राष्ट्रीय बालिका दिवस पर अमित शाह का संदेश: ‘लड़कियां जिम्मेदारी नहीं, राष्ट्र निर्माण की शक्ति हैं’

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि बेटियां केवल समाज की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक मजबूत और अमूल्य शक्ति हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज भारत की प्रगति की अगुवाई महिलाएं कर रही हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए अमित शाह ने कहा, “‘राष्ट्रीय बालिका दिवस’ की सभी को शुभकामनाएं। यह दिन इस बात का प्रतीक है कि बेटियां सिर्फ हमारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी ताकत हैं। रानी लक्ष्मीबाई, रानी वेलु नचियार, मुला गभाडु और प्रीतिलता वद्देदार जैसे गौरवशाली उदाहरण हर भारतीय को गर्व और प्रेरणा से भर देते हैं।”
महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए गृह मंत्री ने आगे कहा,
“मोदी सरकार का ‘महिला-नेतृत्व वाला विकास’ का मंत्र नारी शक्ति को विकास के केंद्र में लेकर आया है और आज महिलाएं देश की प्रगति का नेतृत्व कर रही हैं।”
24 जनवरी को मनाया जाता है राष्ट्रीय बालिका दिवस
भारत में हर वर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य बालिकाओं के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के प्रति जागरूकता फैलाना है।
यह दिन समाज में लड़कियों के प्रति समान अवसर सुनिश्चित करने, लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बनाने का संदेश देता है। साथ ही, यह बालिकाओं के सामने आने वाली असमानताओं की ओर ध्यान आकर्षित करता है और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर देता है।
लैंगिक भेदभाव के खिलाफ सरकार की पहल
राष्ट्रीय बालिका दिवस का एक अहम उद्देश्य सामाजिक सोच में बदलाव लाना है, खासकर कन्या भ्रूण हत्या, गिरता लिंगानुपात और भेदभाव जैसी गंभीर समस्याओं को खत्म करना। इसके लिए सरकार ने कई योजनाएं और कानून लागू किए हैं।
प्रमुख योजनाओं में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ और माध्यमिक शिक्षा के लिए बालिकाओं को प्रोत्साहन की राष्ट्रीय योजना शामिल हैं, जो बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने पर केंद्रित हैं।
इसके अलावा, बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006, पॉक्सो अधिनियम, 2012, और किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 जैसे कानूनों के जरिए बालिकाओं की सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत किया गया है।
मिशन वात्सल्य और अन्य सहयोगी योजनाएं
सरकार द्वारा संचालित मिशन वात्सल्य के तहत चाइल्ड हेल्पलाइन और ट्रैक चाइल्ड पोर्टल जैसी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जो लापता बच्चों की पहचान और पुनर्वास में मदद करती हैं। वहीं, पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना कोविड-19 महामारी में अनाथ हुए बच्चों को सहायता प्रदान करती है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस समाज को यह याद दिलाता है कि जब बेटियों को समान अवसर, सुरक्षा और सम्मान मिलता है, तब देश की प्रगति और अधिक मजबूत होती है। सरकार लगातार नीतियों, योजनाओं और जागरूकता अभियानों के माध्यम से बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयासरत है।
