तेलंगाना: 75 लाख का इनामी बटालियन कमांडर समेत 20 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: तेलंगाना में सीपीआई (माओवादी) को एक बड़ा झटका लगा है। पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के बटालियन कमांडर बदसे सुक्का उर्फ देवा, जिस पर 75 लाख रुपये का इनाम घोषित था, ने शनिवार को 19 अन्य माओवादियों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह जानकारी तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) सिवाधर रेड्डी ने दी।
डीजीपी ने कहा कि यह आत्मसमर्पण तेलंगाना में सीपीआई (माओवादी) के आखिरी मजबूत गढ़ के पतन का संकेत है। उन्होंने बताया कि संगठन की तेलंगाना स्टेट कमेटी भी लगभग बिखर चुकी है और अब केवल एक स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) ही शेष है।
इसी क्रम में कंकनाला राजी रेड्डी उर्फ वेंकटेश, जो स्टेट कमेटी के सदस्य थे, ने भी आत्मसमर्पण किया। इससे PLGA और सीपीआई (माओवादी) की राज्य स्तरीय नेतृत्व संरचना को निर्णायक झटका लगा है।
डीजीपी ने कहा, “यह आत्मसमर्पण PLGA बटालियन और सीपीआई (माओवादी) की तेलंगाना स्टेट कमेटी के अंत का संकेत है।”
हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद
आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने वरिष्ठ नेताओं हिडमा और बदसे देवा से जुड़े हथियारों के ठिकानों की जानकारी भी दी। कुल 48 हथियार पुलिस को सौंपे गए, जिनमें शामिल हैं:
- 2 लाइट मशीन गन (LMG)
- 1 अमेरिकी निर्मित कोल्ट राइफल
- 1 इज़रायल निर्मित तावोर राइफल
- 8 AK-47 राइफलें
- 10 INSAS राइफलें
- 8 सेल्फ-लोडिंग राइफल (SLR)
- 4 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL)
- 11 सिंगल-शॉट हथियार
- 2 ग्रेनेड, 1 एयर गन
- और 2,206 राउंड विभिन्न कैलिबर की गोलियां
बदसे सुक्का: हिडमा के बाद सबसे प्रभावशाली नेता
बदसे सुक्का को सीपीआई (माओवादी) के भीतर एक प्रमुख आदिवासी नेता माना जाता था और वह दिवंगत मदावी हिडमा के बाद संगठन का दूसरा सबसे प्रभावशाली चेहरा था। उसने वर्ष 2003 में सीपीआई (एमएल) पीपुल्स वॉर ग्रुप जॉइन किया था।
सुरक्षा बलों के अनुसार, सुक्का को सैन्य रणनीति, विस्फोटकों की व्यवस्था, हथियार निर्माण और IED लगाने का विशेष प्रशिक्षण मिला था, जिसके चलते वह तेजी से संगठन में ऊपर पहुंचा।
नवंबर 2023 में हिडमा के PLGA बटालियन से हटने के बाद, सुक्का को उनका उत्तराधिकारी बनाते हुए बटालियन कमांडर नियुक्त किया गया था। पुलिस के मुताबिक, वह कई बड़े माओवादी हमलों में शामिल रहा, जिनमें झीरम घाटी हमला भी शामिल है, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल, नंद कुमार पटेल समेत कई नेताओं की जान गई थी।
कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में संभाली थी जिम्मेदारी
वर्ष 2024 में दक्षिण बस्तर में सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज होने के बाद, हिडमा, देवोजी और चंद्रन्ना दामोदर जैसे वरिष्ठ माओवादी नेताओं ने अपने ठिकाने बदलकर कर्रेगुट्टा पहाड़ियों (KGH) में शिफ्ट कर लिए थे।
डीजीपी के अनुसार, सुक्का को वहां सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स का प्रभारी बनाया गया था, जहां उसने बड़े सुरक्षा अभियानों के दौरान नुकसान से बचने के लिए PLGA की संरचना को पुनर्गठित किया।
पुलिस का मानना है कि इस बड़े आत्मसमर्पण से तेलंगाना में माओवादी गतिविधियों पर निर्णायक अंकुश लगेगा और राज्य में शांति व सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।
