बेंगलुरु: कर्नाटक के डीजीपी के. रामचंद्र राव सस्पेंड, सोशल मीडिया पर वायरल कथित वीडियो के बाद कार्रवाई
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: कर्नाटक सरकार ने डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डायरेक्टरेट ऑफ सिविल राइट्स एनफोर्समेंट) के. रामचंद्र राव को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित वीडियो और ऑडियो क्लिप्स के बाद की गई है, जिनमें राव को महिलाओं के साथ आपत्तिजनक हालत में दिखाए जाने का दावा किया गया है।
सरकारी सस्पेंशन आदेश में कहा गया है कि राव का कथित आचरण एक सरकारी कर्मचारी के लिए अनुचित है और इससे सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रथम दृष्टया उनका व्यवहार सेवा नियमों का उल्लंघन प्रतीत होता है। जांच पूरी होने तक उन्हें निलंबित रखा जाएगा।
आदेश के मुताबिक, सस्पेंशन की अवधि के दौरान के. रामचंद्र राव राज्य सरकार की लिखित अनुमति के बिना किसी भी स्थिति में अपना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
आरोपों से इनकार
के. रामचंद्र राव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें “मनगढ़ंत और झूठा” बताया है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी हैं और उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। सोमवार को वीडियो सामने आने के बाद वह कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर से मिलने उनके आवास पहुंचे, हालांकि मुलाकात नहीं हो सकी।
मीडिया से बातचीत में राव ने कहा, “मैं हैरान हूं। यह सब झूठा और मनगढ़ंत है। इस दौर में कुछ भी बनाया जा सकता है।” जब उनसे पूछा गया कि क्या ये वीडियो पुराने हो सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि यदि पुराने हैं तो संभवतः आठ साल पहले के होंगे, जब वे बेलगावी में तैनात थे।
सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि यदि अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, चाहे अधिकारी कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो।”
वहीं, वरिष्ठ भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री एस. सुरेश कुमार ने इस मामले को “शर्मनाक” और “माफ़ न करने लायक” बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना से पूरे पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई है।
पहले भी विवादों में रहे हैं राव
के. रामचंद्र राव पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने अपनी सौतेली बेटी और अभिनेत्री रान्या राव को सोना तस्करी मामले में कस्टम और पुलिस जांच से बचाने में मदद की थी। इस आरोप के बाद उन्हें मार्च में कर्नाटक राज्य पुलिस हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन एवं एमडी पद से जबरन छुट्टी पर भेजा गया था। बाद में जांच के बाद उन्हें बहाल कर दिया गया।
अगस्त में उन्हें डायरेक्टरेट ऑफ सिविल राइट्स एनफोर्समेंट का डीजीपी नियुक्त किया गया था। फिलहाल, वायरल क्लिप्स के मामले में जांच जारी है और सरकार ने निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
