यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने दिखाया OCI कार्ड, “मैं भी एक ओवरसीज़ इंडियन हूँ”
चिरौरी न्यूज
भारत-यूरोपियन यूनियन के बीच वर्षों से लंबित ऐतिहासिक ट्रेड डील की घोषणा के दौरान एक हल्का-फुल्का लेकिन भावुक क्षण देखने को मिला, जब यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने अचानक अपनी OCI (ओवरसीज़ सिटिजन ऑफ इंडिया) कार्ड जेब से निकालकर भारत से अपने निजी रिश्ते के बारे में बात की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपियन यूनियन की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मौजूदगी में कोस्टा के इस बयान पर माहौल भावुक हो गया और प्रधानमंत्री मोदी भी मुस्कुराते नजर आए।
संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कोस्टा ने कहा, “मैं यूरोपियन काउंसिल का राष्ट्रपति हूं, लेकिन मैं एक ओवरसीज़ इंडियन भी हूं।” यह कहते हुए उन्होंने अपना OCI कार्ड दिखाया।
गोवा से जुड़ी हैं एंटोनियो कोस्टा की जड़ें
एंटोनियो कोस्टा के पिता का जन्म और पालन-पोषण गोवा में हुआ था, जो कभी पुर्तगाल का उपनिवेश रहा है। गोवा की मुक्ति के बाद, उनके पिता 18 साल की उम्र में पुर्तगाल चले गए थे। कोस्टा ने बताया कि बचपन में उन्हें कोंकणी में प्यार से ‘बाबुश’ कहा जाता था।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह पल बेहद खास है। मुझे अपने गोवा से जुड़े होने पर गर्व है। मेरे पिता का परिवार वहीं से आता है और यूरोप-भारत का रिश्ता मेरे लिए व्यक्तिगत भी है।”
पिता थे प्रसिद्ध लेखक
एंटोनियो कोस्टा के पिता ऑरलैंडो कोस्टा एक प्रसिद्ध कवि और उपन्यासकार थे। उनकी रचनाओं में गोवा की संस्कृति और साहित्य की गहरी छाप देखने को मिलती है, साथ ही उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर पर भी लिखा।
कोस्टा ने 2017 में भारत दौरे के दौरान कहा था, “मेरे पिता लिस्बन चले गए थे, लेकिन गोवा कभी उन्हें छोड़कर नहीं गया। गोवा हमेशा उनकी रचनाओं में मौजूद रहा।”
आज भी मौजूद है 200 साल पुराना पुश्तैनी घर
कोस्टा के दादा का जन्म गोवा के मरगाओ में हुआ था और वहीं उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा बिताया। मरगाओ के अबादे फारिया रोड पर स्थित उनका पुश्तैनी घर आज भी मौजूद है, जो करीब 200 साल पुराना है। उनके विस्तारित परिवार के सदस्य आज भी वहीं रहते हैं।
2017 में पुर्तगाल के प्रधानमंत्री रहते हुए, कोस्टा ने उस घर का दौरा किया था और अपने परिजनों से मुलाकात भी की थी।
64 वर्षीय एंटोनियो कोस्टा को उनके शांत स्वभाव और संवाद-कुशल राजनीति के चलते अक्सर “लिस्बन का गांधी” कहा जाता है।
हालांकि आज वह ब्रसेल्स से यूरोपियन काउंसिल का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन मंगलवार को दिए गए उनके भाषण ने साफ कर दिया कि गोवा का एक हिस्सा आज भी उनके दिल में बसा हुआ है।
