तेलंगाना विधानसभा में के. कविता ने किया चौधरी अजित सिंह को याद, राज्य निर्माण में उनके योगदान को बताया ऐतिहासिक
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: तेलंगाना आंदोलन के दौरान कई ऐसे नेता सामने आए जिन्होंने व्यक्तिगत स्वार्थ की परवाह किए बिना आंदोलन का समर्थन किया। इन्हीं में चौधरी अजित सिंह का नाम सबसे ऊपर आता है। उनके सिद्धांतों और असली इरादों की बुलंद आवाज़ ने उन्हें आंदोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका दिलाई। इस बात को तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री KCR की बेटी, कविता, भी स्वीकारती हैं। कविता का कहना है कि, “चौधरी अजित सिंह जी ने तेलंगाना राज्य के निर्माण के लिए अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया था, लेकिन दुर्भाग्यवश राज्य बनने के बाद उन्हें वह सम्मान और आदर नहीं मिला, जिसके वे वास्तव में हक़दार थे।”
पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी कविता द्वारा ये कहना अपने-आप में बहुत कुछ कह जाता है। कविता ने भावुक होकर यह स्वीकार किया कि जिन नेताओं ने तेलंगाना के लिए अपने पद और सत्ता तक दांव पर लगा दिए, उन्हें बाद में भुला दिया गया।
चौधरी अजित सिंह ऐसे ही विरले नेताओं में से थे- जो उसूलों के लिए सत्ता से टकरा जाना जानते थे, जो सच के साथ खड़े रहने के लिए सत्ता को ठोकर मारने कि हिम्मत रखते थे, और जिनके लिए राजनीति से पहले सिद्धांत और न्याय थे।
तेलंगाना के समर्थन में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया…कविता का यह कहना कि “आज भावनाओं पर नियंत्रण नहीं है”, दरअसल उन सभी नेताओं की पीड़ा की अभिव्यक्ति है, जिन्होंने बिना किसी अपेक्षा के संघर्ष का साथ दिया। चौधरी अजित सिंह का जीवन इस बात का प्रमाण है कि महानता सत्ता से नहीं, त्याग से मापी जाती है। आज जब राजनीति में अवसरवाद हावी है, तब चौधरी अजित सिंह जैसे नेता याद दिलाते हैं कि:- सत्ता के बिना भी बड़ा हुआ जा सकता है, लेकिन उसूलों के बिना कभी नहीं।
