चार फाइनल, चार हार: दिल्ली कैपिटल्स की नाकामी से बढ़ती निराशा

Four finals, four defeats: Growing frustration over Delhi Capitals' failures.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: दिल्ली कैपिटल्स के लिए महिला प्रीमियर लीग (WPL) का खिताब एक बार फिर दूर ही रह गया। गुरुवार रात खेले गए 2026 WPL फाइनल में DC को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के हाथों दिल तोड़ने वाली हार का सामना करना पड़ा। यह लगातार चौथा मौका है जब दिल्ली कैपिटल्स फाइनल तक पहुंचने के बावजूद ट्रॉफी नहीं उठा सकीं।

रिकॉर्ड 203 रन का लक्ष्य खड़ा करने के बाद भी दिल्ली मुकाबला नहीं जीत पाई, जबकि RCB ने टूर्नामेंट इतिहास का सबसे बड़ा सफल रन चेज़ पूरा कर खिताब अपने नाम किया। फाइनल जैसे बड़े मंच पर 200 से अधिक का स्कोर आमतौर पर निर्णायक माना जाता है, लेकिन इस बार दिल्ली की मजबूत स्थिति भी जीत में नहीं बदल सकी।

2026 का फाइनल दिल्ली के लिए खास माना जा रहा था। 2024 के फाइनल की हार के बाद यह मौका था पुराने जख्म भरने का और इतिहास बदलने का। टीम एलिमिनेटर जीतकर फाइनल में पहुंची थी और पिछले तीन सीज़न के ट्रेंड के मुताबिक यह जीत का संकेत माना जा रहा था। लेकिन फाइनल में कहानी एक बार फिर पलट गई।

फाइनल में फिर वही सवाल: चूक कहां हुई?

मैच के दौरान ज्यादातर समय दिल्ली कैपिटल्स आगे दिख रही थी। बल्लेबाजी में टीम ने लगभग हर बॉक्स टिक किया। गेंदबाजी में भी शुरुआती झटके मिले। लेकिन दबाव के निर्णायक पलों में छोटी-छोटी गलतियां भारी पड़ गईं।

सबसे अहम मोड़ उस समय आया जब मिन्नू मणि से राधा यादव का कैच छूट गया। उस वक्त मैच पूरी तरह दिल्ली की पकड़ में आ सकता था, लेकिन इस एक चूक ने पूरा समीकरण बदल दिया। राधा यादव ने जीवनदान का पूरा फायदा उठाया और वही रन बनाए, जो अंत में जीत और हार का अंतर बने।

क्रिकेट में अक्सर कहा जाता है कि बड़े मैच छोटे पलों से तय होते हैं, और यह फाइनल उसी का उदाहरण रहा।

चार फाइनल, चार हार: बढ़ती निराशा

एक फाइनल हारना किसी भी टीम के लिए मुश्किल होता है। दो और तीन बार तक पहुंचकर हारना सवाल खड़े करता है। लेकिन चार लगातार फाइनल हारना दिल्ली कैपिटल्स के लिए गंभीर आत्ममंथन की स्थिति बनाता है।

पहले तीन सीज़न में टीम की कप्तानी मेग लैनिंग के हाथों में थी, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे सफल कप्तानों में से एक हैं। इस सीज़न जिम्मेदारी जेमिमा रोड्रिग्स को सौंपी गई। कप्तान बदली, खिलाड़ी बदले, लेकिन नतीजा वही रहा।

यह साफ करता है कि समस्या सिर्फ एक मैच या एक खिलाड़ी की नहीं है, बल्कि फाइनल जैसे दबाव भरे मुकाबलों में फैसले और निष्पादन का अंतर ही दिल्ली को पीछे छोड़ देता है।

जेमिमा रोड्रिग्स का नेतृत्व और सकारात्मक पक्ष

हार के बावजूद जेमिमा रोड्रिग्स का सीज़न सराहनीय रहा। कप्तान के रूप में यह उनका पहला पूरा WPL सीज़न था और शुरुआत आसान नहीं रही। दिल्ली ने अपने पहले चार में से तीन मैच गंवाए और टीम लगभग टूर्नामेंट से बाहर होने की कगार पर थी।

लेकिन जेमिमा ने टीम को संभाला। बल्लेबाजी और मैदान पर फैसलों के जरिए उन्होंने दिल्ली को वापस ट्रैक पर लाया। फाइनल में खेली गई उनकी 32 गेंदों की अर्धशतकीय पारी दबाव में आए एक कप्तान की परिपक्वता को दिखाती है।

फाइनल से पहले उनके प्रदर्शन पर सवाल थे, लेकिन इस मुकाबले में उन्होंने साबित किया कि वह बड़े मंच पर जिम्मेदारी उठाने से नहीं डरतीं।

आगे क्या?

दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह हार बेहद दर्दनाक है, लेकिन टीम के पास मजबूत कोर और युवा नेतृत्व मौजूद है। आने वाले महीनों में महिला T20 वर्ल्ड कप खेला जाना है, जहां जेमिमा रोड्रिग्स एक अहम भूमिका निभाने वाली हैं।

WPL के अगले सीज़न में दिल्ली कैपिटल्स एक बार फिर खिताब की दावेदार होंगी। सवाल सिर्फ इतना है—क्या यह टीम फाइनल के दबाव को पार कर पाएगी?

चार फाइनल हारने के बाद, यही अगली सबसे बड़ी चुनौती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *