ईरान की कड़ी चेतावनी: खामेनेई के खिलाफ किसी भी कदम पर ‘दुनिया जला देंगे’; ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव
चिरौरी न्यूज
दुबई/संयुक्त अरब अमीरात। ईरान ने मंगलवार को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई की गई, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब ट्रंप ने हाल ही में खामेनेई के लगभग 40 साल लंबे शासन को खत्म करने की बात कही थी।
ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता जनरल अबोलफज़्ल शेखरची ने कहा, “ट्रंप यह अच्छी तरह जानते हैं कि अगर हमारे नेता की ओर आक्रामक हाथ बढ़ाया गया, तो हम न केवल उस हाथ को काट देंगे, बल्कि उनकी पूरी दुनिया को आग में झोंक देंगे।”
ट्रंप के बयान से भड़का विवाद
यह प्रतिक्रिया ट्रंप के उस इंटरव्यू के बाद आई है, जो उन्होंने शनिवार को पॉलिटिको को दिया था। ट्रंप ने खामेनेई को “एक बीमार व्यक्ति” बताते हुए कहा था कि उन्हें “अपने देश को सही तरीके से चलाना चाहिए और लोगों को मारना बंद करना चाहिए।” ट्रंप ने यह भी जोड़ा था कि “ईरान में अब नए नेतृत्व की तलाश का वक्त आ गया है।”
प्रदर्शनों के बाद से बढ़ा अमेरिका–ईरान तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव 28 दिसंबर से और गहरा गया है, जब ईरान की खराब आर्थिक स्थिति के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों पर सरकार ने सख्त कार्रवाई की। ट्रंप ने ईरान के लिए दो ‘रेड लाइन’ तय की हैं—शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या और प्रदर्शनों के बाद बड़े पैमाने पर फांसी देना।
मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ता अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा
इस बीच, अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन दक्षिण चीन सागर से निकलकर मलक्का जलडमरूमध्य पार कर चुका है। जहाजों की ट्रैकिंग से पता चला है कि यह पोत और इसके साथ मौजूद तीन विध्वंसक पश्चिम की ओर बढ़ रहे हैं।
अमेरिकी नौसेना के एक अधिकारी ने, नाम न छापने की शर्त पर, बताया कि यह स्ट्राइक ग्रुप पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि अधिकारियों ने यह साफ तौर पर नहीं कहा कि यह बेड़ा मिडिल ईस्ट जा रहा है, लेकिन हिंद महासागर में इसकी मौजूदा स्थिति से संकेत मिलते हैं कि यह कुछ ही दिनों में क्षेत्र में पहुंच सकता है।
यह पहली बार नहीं है जब प्रशांत क्षेत्र में तैनात कोई अमेरिकी विमानवाहक पोत अचानक मध्य पूर्व भेजा गया हो। इससे पहले 2024 में यूएसएस अब्राहम लिंकन को मिडिल ईस्ट की ओर मोड़ा गया था, जबकि पिछले साल जून में यूएसएस निमिट्ज़ स्ट्राइक ग्रुप को भी इसी क्षेत्र में तैनात किया गया था।
प्रदर्शनों में हजारों की मौत का दावा
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, ईरान में प्रदर्शनों के दौरान अब तक कम से कम 4,519 लोगों की मौत हो चुकी है। एजेंसी का कहना है कि उसके पास देश के अंदर मौजूद कार्यकर्ताओं का एक नेटवर्क है, जो हर मौत की पुष्टि करता है। हालांकि, एसोसिएटेड प्रेस इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है।
यह संख्या हाल के दशकों में ईरान में हुए किसी भी विरोध प्रदर्शन से कहीं अधिक है और 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान फैली अराजकता की याद दिलाती है। भले ही बीते कुछ दिनों से प्रदर्शन शांत हैं, लेकिन 8 जनवरी से लागू इंटरनेट शटडाउन के चलते आशंका जताई जा रही है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है।
खामेनेई का बयान और अमेरिका पर आरोप
शनिवार को आयतुल्ला खामेनेई ने कहा था कि प्रदर्शनों में “कई हजार” लोग मारे गए हैं और इसके लिए उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। यह पहला मौका था जब किसी ईरानी शीर्ष नेता ने हताहतों की संख्या का संकेत दिया।
हजारों गिरफ्तार, फांसी की आशंका
ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, अब तक 26,300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अधिकारियों के बयानों से यह आशंका भी जताई जा रही है कि हिरासत में लिए गए कुछ लोगों को मौत की सजा दी जा सकती है। गौरतलब है कि ईरान दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी देने वाले देशों में शामिल है।
ईरान के राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख जनरल अहमद रज़ा रदान ने कहा है कि जो लोग खुद को अधिकारियों के सामने पेश करेंगे, उनके साथ नरमी बरती जाएगी।
राज्य टीवी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “जो लोग विदेशी खुफिया एजेंसियों के झांसे में आ गए और व्यवहार में उनके सैनिक बन गए, उन्हें आत्मसमर्पण का मौका दिया जा रहा है। अगर वे खुद सामने आते हैं, तो सज़ा में निश्चित रूप से कमी की जाएगी। उनके पास तीन दिन का समय है।”
इन घटनाक्रमों के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्ते एक बार फिर बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंचते नजर आ रहे हैं।
