लद्दाख गतिरोध पर पूर्व सेना प्रमुख की किताब को लेकर राहुल गांधी और राजनाथ सिंह के बीच विवाद
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज संसद में अपने भाषण की शुरुआत पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित किताब से जुड़े एक मैगज़ीन लेख का हवाला देकर की। यह मुद्दा उठते ही सत्तापक्ष के नेताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और सदन में भारी हंगामा देखने को मिला।
राहुल गांधी ने लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर वर्ष 2020 में हुए गतिरोध का ज़िक्र करते हुए जनरल नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर प्रकाशित एक लेख का प्रिंटआउट दिखाया। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत आपत्ति जताई और कहा कि किसी अप्रकाशित किताब को सदन में उद्धृत करना नियमों के खिलाफ है।
पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद की शुरुआत 5 मई 2020 को पैंगोंग झील क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद हुई थी। इसी घटना से जुड़े अनुभवों का उल्लेख जनरल नरवणे ने अपनी अप्रकाशित किताब में किया है, जिस पर एक प्रतिष्ठित मैगज़ीन में लेख छपा था।
राहुल गांधी जब बार-बार उस लेख के हवाले से चर्चा शुरू करने की कोशिश कर रहे थे, तभी रक्षा मंत्री के अलावा गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विरोध जताया। राजनाथ सिंह ने कहा, “नेता प्रतिपक्ष जिस किताब का हवाला दे रहे हैं, वह अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है, इसलिए उसे सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए।”
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि चीन से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील है और नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात रखने की अनुमति मिलनी चाहिए।
सदन में “चीनी टैंक” शब्द के राहुल गांधी द्वारा बार-बार इस्तेमाल पर भी सत्तापक्ष के नेताओं ने आपत्ति जताई। अमित शाह ने सवाल उठाया, “जब किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है, तो उससे उद्धरण कैसे दिया जा सकता है?” वहीं किरेन रिजिजू ने यह तक कह दिया कि स्पीकर के निर्देशों का पालन न करने वाले सदस्य पर कार्रवाई पर भी विचार होना चाहिए।
हंगामे के बीच राहुल गांधी ने कहा, “ऐसा क्या है जो इन्हें इतना डरा रहा है? अगर डर नहीं है, तो मुझे पढ़ने दिया जाए।” उन्होंने दावा किया कि लेख और किताब पूरी तरह प्रामाणिक हैं और कहा कि वह इस मुद्दे पर बोलना नहीं चाहते थे, लेकिन भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या द्वारा उनकी और कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल उठाने के बाद उन्हें ऐसा करना पड़ा।
सरकारी सूत्रों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संसद के पटल को “तुच्छ” बना रहे हैं और यह एक “खतरनाक परंपरा” है। सूत्रों के मुताबिक, “कल को कोई भी नेता किसी अप्रकाशित किताब के नाम पर मनगढ़ंत बातें कह सकता है।”
लगातार हंगामे के चलते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने अपने भाई का बचाव करते हुए कहा, “वह सेना को बदनाम नहीं कर रहे थे, बल्कि सेना प्रमुख की किताब का अंश पढ़ रहे थे। जब भी कोई सच्चाई सामने आती है, भाजपा यही आरोप लगाती है।”
दोपहर 3 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन हालात जस के तस रहे। राहुल गांधी ने फिर जनरल नरवणे की किताब का मुद्दा उठाया, जिस पर एक बार फिर हंगामा हुआ और अंततः लोकसभा की कार्यवाही फिर से स्थगित कर दी गई
