हेमंत सोरेन को बड़ी राहत, 2014 के चुनावी आचार संहिता उल्लंघन मामले की एफआईआर झारखंड हाई कोर्ट ने की रद्द

Major relief for Hemant Soren: Jharkhand High Court quashes FIR in 2014 election code of conduct violation caseचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ी कानूनी राहत मिली है। झारखंड हाई कोर्ट ने वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। इस फैसले के साथ करीब एक दशक से लंबित यह कानूनी विवाद औपचारिक रूप से समाप्त हो गया।

यह मामला सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना में दर्ज एफआईआर संख्या 418/2014 से जुड़ा था। आरोप था कि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हेमंत सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करते हुए चुनावी नियमों और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया।

एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवज्ञा) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के साथ-साथ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125 के तहत आरोप लगाए गए थे। शिकायत में कहा गया था कि चुनाव प्रचार के दौरान किए गए कथित कृत्य सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी आदेशों की अवहेलना के समान थे।

मामले की सुनवाई पहले पश्चिमी सिंहभूम की निचली अदालत में चल रही थी। इस दौरान मुख्यमंत्री की ओर से अधिवक्ता दीपांकर ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि आरोप तथ्य और कानून, दोनों ही दृष्टि से टिकाऊ नहीं हैं। उनका तर्क था कि शिकायत राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित थी और इसमें ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे आदर्श आचार संहिता के वास्तविक उल्लंघन का मामला बनता हो। इसलिए एफआईआर को प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त किया जाना चाहिए था।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्य इतने पर्याप्त नहीं हैं कि आपराधिक कार्यवाही को आगे जारी रखा जाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस मामले में मुकदमे को जारी रखने का कोई वैधानिक औचित्य नहीं बनता, इसलिए एफआईआर को रद्द किया जाना उचित है।

गौरतलब है कि झारखंड हाई कोर्ट ने इससे पहले ही निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अब अंतिम आदेश जारी होने के बाद एफआईआर पूरी तरह निरस्त कर दी गई है और वर्ष 2014 के चुनाव प्रचार से जुड़ा यह मामला समाप्त हो गया है।

इस फैसले को हेमंत सोरेन के लिए महत्वपूर्ण कानूनी और प्रक्रियात्मक राहत माना जा रहा है। हाल के वर्षों में विभिन्न कानूनी मामलों का सामना कर रहे मुख्यमंत्री के लिए यह निर्णय बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अदालत का यह आदेश वर्ष 2014 की चुनावी घटनाओं के ऐतिहासिक संदर्भ को नहीं बदलता, लेकिन इससे यह स्पष्ट होता है कि चुनाव संबंधी मामलों में आपराधिक कार्रवाई जारी रखने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार और ठोस साक्ष्य होना आवश्यक है।

झारखंड हाई कोर्ट के इस फैसले के साथ आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन से जुड़ा यह दशक पुराना विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है। यह निर्णय चुनावी शिकायतों की न्यायिक और प्रक्रियात्मक जांच के महत्व को भी रेखांकित करता है तथा यह संदेश देता है कि केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर ही आपराधिक मुकदमा आगे बढ़ाया जा सकता है।

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