अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले KVIC ने लॉन्च किया ‘स्वधा’ वेलनेस वियर कलेक्शन
दिलीप गुहा नई दिल्ली: भारत में वेलनेस और समग्र स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच दो सशक्त परंपराएं—योग और खादी—एक नए रूप में सामने आई हैं। इसी दिशा में, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले ‘स्वधा’ (Svadha) नामक वेलनेस वियर कलेक्शन लॉन्च किया है। हाथ से काते और बुने गए खादी वस्त्रों से तैयार यह संग्रह पारंपरिक भारतीय कपड़े को आधुनिक जीवनशैली के अनुरूप प्रस्तुत करता है, जिसमें स्थिरता, आराम, उपयोगिता और सादगी का समावेश है।
खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज गोयल ने ‘स्वधा’ वेलनेस वियर कलेक्शन का शुभारंभ किया। यह संग्रह खादी उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence for Khadi – CoEK) द्वारा विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य योग की भावना को आधुनिक वेलनेस वियर के साथ जोड़ते हुए ऐसे परिधान उपलब्ध कराना है जो आरामदायक, पर्यावरण-अनुकूल और बहुउपयोगी हों।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम नई दिल्ली के हौज खास स्थित राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) परिसर में स्थापित खादी उत्कृष्टता केंद्र के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में KVIC, CoEK और NIFT के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
वर्ष 2021 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अंतर्गत KVIC और NIFT के सहयोग से स्थापित खादी उत्कृष्टता केंद्र खादी क्षेत्र के लिए डिजाइन और नवाचार केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। यह देशभर की खादी संस्थाओं के साथ मिलकर आधुनिक उत्पादों के विकास, डिजाइन क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण और नवाचार, ब्रांडिंग तथा विपणन के माध्यम से खादी को नई पहचान देने का कार्य करता है। ‘स्वधा’ इसी प्रयास की नवीन कड़ी है।
‘स्वधा’ : सादगी, संतुलन और सहजता का प्रतीक
इस अवसर पर बोलते हुए KVIC अध्यक्ष मनोज गोयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भारत की उस प्राचीन परंपरा का उत्सव है, जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित कर समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देती है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए ‘स्वधा’ वेलनेस वियर कलेक्शन तैयार किया गया है, जो भारत की दो महत्वपूर्ण विरासतों, योग और खादी, को एक साथ पिरोता है।
उन्होंने कहा कि खादी केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि महात्मा गांधी की विरासत, आत्मनिर्भरता, स्वदेशी चेतना, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण सशक्तिकरण का प्रतीक है। ‘स्वधा’ इन मूल्यों को आधुनिक परिधानों के माध्यम से अभिव्यक्त करता है। उन्होंने बताया कि ‘स्वधा’ शब्द अथर्ववेद से लिया गया है, जिसका अर्थ है सहजता, आराम और आत्मिक संतोष। इसी दर्शन के अनुरूप यह संग्रह सादगी, आराम और अनुकूलता को प्राथमिकता देता है तथा योगाभ्यास के साथ-साथ दैनिक उपयोग के लिए भी उपयुक्त है।
आराम, गतिशीलता और समकालीन शैली का मेल
‘स्वधा’ कलेक्शन को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह योग मैट तक सीमित न रहकर दैनिक जीवन का भी हिस्सा बन सके। इसके परिधानों में सरलता, आराम और सौम्य सौंदर्य का संतुलित समावेश है। आत्म-जागरूकता और सजग जीवनशैली की अवधारणा से प्रेरित इस संग्रह में ढीले-ढाले सिल्हूट, सूक्ष्म डिजाइन और बहुउपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया गया है।
अधिकांश परिधान फ्री-साइज और जेंडर-न्यूट्रल हैं, जिससे वे विभिन्न शरीर संरचनाओं और जीवनशैलियों के अनुरूप आसानी से अपनाए जा सकते हैं। हाथ से काते और बुने गए खादी कपड़े की प्राकृतिक विशेषताएं—सांस लेने की क्षमता, हल्कापन, कोमलता और आराम—इसे वेलनेस वियर के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती हैं।
इस संग्रह में कुल नौ विशिष्ट परिधान शैलियां शामिल हैं, जिन्हें सहज गतिशीलता और पूरे दिन आराम प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इन परिधानों के लिए खादी कपड़ा देश की तीन प्रतिष्ठित खादी संस्थाओं, गांधीग्राम खादी एंड वी.आई. पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट (तमिलनाडु), पय्यानूर फिरका ग्रामोदय खादी संघ (केरल) और क्षेत्रीय पंजाब खादी मंडल (पंजाब), से प्राप्त किया गया है।
खादी क्षेत्र ने रचा नया इतिहास
श्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन ने खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र को नई ऊर्जा और नई पहचान प्रदान की है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र ने 1.87 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिक्री हासिल कर नया इतिहास रचा है। यह उपलब्धि देशभर के लाखों कारीगरों, बुनकरों, ग्रामीण उद्यमियों और खादी संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि अब खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने 2.51 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में यह क्षेत्र देशभर में लगभग 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है और विकसित भारत के निर्माण तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
क्या है वेलनेस वियर?
वेलनेस वियर ऐसे परिधानों को कहा जाता है जिन्हें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है। इनमें आराम, कार्यक्षमता और विशेष फैब्रिक गुणों का समावेश होता है, जिससे शरीर को बेहतर प्रदर्शन और पुनर्स्थापन में सहायता मिलती है।
हल्के, सांस लेने योग्य कपड़ों और आरामदायक डिजाइन वाले ये परिधान शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने, त्वचा की जलन को कम करने तथा योग, स्ट्रेचिंग और अन्य शारीरिक गतिविधियों के दौरान स्वतंत्र रूप से गतिशील रहने में मदद करते हैं। वेलनेस वियर का उद्देश्य केवल व्यायाम करना नहीं, बल्कि विश्राम, एकाग्रता और मानसिक संतुलन को भी बढ़ावा देना है।
इस अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए युवा फैशन डिजाइनर पायल कुमारी ने कहा, “वेलनेस वियर ऐसे परिधान हैं जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को समर्थन देने के लिए बनाए जाते हैं। इनमें आराम, उपयोगिता और फैब्रिक तकनीक का समन्वय होता है। यही कारण है कि इनमें हल्के रंगों और हल्के वजन वाले कपड़ों का उपयोग किया जाता है।”
उन्होंने कहा कि योग और स्ट्रेचिंग जैसी गतिविधियों के लिए वेलनेस वियर विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि इसका लचीला और आरामदायक डिजाइन शरीर को पूर्ण गतिशीलता प्रदान करता है और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होता है।
21 जून को मनाया जाएगा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर इसे आधिकारिक मान्यता दी थी। यह वैश्विक पहल योग की उस प्राचीन भारतीय परंपरा का उत्सव है, जो शरीर, मन और श्वास के समन्वय के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देती है। ‘स्वधा’ कलेक्शन इसी भावना को वस्त्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का एक अभिनव प्रयास है।
