स्पेन ने फ्रांस को 2-0 से हराकर फीफा विश्व कप फाइनल में बनाई जगह

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: फुटबॉल में जीत सिर्फ ज्यादा गोल करने से नहीं, बल्कि पूरे मैच पर नियंत्रण रखने से भी मिलती है। स्पेन ने सेमीफाइनल में फ्रांस के खिलाफ यही साबित किया। लुइस डे ला फुएंते की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस को 2-0 से हराकर फीफा विश्व कप के फाइनल में प्रवेश कर लिया।
मैच की शुरुआत से ही स्पेन ने गेंद पर कब्जा बनाए रखा और फ्रांस के तेज़तर्रार आक्रमण को पूरी तरह बेअसर कर दिया। किलियन एम्बाप्पे, उस्मान डेम्बेले और माइकल ओलिसे जैसे स्टार खिलाड़ी पूरे मुकाबले में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे।
स्पेन को पहला गोल पहले हाफ के मध्य में मिला, जब युवा स्टार लामिन यामाल के दबाव में लुकास डिग्ने ने पेनाल्टी दे दी। मिकेल ओयारज़ाबाल ने पेनाल्टी को गोल में बदलकर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई।
दूसरे हाफ के 60वें मिनट के बाद पेड्रो पोरो ने दानी ओल्मो के साथ शानदार तालमेल दिखाते हुए दूसरा गोल दागा और स्पेन की जीत लगभग तय कर दी। यामाल ने बाद में एक और शानदार गोल किया, लेकिन ऑफसाइड के कारण उसे मान्यता नहीं मिली।
आंकड़ों में स्पेन का दबदबा
स्पेन ने पूरे मैच में फ्रांस पर स्पष्ट बढ़त बनाए रखी। दोनों टीमों ने 10-10 शॉट लगाए, लेकिन स्पेन ने तीन बड़े गोल करने के मौके बनाए, जबकि फ्रांस एक भी बड़ा मौका नहीं बना सका। अपेक्षित गोल (Expected Goals) के आंकड़ों में भी स्पेन 1.63 के मुकाबले फ्रांस सिर्फ 0.30 पर रहा।
हालांकि पेड्रो पोरो को “प्लेयर ऑफ द मैच” चुना गया, लेकिन मिडफील्ड में रोड्री ने एक बार फिर अपनी अहमियत साबित की। उन्होंने 82 बार गेंद को छुआ, 59 सफल पास दिए, चार टैकल किए और पूरे मैच में कोई भी खिलाड़ी उन्हें ड्रिबल कर पार नहीं कर सका। उनकी मौजूदगी ने फ्रांस की तेज़ काउंटर अटैक रणनीति को पूरी तरह विफल कर दिया।
पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले किलियन एम्बाप्पे इस मुकाबले में स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने संघर्ष करते नजर आए। उन्होंने लगातार जगह बदलने की कोशिश की, लेकिन स्पेन के डिफेंडरों और रोड्री ने उन्हें खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया।
यामाल का शानदार योगदान
हालांकि लामिन यामाल अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं दिखे, लेकिन उन्होंने मैच पर गहरा प्रभाव छोड़ा। उनकी मेहनत से स्पेन को शुरुआती पेनाल्टी मिली और पूरे मुकाबले में उन्होंने आक्रमण के साथ-साथ रक्षा में भी अहम भूमिका निभाई।
फ्रांस के मुख्य कोच दिदिएर डेसचैम्प्स का अंतिम विश्व कप अभियान सेमीफाइनल में हार के साथ लगभग समाप्त हो गया। उनके सभी सामरिक बदलाव स्पेन की मजबूत पकड़ को तोड़ने में नाकाम रहे। अब फ्रांस को तीसरे स्थान के मुकाबले से संतोष करना होगा।
यूरोपीय चैंपियन स्पेन ने इस जीत के साथ स्पष्ट कर दिया कि वह विश्व कप जीतने का सबसे बड़ा दावेदार है। फ्रांस जैसी मजबूत टीम को पूरी तरह नियंत्रण में रखते हुए हराने के बाद अब स्पेन आत्मविश्वास के साथ फाइनल में उतरेगा, जहां उसकी नजर विश्व फुटबॉल का सबसे बड़ा खिताब जीतने पर होगी।
