कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए सुरक्षा माहौल जरूरी: उमर अब्दुल्ला

Secure Environment Essential for Return of Kashmiri Pandits: Omar Abdullahचिरौरी न्यूज

श्रीनगर: उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि कश्मीरी पंडितों की अपने मूल स्थानों पर वापसी के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व सुरक्षा का माहौल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन सुरक्षित वातावरण के बिना वापसी संभव नहीं है।

विधानसभा में एक निजी सदस्य विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीरी पंडितों का विस्थापन एक सच्चाई है, जिसे न सरकार और न ही कोई अन्य पक्ष नकारता है। उन्होंने बताया कि विभिन्न सरकारों ने उनकी वापसी के लिए प्रयास किए हैं, लेकिन जमीनी स्थिति अभी ऐसी नहीं बनी है कि समुदाय खुद को सुरक्षित महसूस करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समुदाय के भीतर सुरक्षा का भरोसा गहराई से प्रभावित हुआ है, जिसे बहाल करना बेहद जरूरी है। उन्होंने सदन में कहा कि जब तक यह विश्वास दोबारा स्थापित नहीं होता, तब तक उनकी वापसी की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं होगा।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार विस्थापित कश्मीरी पंडितों की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए कदम उठा रही है। साथ ही उनके धार्मिक स्थलों के संरक्षण और रखरखाव को प्राथमिकता दी जा रही है।

पिछले विधायी प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले भी संपत्तियों की सुरक्षा से जुड़े विधेयक लाने की कोशिश की गई थी, लेकिन समुदाय के कुछ वर्गों के विरोध के कारण वे सफल नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह के किसी भी कानून के लिए व्यापक सहमति जरूरी होगी, ताकि किसी प्रकार का विभाजन न हो।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कई बार केवल एक पक्ष को ही सामने लाया जाता है, जबकि सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी सहयोग की सकारात्मक कहानियां सामने नहीं आ पातीं।

उन्होंने दोहराया कि सरकार विस्थापित समुदाय के कल्याण और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे हालात बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिससे उनकी सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित हो सके।

गौरतलब है कि 1990 के दशक की शुरुआत में घाटी में बढ़ती हिंसा और पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के कारण हजारों कश्मीरी पंडितों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।

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