राहुल गांधी के ‘नहीं पता जी-राम-जी क्या है’ कहने के बाद बीजेपी ने उन्हें ‘हिंदू विरोधी’ कहा

After Rahul Gandhi said, "I don't know what Ram-ji is," the BJP called him "anti-Hindu."
(Screenshot/Twitter/Video)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भाजपा की नई बड़ी योजना G-RAM-G (ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के खिलाफ विपक्ष को एकजुट होने और इसका विरोध करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यह नया कानून 20 साल पुरानी कांग्रेस-कालीन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) की जगह ले रहा है।

राहुल गांधी ने कहा, “मैं नहीं जानता कि G-RAM-G क्या है!” और MNREGA की उपलब्धियों पर जोर देते हुए कहा, “MNREGA ने हर गरीब व्यक्ति को रोजगार का अधिकार दिया, जिसे मोदी जी समाप्त करना चाहते हैं।” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि यह कानून महात्मा गांधी के नाम को सार्वजनिक स्मृति से हटाने का प्रयास है।

भाजपा का तीखा हमला

राहुल गांधी और खड़गे के बयान पर भाजपा ने तीखा हमला किया। उन्हें ‘भगवान राम के खिलाफ’ करार दिया गया और कहा गया कि कांग्रेस की मानसिकता ‘अधार्मिक’ है। भाजपा का यह आरोप उस कारण से भी जुड़ा कि नया कानून महात्मा गांधी के बजाय भगवान राम के नाम पर रखा गया है।

राहुल गांधी ने किसानों का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे 2020 में किसानों ने केंद्र सरकार को ‘काले कृषि कानून’ वापस लेने के लिए मजबूर किया था। उन्होंने कहा, “यदि हम एकजुट हुए, तो मोदी जी MNREGA को फिर से शुरू करने पर मजबूर होंगे।”

विपक्ष अब इस मामले में संसद में जोर देकर चर्चा करेगा। कर्नाटक और तमिलनाडु जैसी राज्य सरकारों ने भी MNREGA के समर्थन में प्रस्ताव पारित करने का संकेत दिया है। कर्नाटक विधानसभा में आज हंगामा हुआ, जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सरकार द्वारा तैयार की गई ऐसी भाषण की रीडिंग से इंकार कर दिया, जिसमें G-RAM-G योजना की आलोचना की गई थी। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कहा कि उनकी सरकार भी इस तरह का प्रस्ताव पारित करेगी।

G-RAM-G योजना की मुख्य बातें:

गारंटीड कार्यदिवस: योजना में न्यूनतम कार्यदिवस बढ़ाकर 125 किए गए हैं, जो MNREGA में 100 थे। हालांकि, यह केवल उन क्षेत्रों में लागू होगा जिन्हें केंद्र सरकार ‘ग्रामीण’ घोषित करती है।

वित्तीय ढांचा: MNREGA के तहत केंद्र सरकार कुल खर्च का लगभग 90% भुगतान करती थी। G-RAM-G में राज्यों को अब 40% का योगदान देना होगा (पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों को केवल 10%), जबकि केंद्र शासित प्रदेशों को 100% वित्तीय मदद मिलेगी।

केंद्र का नियंत्रण: अब केंद्र सरकार प्रत्येक वर्ष राज्यों को मिलने वाले फंड का निर्धारण “वस्तुनिष्ठ मानकों” के आधार पर करेगी, बजाय पूर्व की मांग आधारित प्रणाली के।

इस कानून को लेकर विपक्ष में नाराजगी बढ़ रही है और राहुल गांधी तथा खड़गे जैसे नेता इसे महात्मा गांधी के नाम का अपमान और गरीबों के अधिकारों पर हमला मान रहे हैं।

इस तरह, G-RAM-G को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है, और विपक्ष इसे रोकने के लिए हर स्तर पर दबाव बनाने का इरादा रखता है।

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