अनिल कपूर की ‘नायक’ कर सकती है बड़े पर्दे पर वापसी, सीक्वल की तैयारी की चर्चा

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनिल कपूर की 2001 में रिलीज़ हुई पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म नायक एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब 25 साल बाद इस कल्ट क्लासिक फिल्म के सीक्वल की संभावनाओं ने ज़ोर पकड़ लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनिल कपूर ने कथित तौर पर फिल्म के राइट्स खरीद लिए हैं और वह नायक 2 बनाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
राइट्स खरीदने की खबर
बॉलीवुड हंगामा की एक रिपोर्ट के अनुसार, सनम तेरी कसम फेम प्रोड्यूसर दीपक मुकुट के पास नायक के राइट्स थे, जिन्हें अब अनिल कपूर ने उनसे खरीद लिया है। एक सूत्र के हवाले से बताया गया, “अनिल कपूर इस फिल्म को अपने पास रखना चाहते हैं क्योंकि नायक उनके दिल के बेहद करीब है। वह इस कहानी को आगे बढ़ाने और इसका सीक्वल बनाने के इच्छुक हैं।”
सूत्र ने यह भी कहा कि अभिनेता को सालों से फिल्म के लिए मिल रहे दर्शकों के प्यार का पूरा एहसास है और उनका मानना है कि नायक का विषय दूसरे पार्ट के लिए काफी मजबूत और प्रासंगिक है। हालांकि, नायक 2 को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
कल्ट क्लासिक बनी नायक
ए.एस. रत्नम द्वारा प्रोड्यूस और शंकर द्वारा निर्देशित नायक, 1999 की तमिल फिल्म मुधलवन का हिंदी रीमेक थी। फिल्म में अनिल कपूर ने एक निडर पत्रकार का किरदार निभाया था, जो एक दिन के लिए महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनता है और सिस्टम में बड़े बदलाव लाने की कोशिश करता है।
रिलीज़ के समय फिल्म को मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला था, लेकिन समय के साथ इसने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली और यह एक कल्ट फिल्म बन गई।
स्टारकास्ट और दमदार परफॉर्मेंस
फिल्म में अनिल कपूर के साथ रानी मुखर्जी लीड रोल में थीं। वहीं अमरीश पुरी, परेश रावल, सौरभ शुक्ला, जॉनी लीवर, शिवाजी साटम और नीना कुलकर्णी जैसे कलाकारों ने यादगार अभिनय किया। पूजा बत्रा कैमियो में नज़र आईं, जबकि सुष्मिता सेन एक स्पेशल सॉन्ग में दिखाई दी थीं।
फिल्म का मुख्य विषय—एक आम आदमी का भ्रष्टाचार और सिस्टम की नाकामियों को चुनौती देना—आज भी उतना ही प्रासंगिक माना जाता है। माना जा रहा है कि यही वजह है कि अनिल कपूर इस कहानी को आज के राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ में फिर से पेश करना चाहते हैं।
हालांकि नायक 2 का आइडिया अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन अगर यह फिल्म बनती है तो इसमें सिर्फ़ नॉस्टैल्जिया ही नहीं, बल्कि मौजूदा दौर की राजनीतिक सच्चाइयों की झलक भी देखने को मिल सकती है।
