रूस ने खाड़ी संकट के बीच भारत को ऊर्जा आपूर्ति में मदद का दिया भरोसा

Russia assures India of energy supply support amid Gulf crisis
(File Photo/Twitter)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंताओं के बीच रूस ने भारत को भरोसा दिलाया है कि यदि खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होती है तो वह अतिरिक्त ऊर्जा आपूर्ति के लिए तैयार है। समाचार एजेंसी Reuters ने एक रूसी सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी है।

यह पेशकश ऐसे समय में आई है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल मची हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालता है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के ठिकानों पर हमलों और तेहरान की चेतावनियों के बाद यहां जहाजरानी प्रभावित हुई है। बीमा कवरेज में कमी के चलते भी तेल टैंकरों की आवाजाही पर असर पड़ा है।

भारत के पास पर्याप्त भंडार

भारत सरकार ने मंगलवार को कहा कि देश के पास फिलहाल पर्याप्त कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार है, जिससे किसी भी अल्पकालिक आपूर्ति संकट से निपटा जा सकता है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के पास कुल 50 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है—जिसमें 25 दिन का कच्चा तेल और 25 दिन के पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं।

भारत अपनी लगभग आधी कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते प्राप्त करता है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि देश ने वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और देशों की पहचान शुरू कर दी है, ताकि जोखिम को कम किया जा सके।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत किसी भी संभावित आपूर्ति व्यवधान से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। पीआईबी के अनुसार, सरकार ने ईंधन की उपलब्धता और भंडार की निगरानी के लिए 24×7 कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है।

रूस बना विकल्प

रूसी सूत्रों के अनुसार, यदि खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति बाधित होती है तो रूस अतिरिक्त कच्चा तेल उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत पश्चिम एशियाई आपूर्ति में संभावित कमी की भरपाई के लिए रूसी कच्चे तेल का सहारा ले सकता है।

गौरतलब है कि भारत ने पहले अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत रूसी तेल की खरीद धीरे-धीरे कम करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, यह स्थिति उस समय बदल गई जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए देश-आधारित टैरिफ को रद्द कर दिया।

कीमतों पर असर की आशंका

हालांकि तत्काल आपूर्ति संकट की संभावना कम है, लेकिन तेल की कीमतों में तेजी चिंता का विषय बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो ईरान संकट के बाद लगभग 10 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्शाती है। इससे भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में कच्चे तेल के आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए, जबकि अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच यह आंकड़ा 100.4 अरब डॉलर रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा भूराजनीतिक परिस्थितियों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश आने वाले समय में अहम भूमिका निभाएगी।

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