पुराना किला में संपन्न हुआ ‘कालिदास का कथालोक’ सांस्कृतिक महोत्सव

Kalidas's Kathalok cultural festival concluded at Purana Qilaदिलीप गुहा

नई दिल्ली: कालिदास का कथालोक, समय यान द्वारा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सहयोग से आयोजित एक द्विदिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव, 7 और 8 फरवरी 2026 को पुराना किला, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। इस महोत्सव का उद्देश्य महाकवि कालिदास के जीवन और कृतित्व से प्रेरित प्रस्तुतियों, विद्वत् चर्चाओं, अनुभवात्मक स्थलों और संवादात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से भारत की प्राचीन सभ्यतागत विरासत को एक जीवंत और सतत परंपरा के रूप में प्रस्तुत करना था।

“कालिदास और उनका भारत” विषय पर आधारित इस महोत्सव में कालिदास से संबद्ध कालखंड के दार्शनिक, साहित्यिक, कलात्मक और सामाजिक आयामों का अन्वेषण किया गया। कठोर ऐतिहासिक समय-सीमाओं तक सीमित न रहते हुए, इस आयोजन ने उस युग को एक ऐसे सभ्यतागत क्षण के रूप में देखा, जिसके विचार आज भी भारतीय चिंतन, सृजनशीलता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को प्रभावित करते हैं। इस महोत्सव को आईजीएनसीए, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) जैसे प्रमुख सांस्कृतिक संस्थानों का सहयोग प्राप्त हुआ।

उद्घाटन समारोह में कपिल मिश्रा, माननीय राज्य मंत्री (भाषा, संस्कृति एवं पर्यटन); डॉ. सच्चिदानंद जोशी, सदस्य सचिव, आईजीएनसीए; न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एस. एन. ढींगरा, संस्थापक, समय यान; डॉ. संध्या पुरेचा, अध्यक्ष, संगीत नाटक अकादमी; तथा चित्तरंजन त्रिपाठी, निदेशक, एनएसडी, उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने इस महोत्सव को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सांस्कृतिक पहल के रूप में रेखांकित किया।

महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण कालिदास बैंड्स संगीत प्रतियोगिता रही, जिसमें दिल्ली भर से आए युवा संगीतकारों ने भाग लिया। कॉलेज बैंड्स ने समकालीन वाद्ययंत्रों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय और लोक परंपराओं की नवीन व्याख्याएँ प्रस्तुत कीं। प्रतियोगिता का मूल्यांकन प्रसिद्ध संगीतकार श्री अमन नाथ और सुप्रसिद्ध बैंड यूफोरिया के सदस्य राकेश भारद्वाज द्वारा किया गया। प्रतियोगिता में नक्शा, निर्गुण नाद (मंज़िल मिस्टिक), मंतरंग (तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज) और रागधारा (संतोष मेडिकल कॉलेज) ने भाग लिया, जबकि जीएस यूनिवर्सिटी के म्यूजिकल मैवरिक्स ने विशेष गैर-प्रतियोगी प्रस्तुति दी।

मंज़िल मिस्टिक्स के निर्गुण नाद बैंड ने भारतीय साहित्यिक और आध्यात्मिक परंपराओं पर आधारित एक संगीतमय प्रस्तुति दी। यह संगठन विद्यालयों और समुदायों के माध्यम से बच्चों और युवाओं तक संगीत शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए कार्य करता है। कार्यक्रम में बोलते हुए बैंड की सदस्य और लर्निंग थ्रू म्यूजिक फेलो प्रियंका ने बताया कि वे नियमित रूप से स्कूलों और समुदायों में संगीत कक्षाएँ संचालित करते हैं। महोत्सव में बैंड ने कबीर का भजन “घट-घट में पंछी बोलता है” प्रस्तुत किया, जो आत्मबोध और आंतरिक उत्तरदायित्व के विषयों को रेखांकित करता है। उन्होंने इस आयोजन को भारतीय साहित्य और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने वाली एक सार्थक पहल बताया।

रंगमंच भी महोत्सव का एक प्रमुख अंग रहा। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा मंचित महाकवि कालिदास के जीवन और कृतित्व पर आधारित एक विशेष रूप से तैयार तीन अंकों का नाटक, सोलह कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया। रामजी बाली द्वारा परिकल्पित और निर्देशित इस नाट्य प्रस्तुति में अभिज्ञानशाकुंतलम् और विक्रमोर्वशीयम् के चयनित अंशों को समाहित करते हुए कालिदास की साहित्यिक यात्रा को समकालीन दर्शकों के लिए सुलभ रूप में प्रस्तुत किया गया।

महोत्सव में अनुभवात्मक स्थल भी स्थापित किए गए, जहाँ दर्शक पारंपरिक प्रथाओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ सके। इनमें इत्र निर्माण की प्रक्रिया, प्राचीन भारतीय बोर्ड गेम्स, पारंपरिक पाक विधियाँ और ब्राह्मी लिपि में नाम लेखन जैसी गतिविधियाँ शामिल थीं।  विदुला ने बताया कि उनके संगठन ने लगभग 75 प्राचीन भारतीय बोर्ड गेम्स को पुनर्जीवित किया है, जिनमें से कई को नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है, और जो संज्ञानात्मक विकास एवं पीढ़ियों के बीच संवाद में सहायक हैं।

विद्वत् संवाद महोत्सव का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा, जिसमें इतिहासकारों, विद्वानों और चिंतकों ने प्राचीन भारतीय व्यापार मार्गों, शासन प्रणालियों, विज्ञान, दर्शन और सौंदर्यशास्त्र जैसे विषयों पर चर्चा की। प्रमुख वक्ताओं में नीरा मिश्रा, बलबीर पुंज, सुधांशु त्रिवेदी, डॉ. रंजना अग्रवाल और कैप्टन प्रवीन चतुर्वेदी शामिल रहे, जिनकी सहभागिता ने बौद्धिक विमर्श को समृद्ध किया।

ताल युद्ध जैसी संगीतमय प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, जिसमें तबला, पखावज, घटम, मृदंगम और ढोलक जैसे वाद्ययंत्रों की जुगलबंदी प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में वरुण राजशेखरन, मनोहर बालचंद्रिने, ज़रघाम अकरम खान और महावीर चंद्रावत ने प्रस्तुति दी, वहीं रविंदर राजपूत (बांसुरी) और सौमेंद्र गोस्वामी (सितार) की मधुर संगत भी रही।

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एस. एन. ढींगरा, अध्यक्ष – समय यान, ने कहा, “कालिदास का कथालोक हमारा प्रयास है कि प्राचीन भारत को पुस्तकों के पन्नों से निकालकर एक जीवंत अनुभव बनाया जाए। हम इतिहास को दृश्य प्रदर्शन के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे विचारों, कथाओं और भावनाओं के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिन्हें दो हजार वर्ष बाद भी महसूस किया जा सकता है। प्रदर्शन, शिल्प, संगीत और संवाद के माध्यम से यह महोत्सव विशेष रूप से युवा दर्शकों को कालिदास और उनके समय के भारत से जोड़ता है।”

कथालोक परियोजना प्रमुख, भारती ढींगरा ने कहा, “यह महोत्सव कहानियों, स्थानों और उन प्रश्नों को सुनने पर आधारित है, जिनके प्रति प्राचीन भारत जिज्ञासु था—प्रेम, सत्ता, प्रकृति और समाज। कालिदास का कथालोक अतीत पर कोई निष्कर्ष थोपता नहीं, बल्कि चिंतन और संवाद के लिए वातावरण रचता है। पुराना किला इस अनुभव को शारीरिक और भावनात्मक रूप से जीवंत बनाता है, जिससे इतिहास वर्तमान के रूप में अनुभव होता है।”

महोत्सव का समापन ‘सुर समय यान’ नामक भव्य संगीतमय प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसमें 30 कलाकारों ने भाग लिया। पंडित अभय रुस्तम सोपोरी द्वारा परिकल्पित और कथित इस प्रस्तुति का उद्घाटन के. सतीश नंबूदरीपाद, महानिदेशक, दूरदर्शन, द्वारा किया गया। इस संगीतमय समापन में भारतीय संगीत की यात्रा को उसके उद्गम से लेकर समकालीन शास्त्रीय और लोक अभिव्यक्तियों तक प्रस्तुत किया गया।

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