तमिलनाडु में राजनीतिक विवाद: टेंडर पर टीवीके और डीएमके के बीच बहस, सरकार ने वापस लिया फैसला

The Dawn of the ‘Thalapathy Era’ in Tamil Nadu: C. Joseph Vijay Creates History by Taking Oath as Chief Minister.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: मुख्यमंत्री विजय की अगुवाई वाली नई सरकार तमिलनाडु में एक बड़े राजनीतिक विवाद में घिर गई है। सरकार ने ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी एक सरकारी टेंडर को कुछ ही घंटों के भीतर रद्द कर दिया। यह फैसला तब लिया गया, जब विपक्ष ने आरोप लगाया कि पूरी टेंडर प्रक्रिया को कथित तौर पर एक खास ठेकेदार को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।

विवाद की शुरुआत 19 मई को हुई, जब ग्रामीण विकास विभाग ने कांचीपुरम जिले में 30,000 लीटर क्षमता वाली ऊँची पानी की टंकी के निर्माण के लिए 16.83 लाख रुपये का टेंडर जारी किया। टेंडर का विज्ञापन सुबह 9 बजे प्रकाशित किया गया, जबकि बोलियाँ जमा करने की अंतिम समय-सीमा उसी दिन दोपहर 3 बजे तय की गई थी। यानी इच्छुक कंपनियों और ठेकेदारों को आवेदन की पूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए केवल छह घंटे का समय दिया गया।

इतना ही नहीं, टेंडर कार्यक्रम के अनुसार उसी दिन शाम 4 बजे बोलियाँ खोलने की प्रक्रिया भी निर्धारित कर दी गई थी। टेंडर से जुड़े दस्तावेज़ और स्क्रीनशॉट कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसके बाद सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। आलोचकों ने कहा कि इतनी कम समय-सीमा किसी निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।

मुख्य विपक्षी दल DMK ने सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अमुथरासन ने सवाल उठाया कि कोई भी कंपनी महज़ छह घंटों के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर, आवश्यक दस्तावेज़ जुटाकर और सभी औपचारिकताएँ पूरी करके वैध बोली कैसे दाखिल कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की समय-सीमा यह संकेत देती है कि टेंडर प्रक्रिया पहले से तय योजना के तहत किसी विशेष कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए बनाई गई थी।

जैसे-जैसे सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में आलोचना तेज़ होती गई, TVK सरकार ने उसी दिन देर शाम टेंडर को “प्रशासनिक कारणों” का हवाला देते हुए रद्द कर दिया। हालांकि, सरकार के इस कदम के बावजूद विवाद थमता दिखाई नहीं दे रहा है।

विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि आखिर इतनी जल्दबाज़ी में टेंडर जारी करने की आवश्यकता क्या थी, और क्या पूरी प्रक्रिया में सरकारी नियमों एवं पारदर्शिता के मानकों का पालन किया गया था।

यह मामला TVK सरकार के लिए शुरुआती दौर की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही सार्वजनिक ठेकों में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे उसकी प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर संदेह पैदा हो गया है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *