वापसी की दावों के बीच ममता बनर्जी का बड़ा संदेश, “उम्र नहीं, हौसला मायने रखता है”

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने अपनी उम्र को लेकर उठ रहे सवालों पर तीखा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की ताकत उसकी उम्र से नहीं, बल्कि उसके हौसले, मानसिक शक्ति और अनुभव से तय होती है।
71 वर्षीय ममता बनर्जी ने फेसबुक पर जारी अपने संदेश में कहा, “उम्र की चिंता मत कीजिए। उम्र शरीर, मन और मानसिक शक्ति से बनती है। मैंने कभी प्रधानमंत्री की उम्र पर सवाल नहीं उठाया। किसी इंसान का उसकी उम्र को लेकर अपमान मत कीजिए। भाजपा के लोगों ने विधानसभा चुनाव के नतीजे वाले दिन मेरे हार्ट अटैक से मरने की कामना की थी, लेकिन मैं तब तक जिंदा रहूंगी, जब तक भाजपा के शासन का अंत नहीं देख लेती।”
हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में टीएमसी को बड़े झटके लगे हैं। पार्टी के कई विधायक और सांसद बगावत कर चुके हैं। विधानसभा में बड़ी संख्या में विधायक बागी नेता रिताब्रत बनर्जी के साथ चले गए हैं, जबकि लोकसभा के 20 सांसद एक अन्य दल में शामिल होकर एनडीए को समर्थन देने का ऐलान कर चुके हैं।
इन चुनौतियों के बावजूद ममता बनर्जी ने भरोसा जताया कि वह एक बार फिर अपनी पार्टी को मजबूत करेंगी। उन्होंने कहा, “जिसे जाना है, वह जा सकता है। जो मेरे साथ हैं, वही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं। मैंने 1997 और 2004 में अकेले संघर्ष कर पार्टी को खड़ा किया था और 2026 में भी नई शुरुआत करने का साहस रखती हूं। मैंने नेताओं की तीन पीढ़ियां तैयार की हैं और जो मेरे साथ हैं, उनके लिए मैं हमेशा छतरी बनकर खड़ी रहूंगी।”
अपने संबोधन के अंत में ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश देते हुए कहा, “करबो, लोरबो, बाचबो” यानी “मैं लड़ूंगी और डटकर जिंदा रहूंगी।” इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह सक्रिय राजनीति से पीछे हटने वाली नहीं हैं।
ममता बनर्जी का यह भावनात्मक संदेश टीएमसी के 21 जुलाई शहीद दिवस कार्यक्रम से ठीक पहले आया है। इस बार पार्टी में जारी अंदरूनी खींचतान के कारण दो अलग-अलग गुट महज एक किलोमीटर की दूरी पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
इस बीच, कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट को इस वर्ष 21 जुलाई का शहीद दिवस कार्यक्रम पारंपरिक विक्टोरिया हाउस के बजाय बिरला प्लैनेटेरियम के निकट आयोजित करने की अनुमति दे दी है।
गौरतलब है कि 21 जुलाई का शहीद दिवस 1993 में कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की मौत की याद में मनाया जाता है। उस समय ममता बनर्जी युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। बाद में टीएमसी के गठन के बाद यह कार्यक्रम पार्टी का सबसे बड़ा वार्षिक राजनीतिक आयोजन बन गया।
