ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026: अल्काराज-ज्वेरेव सेमीफाइनल में मेडिकल टाइम-आउट पर विवाद, नियमों पर उठे सवाल

Australian Open 2026: Controversy erupts over medical time-out in Alcaraz-Zverev semi-final, raising questions about the rules
(Pic credit: Twitter)

चिरौरी न्यूज

णाई दिल्ली:  ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 का सेमीफाइनल मुकाबला कार्लोस अल्काराज और अलेक्जेंडर ज्वेरेव के बीच एक ऐतिहासिक संघर्ष के रूप में दर्ज हो गया, लेकिन इस पांच घंटे 27 मिनट लंबे महामुकाबले के साथ विवाद भी जुड़ गया। यह मुकाबला ऑस्ट्रेलियन ओपन के इतिहास का तीसरा सबसे लंबा मैच रहा, जिसमें अल्काराज ने अपनी “बीस्ट मेंटैलिटी” दिखाते हुए ज्वेरेव को हराकर फाइनल में प्रवेश किया।

हालांकि, मैच का सबसे चर्चित पल तीसरे सेट के नौवें गेम में आया, जब अल्काराज ने मेडिकल टाइम-आउट लिया। इसी दौरान ज्वेरेव का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने चेयर अंपायर व कोर्ट पर मौजूद अधिकारियों पर तीखा हमला बोला। माइक पर ज्वेरेव को यह कहते सुना गया, “यह अविश्वसनीय है। यह बकवास है। आप हमेशा इन लोगों को बचाते रहते हैं।”

दरअसल, एटीपी और अन्य टेनिस संस्थाओं के नियमों के अनुसार मेडिकल टाइम-आउट केवल इलाज योग्य चोट या अचानक बीमारी के लिए ही लिया जा सकता है। थकान, डिहाइड्रेशन या खेल के कारण होने वाली मांसपेशियों की ऐंठन (क्रैम्प) को गैर-इलाज योग्य माना जाता है। ऐसे मामलों में मेडिकल स्टाफ केवल जांच कर सकता है, लेकिन इलाज की अनुमति नहीं होती। यह फैसला पूरी तरह टूर्नामेंट के मेडिकल विशेषज्ञों का होता है, न कि चेयर अंपायर का।

इसी वजह से ज्वेरेव ने अल्काराज का इलाज कर रहे अधिकारियों पर आपत्ति जताई, हालांकि चेयर अंपायर पर गुस्सा निकालना कई लोगों को गैर-जरूरी लगा। दिलचस्प बात यह रही कि इस विवाद के बाद भी ज्वेरेव ने न सिर्फ तीसरा सेट, बल्कि चौथा सेट भी टाईब्रेक में जीत लिया।

पूर्व तीन बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन एंडी मरे ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नियमों में एक “ग्रे एरिया” है। टीवी विश्लेषक के रूप में बोलते हुए मरे ने कहा, “क्रैम्प और चोट के बीच फर्क कई बार बहुत धुंधला हो जाता है। यहां इसे जांघ की चोट के तौर पर ट्रीट किया जा रहा था।”

मैच के बाद दोनों खिलाड़ियों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। ज्वेरेव ने कहा, “वह क्रैम्प कर रहा था और आमतौर पर क्रैम्प के लिए मेडिकल टाइम-आउट नहीं लिया जा सकता। यह मेरा फैसला नहीं है। मुझे यह पसंद नहीं आया, इसलिए मैंने इसे बकवास कहा।”

वहीं अल्काराज ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं था कि यह क्रैम्प है या दाहिने पैर की एडडक्टर मांसपेशी में चोट। “मुझे सिर्फ एक मसल में कुछ महसूस हुआ। मैंने फिजियो को बताया और उन्होंने मेडिकल जांच का फैसला लिया। उस समय मुझे नहीं लगा कि यह क्रैम्प है, बाकी शरीर ठीक लग रहा था,” अल्काराज ने कहा।

इस विवाद ने एक यादगार मुकाबले की चमक को कुछ हद तक फीका कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या मेडिकल टाइम-आउट से जुड़े नियमों की दोबारा समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि, अंत में यही कहा जा सकता है कि फैसला मेडिकल विशेषज्ञों का होता है—और विश्वास उसी खिलाड़ी पर किया जाता है, जो वास्तव में चोट से जूझ रहा हो।

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