प्रियंका गांधी का मोहन भागवत पर पलटवार, ‘Gen Z को किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं’

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के Gen Z प्रदर्शनकारियों के समर्थन वाले बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी नहीं लेने का आरोप लगाया।
संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, “उन्हें मोहन भागवत जी से किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।” उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर वह संसद से बच रहे हैं। प्रियंका गांधी ने कहा, “उन्हें आना चाहिए और बयान देना चाहिए। इसमें क्या दिक्कत है? कुछ गलत हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”
मोहन भागवत ने Gen Z प्रदर्शनकारियों का किया था समर्थन
इससे पहले गुरुवार को मुंबई में आयोजित इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) के 15वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने करीब 2,000 Gen Z और Gen Alpha सदस्यों को संबोधित किया था।
भागवत ने कहा था कि युवाओं की चिंताएं वास्तविक हैं और उन्हें विरोध प्रदर्शन करने के कारण “राष्ट्र विरोधी” नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन लोकतांत्रिक संवाद का एक वैध माध्यम है और असहमति को बातचीत के जरिए सहमति में बदला जाना चाहिए। भागवत ने कहा, “अगर Gen Z के लोग आंदोलन कर रहे हैं तो वे राष्ट्र विरोधी नहीं हैं, वे हमारे अपने लोग हैं। वे हमारी अगली पीढ़ी हैं। उनके साथ संवाद और जुड़ाव की जरूरत है।”
उन्होंने कहा कि अगर लोगों की समस्याओं का समाधान बातचीत से नहीं होता तो वे विरोध का रास्ता अपना सकते हैं, लेकिन अंतिम उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि सहमति बनाना होना चाहिए। भागवत ने कहा कि Gen Z की शिकायतें वास्तविक हैं और उन्हें उनकी ईमानदारी पर भरोसा है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात
आरएसएस प्रमुख ने देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में सरकारी खर्च को देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 6 प्रतिशत तक बढ़ाने की वकालत की। उनके बयान ऐसे समय में आए हैं जब NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हुआ था। इस विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठी थी।
वहीं, 20 जुलाई को दिल्ली में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार विपक्ष के निशाने पर रही है। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
