भारत-अमेरिका ट्रेड डील फाइनल जल्द, दोनों देश सकारात्मक नतीजे के बेहद करीब: सूत्र
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार समझौता वार्ताओं पर “बहुत महत्वपूर्ण प्रगति” हुई है और दोनों देश अब सकारात्मक नतीजे के बेहद करीब हैं। सरकारी सूत्रों ने चिरौरी न्यूज़ को यह जानकारी दी। सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिए जाने के दौरान भी अमेरिका के साथ बातचीत का ट्रैक लगातार जारी रहा।
सरकारी सूत्रों ने इस धारणा को सिरे से खारिज किया कि भारत-ईयू समझौता, वॉशिंगटन के साथ सौदेबाज़ी की रणनीति का हिस्सा था। सूत्रों के मुताबिक, “अंतिम दिन की सीमित भारत-ईयू बैठकों में अमेरिका का एक बार भी ज़िक्र नहीं हुआ।”
उनका कहना था कि यह समझौता अपने स्वतंत्र आधार और तय समयसीमा पर आगे बढ़ाया गया, न कि किसी अन्य देश के साथ चल रही वार्ताओं की प्रतिक्रिया में।
साथ ही, सरकार ने संकेत दिया कि अमेरिका को लेकर भी वह पूरी तरह “फोकस बनाए हुए” है। सूत्रों ने अमेरिकी बाज़ार को “कम से कम उतना ही महत्वपूर्ण, अगर उससे भी अधिक” बताया। उन्होंने कहा कि भारत-ईयू वार्ता के निर्णायक चरण के दौरान भी भारतीय और अमेरिकी व्यापार वार्ताकार लगातार संपर्क में थे।
एक सूत्र ने कहा, “हमारे ट्रेड नेगोशिएटर्स अपने अमेरिकी समकक्षों के संपर्क में थे। बातचीत जारी है और हमें सकारात्मक नतीजे की पूरी उम्मीद है।”
सूत्रों ने भारत की व्यापार नीति को तेजी से खंडित हो रहे वैश्विक व्यापार तंत्र की प्रतिक्रिया के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि MFN-आधारित WTO व्यवस्था दबाव में है और ऐसे में देश बड़े साझेदारों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समझौतों को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत की रणनीति भी किसी एक समझौते को दूसरे का विकल्प मानने के बजाय, बड़े बाज़ारों तक पहुंच और निवेशकों के लिए स्थिरता सुनिश्चित करने की है।
सरकारी सूत्रों ने ज़ोर देकर कहा कि भारत, ईयू और अमेरिका को निर्यात को प्रतिस्पर्धी लक्ष्य नहीं मानता। “हमारी प्राथमिकता है कि निर्यात दोनों जगह बढ़े, क्योंकि इससे देश में रोज़गार और निवेश को बढ़ावा मिलता है,” सूत्रों ने कहा।
सूत्रों ने ईयू को दुनिया का सबसे बड़ा आयात बाज़ार बताते हुए कहा कि भारत-ईयू समझौता इस बात का उदाहरण है कि भारत बड़े बाज़ारों के साथ किस तरह के समझौते चाहता है—जहां संभव हो वहां शुरुआती टैरिफ लाभ, नॉन-टैरिफ बाधाओं से निपटने के तंत्र, और ऐसा ढांचा जिसे भविष्य में समीक्षा और विस्तार किया जा सके।
हालांकि भारत-अमेरिका समझौते के ढांचे का विस्तार से खुलासा नहीं किया गया, लेकिन सूत्रों ने बातचीत को “मजबूत और निरंतर” बताया। उनके अनुसार, अब बचे मुद्दे सीमित हैं, जिससे निकट भविष्य में समझौते की संभावना बनती है। सरकार का साफ संदेश है—सीक्वेंसिंग, न कि सब्स्टीट्यूशन। भारत एक साथ कई द्विपक्षीय वार्ताएं आगे बढ़ाता रहेगा।
सरकार का यह सार्वजनिक संकेत उद्योग जगत के लिए भी है। यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि भारत-ईयू समझौता कोई भू-राजनीतिक दिखावा नहीं है और अमेरिका के साथ बातचीत भी अंतिम दौर में है। यानी भारत की व्यापार नीति का फोकस व्यावसायिक नतीजों—मार्केट एक्सेस, स्थिर नियम और सप्लाई-चेन एकीकरण पर है, न कि कूटनीतिक संदेशबाज़ी पर।
