‘बैटल ऑफ़ द सेक्सेस’ पर मचा घमासान: सबालेंका और किर्गियोस ने आलोचनाओं को किया खारिज
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: दुबई में आयोजित बहुचर्चित एग्ज़ीबिशन टेनिस मुकाबले ‘बैटल ऑफ़ द सेक्सेस’ को लेकर टेनिस जगत में तीखी बहस छिड़ गई है। इस मैच में पुरुष खिलाड़ी निक किर्गियोस ने महिला सिंगल्स की वर्ल्ड नंबर वन आर्यना सबालेंका को 6-3, 6-3 से हराया। मुकाबला रविवार, 28 दिसंबर को खास तौर पर बदले गए नियमों के साथ खेला गया।
मैच के बाद जहां एक ओर इसे मनोरंजन के रूप में सराहा गया, वहीं दूसरी ओर इसे एक गंभीर खेल प्रतियोगिता के तौर पर पेश किए जाने पर कड़ी आलोचना भी हुई। आलोचकों का कहना था कि बदले हुए नियम—जैसे सबालेंका के लिए नौ प्रतिशत छोटा कोर्ट और दोनों खिलाड़ियों को हर पॉइंट पर सिर्फ एक सर्व की अनुमति—इस मुकाबले की खेल विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं।
इन आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए निक किर्गियोस ने न सिर्फ मैच के कॉन्सेप्ट का बचाव किया, बल्कि सबालेंका के प्रदर्शन की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सबालेंका ने साबित कर दिया कि वह किसी भी बड़े खिलाड़ी के खिलाफ उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं।
किर्गियोस ने अपने करियर का जिक्र करते हुए कहा, “मैं उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से हूं जिन्होंने बिग फोर को हराया है। एंडी मरे, नोवाक जोकोविच, रोजर फेडरर और राफेल नडाल—सभी मुझसे हार चुके हैं। ऐसे खिलाड़ी के खिलाफ खेलकर सबालेंका ने दिखाया कि वह कितनी मजबूत प्रतिद्वंद्वी हैं।”
उन्होंने इवेंट को मिली जबरदस्त लोकप्रियता की ओर भी इशारा किया और कहा कि नकारात्मक टिप्पणियों के बावजूद लोगों की दिलचस्पी कम नहीं हुई। “जो लोग सबसे ज्यादा आलोचना कर रहे थे, उन्होंने भी यह मैच देखा। सोशल मीडिया और मीडिया कवरेज को देखें तो यह पिछले छह महीनों में टेनिस का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला इवेंट रहा है,” किर्गियोस ने कहा।
हालांकि, टेनिस कम्युनिटी का एक वर्ग इस आयोजन से सहमत नहीं दिखा। कई आलोचकों ने इसे महिलाओं के खेल को कमजोर दिखाने वाला बताया और इसकी तुलना 1973 के ऐतिहासिक ‘बैटल ऑफ़ द सेक्सेस’ से की, जिसमें बिली जीन किंग ने बॉबी रिग्स को हराया था। खुद बिली जीन किंग ने भी कहा कि दुबई का यह मुकाबला सामाजिक और खेल के लिहाज़ से उस ऐतिहासिक मैच जैसा महत्व नहीं रखता।
पूर्व वर्ल्ड नंबर वन डबल्स खिलाड़ी रेने स्टब्स सहित कई दिग्गजों ने इस इवेंट को महज़ पब्लिसिटी स्टंट और पैसे के लिए किया गया तमाशा बताया।
इसके बावजूद, किर्गियोस का मानना है कि अगर भविष्य में ऐसे मुकाबले दोबारा होते हैं तो वे एक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह दिशा भले विवादित हो, लेकिन खेल को नई ऑडियंस तक पहुंचाने की कोशिश जरूर है।
