महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव: नतीजों के बाद अजित पवार ने मानी हार, ‘जनादेश का पूरा सम्मान’

Maharashtra municipal elections: After the results, Ajit Pawar conceded defeat, 'respects the people's mandate'चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में 29 नगर निगम चुनावों के लगभग साफ नतीजों के बाद उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख अजित पवार ने शहरी क्षेत्रों में पार्टी की हार को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि वे जनता के फैसले को “पूरे सम्मान” के साथ स्वीकार करते हैं।

अजित पवार ने लिखा, “जनता का जनादेश सर्वोपरि है। हम उसे पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं। सभी विजयी उम्मीदवारों को हार्दिक बधाई और उनके कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं।”

पार्टी के अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “इन स्थानीय निकाय चुनावों में हमें जैसी सफलता अपेक्षित थी, वैसी नहीं मिली। मैं भरोसा दिलाता हूं कि हम और अधिक जिम्मेदारी, ईमानदारी और दोगुने उत्साह के साथ जनता का विश्वास दोबारा जीतने का प्रयास करेंगे।” उन्होंने जीतने वाले प्रतिनिधियों से जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देने और विकास कार्यों में तेजी लाने की अपील की, वहीं हारने वाले उम्मीदवारों से जनसेवा के प्रति समर्पित बने रहने का आग्रह किया।

पश्चिम महाराष्ट्र में बड़ा झटका

चुनावी नतीजों को अजित पवार की व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ के लिए पश्चिम महाराष्ट्र में बड़ा झटका माना जा रहा है। अपनी “मूल” एनसीपी की ताकत दिखाने के लिए उन्होंने बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से अलग होकर अपने पारंपरिक गढ़ों में चुनाव लड़ा, लेकिन पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ (PCMC) जैसे अहम नगर निगमों में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा।

कभी पवार परिवार का अभेद्य किला माने जाने वाले इन दोनों नगर निगमों में बीजेपी ने बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की, जबकि अजित पवार गुट तीसरे या चौथे स्थान पर सिमट गया।

मुंबई और छत्रपति संभाजीनगर में भी एनसीपी कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सकी। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में पार्टी दहाई अंक तक पहुंचने में भी संघर्ष करती नजर आई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के खिलाफ की गई तथाकथित “फ्रेंडली फाइट” की रणनीति अजित पवार पर भारी पड़ी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन नतीजों से संकेत मिलता है कि “पवार विरासत” का वोट अजित पवार और उनके चाचा शरद पवार के गुटों में बंट गया, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को हुआ। 2026 के नगर निकाय चुनावों में मिली यह हार अब 2029 के विधानसभा चुनावों से पहले महा युति गठबंधन के भीतर बदलते सत्ता समीकरणों का अहम संकेत मानी जा रही है।

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