लेकिन मतभेद साफ

राजस्थान के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने पार्टी में एकता पर जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और देश को एक मजबूत विपक्ष की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस में कोई मतभेद नहीं हैं। विचार व्यक्त करना सभी का अधिकार है। हमारा लक्ष्य खड़गे और राहुल गांधी को मजबूत करना है।”

वहीं, कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि कांग्रेस को RSS से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने तीखा बयान देते हुए कहा, “हमें गोडसे की संस्था से कुछ सीखने की ज़रूरत नहीं है, उन्हें हमसे सीखना चाहिए।”

इसके विपरीत, वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने दिग्विजय सिंह का बचाव करते हुए कहा कि वह पूरी तरह पार्टी नेतृत्व के साथ हैं।

उन्होंने कहा, “तथ्यों को स्वीकार करना और किसी की विचारधारा की प्रशंसा करना अलग-अलग बातें हैं। RSS की मूल विचारधारा भारत के विचार के खिलाफ है और हम सभी, दिग्विजय सिंह सहित, उसे खारिज करते हैं।”

कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने भी सिंह का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा और मीडिया ने उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है।

नेता अलका लांबा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को अपने विरोधी और खुद की ताकत का विश्लेषण करना चाहिए, लेकिन कांग्रेस RSS की विचारधारा से सहमत नहीं है। वहीं, कांग्रेस नेता राशिद ने कहा कि RSS एक मजबूत संगठन है और BJP को सत्ता में लाने में उसकी अहम भूमिका रहती है।

फिर सवालों के घेरे में कांग्रेस की एकता

दिग्विजय सिंह की टिप्पणी और उस पर पार्टी के भीतर आई अलग-अलग प्रतिक्रियाओं ने एक बार फिर कांग्रेस की आंतरिक एकता और वरिष्ठ नेताओं के बीच असंतोष के सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व वैचारिक स्पष्टता और एकजुटता का दावा कर रहा है, लेकिन यह विवाद कांग्रेस के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरा है।

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