वैभव सूर्यवंशी को बाहर करने पर भड़के सुनील गावस्कर, ’15 साल के बच्चे के साथ ऐसा करना निराशाजनक’

Sunil Gavaskar angry over dropping Vaibhav Sooryavanshi; 'disappointing to treat a 15-year-old kid this way'चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें और अंतिम टी20 मुकाबले में 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन से बाहर करने के भारतीय टीम प्रबंधन के फैसले पर पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र के खिलाड़ी को सिर्फ तीन मैचों के बाद बाहर करना सही फैसला नहीं था और इससे उसके आत्मविश्वास पर असर पड़ सकता है।

गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुआई में भारतीय टीम ने अंतिम मुकाबले में वैभव की जगह अनुभवी संजू सैमसन को मौका दिया। गौरतलब है कि सैमसन को खराब प्रदर्शन के कारण सीरीज के बीच में बाहर कर दिया गया था, लेकिन आखिरी मैच में उनकी वापसी हुई।

‘फैसला बेहद निराशाजनक’

टॉस के दौरान जब वैभव के बाहर होने की जानकारी मिली तो सुनील गावस्कर ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “वैभव का टीम में नहीं होना बेहद निराशाजनक है। सीमित ओवरों के क्रिकेट में ओपनिंग बल्लेबाज जरूरत पड़ने पर मध्यक्रम में भी बल्लेबाजी कर सकते हैं। उसने अपनी प्रतिभा की झलक दिखाई है।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर यह मुकाबला करो या मरो वाला होता तो अनुभवी खिलाड़ी को खिलाने का फैसला समझ में आता। लेकिन यह ऐसा मैच नहीं था। मुझे लगता है कि भारत ने एक बड़ा मौका गंवा दिया। मैं सिर्फ यही उम्मीद करता हूं कि कोई उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे समझाए कि यह उसके करियर का अंत नहीं है। सिर्फ तीन मैचों के बाद 15 साल के खिलाड़ी को बाहर करना थोड़ा कठोर फैसला है।”

ग्रीम स्वान ने भी उठाए सवाल

इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर ग्रीम स्वान ने भी भारतीय टीम प्रबंधन के फैसले की आलोचना की। उनका मानना है कि अगर टीम वैभव को भविष्य का बड़ा खिलाड़ी मानती है, तो उसे लगातार मौके भी देने चाहिए थे।

स्वान ने कहा, “इन तीन मैचों में वैभव ने अपनी क्षमता की झलक दिखाई। अगर वह पूरी तरह असफल रहता तो उसे बाहर करना समझ में आता। लेकिन संजू सैमसन ने इससे पहले 5, 0 और 1 रन बनाए थे, जबकि वैभव ने कम से कम 13, 14 और 15 रन बनाए। संजू तो पिछले तीन मैचों में रन बनाने के लिए भी संघर्ष कर रहे थे।”

उन्होंने आगे कहा, “वैभव सिर्फ 15 साल का है। इस उम्र में खिलाड़ी मानसिक रूप से पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। ऐसे फैसले उसके आत्मविश्वास को कई महीनों तक प्रभावित कर सकते हैं। अगर आपको लगता है कि यह लड़का भविष्य में दुनिया के महान बल्लेबाजों में शामिल हो सकता है, तो उसकी प्रतिभा को संभालकर आगे बढ़ाना चाहिए। वह टीम के खराब प्रदर्शन का शिकार बन गया।”

तीन मैचों में दिखी प्रतिभा

वैभव सूर्यवंशी को इंग्लैंड सीरीज में संजू सैमसन की जगह टीम में शामिल किया गया था। उन्होंने तीन मुकाबलों में कुल 42 रन बनाए। हालांकि वह बड़ी पारी नहीं खेल सके, लेकिन आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने अपनी स्ट्राइक रेट से प्रभावित किया। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों की अतिरिक्त उछाल के सामने उन्हें जरूर मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

टीम प्रबंधन के फैसले पर उठ रहे सवाल

भारत के इंग्लैंड दौरे के बाद टीम चयन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। वैभव सूर्यवंशी को सिर्फ तीन मैचों के बाद बाहर करना, जबकि सीरीज पहले ही भारत के हाथ से निकल चुकी थी, कई पूर्व क्रिकेटरों को समझ नहीं आया।

अब यह फैसला भारतीय टीम प्रबंधन के लिए लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए उन्हें लगातार अवसर और भरोसा देना जरूरी है, ताकि वे भविष्य में भारतीय टीम के लिए बड़े मैच विजेता बन सकें।

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