अखिल भारतीय बंग परिषद स्वाभिमान समारोह: दिल्ली में भव्य दुर्गा पूजा आयोजन और पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों पर चर्चा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: अखिल भारतीय बंग परिषद के तत्वावधान में दिल्ली के प्रमुख दुर्गा पूजा आयोजकों, समितियों और बंगाली समाज के प्रतिनिधियों के सम्मान में ‘स्वाभिमान समारोह’ का आयोजन रविवार को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में किया गया। समारोह में बंगाली समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, दुर्गा पूजा की ऐतिहासिक एवं सामाजिक महत्ता, स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल के योगदान तथा दिल्ली में दुर्गा पूजा के व्यापक और व्यवस्थित आयोजन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर में निवास कर रहे बंगाली समाज के प्रतिनिधियों, विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों के पदाधिकारियों, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं तथा राजनीतिक और साहित्यिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। समारोह का उद्देश्य न केवल दुर्गा पूजा समितियों और समाज के सक्रिय प्रतिनिधियों का सम्मान करना था, बल्कि बंगाली समाज की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकजुटता और भारतीय राष्ट्रजीवन में बंगाल के योगदान को रेखांकित करना भी था।
समारोह में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता भारती घोष, भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष एवं कालकाजी की निगम पार्षद योगिता सिंह, त्रिपुरा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुबोल भौमिक, भाजपा नेता अशोक ठाकुर, अंतरराष्ट्रीय कवि एवं भाजपा प्रवक्ता गजेंद्र सोलंकी, प्रसिद्ध हास्य कवि शंभू शिखर सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने सहभागिता की। अखिल भारतीय बंग परिषद के राष्ट्रीय महासचिव किशोर कुमार तरफदार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक अरुण मुखर्जी, विभास रंजन मंडल, परिषद के उपाध्यक्ष श्रीकृष्ण तेंदुधार, कोलंबिया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजय बैरागी, सुब्रत मंडल, शिखा माथुर, कोषाध्यक्ष सुशोभन बनर्जी सहित परिषद के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य भी उपस्थित रहे।
डॉ. रूद्रेश नारायण मिश्रा और विनीत ने किया मंच संचालन
कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. रूद्रेश नारायण मिश्रा एवं विनीत ने किया। दोनों ने समारोह की विभिन्न गतिविधियों को क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ाते हुए अतिथियों और वक्ताओं का परिचय कराया तथा उन्हें अपने विचार रखने के लिए मंच पर आमंत्रित किया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं के संबोधन, सम्मान समारोह, काव्य प्रस्तुति तथा सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया गया।
मंच संचालन के दौरान दुर्गा पूजा को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में न देखकर भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और सामुदायिक सहभागिता के व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली जैसे महानगर में विभिन्न राज्यों और समुदायों से आए लोगों के बीच सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द को भी मजबूत करता है।
आलोक कुमार ने दुर्गा और काली मां के महत्त्व पर दिया संदेश
समारोह को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार जी ने मां दुर्गा और मां काली की भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा में महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने वक्तव्य में शक्ति, साहस, धर्म, न्याय और नारी-शक्ति के प्रतीक के रूप में मां दुर्गा और मां काली की आराधना की परंपरा का उल्लेख करते हुए उपस्थित लोगों को शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में शक्ति की उपासना का विशेष स्थान है और मां दुर्गा का स्वरूप बुराई पर अच्छाई की विजय तथा अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा देता है। मां काली का स्वरूप भी शक्ति, साहस और अधर्म के विनाश का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने दुर्गा पूजा के अवसर पर समाज में सकारात्मक ऊर्जा, एकता, सेवा और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की कामना की।
आलोक कुमार ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं केवल पूजा-पद्धतियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज को नैतिक मूल्यों, साहस, कर्तव्य और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देती हैं। उन्होंने दुर्गा पूजा के आयोजन से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि यह पर्व समाज में एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक गौरव की भावना को और मजबूत करेगा।
दिल्ली में बड़े स्तर पर दुर्गा पूजा के आयोजन का आश्वासन
समारोह में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष एवं कालकाजी की निगम पार्षद योगिता सिंह ने दिल्ली में दुर्गा पूजा के आयोजनों को लेकर महत्वपूर्ण आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि राजधानी में बंगाली समाज की सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहित करने तथा दुर्गा पूजा के आयोजनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
योगिता सिंह ने कहा कि दुर्गा पूजा दिल्ली में रहने वाले बंगाली समाज के लिए आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बड़े स्तर पर दुर्गा पूजा के आयोजन को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि आयोजकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा आयोजन को व्यवस्थित बनाने के लिए संबंधित स्तर पर प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भी दुर्गा पूजा आयोजनों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इस क्रम में उन्होंने पर्यावरण अनुकूल यानी इको-फ्रेंडली मूर्तियों के निर्माण और उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने मूर्ति विसर्जन के लिए उचित, व्यवस्थित और पर्यावरण-सम्मत व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। आधुनिक समय में आवश्यकता इस बात की है कि धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए पर्यावरण के प्रति भी जिम्मेदारी निभाई जाए। इको-फ्रेंडली मूर्तियां इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं।
दुर्गा पूजा सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक
वक्ताओं ने कहा कि दुर्गा पूजा बंगाली समाज की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। यह पर्व परिवार, समाज और समुदाय को एक साथ जोड़ने का कार्य करता है। पूजा पंडालों में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक गतिविधियां, संगीत, कला और सामाजिक संवाद भी आयोजित किए जाते हैं।
दिल्ली में रहने वाला बंगाली समाज लंबे समय से दुर्गा पूजा के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित पूजा समितियां न केवल धार्मिक आयोजन करती हैं, बल्कि सामाजिक सेवा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से भी समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं।
समारोह में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि नई पीढ़ी को अपनी भाषा, साहित्य, कला, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना आवश्यक है। दुर्गा पूजा जैसे सामुदायिक आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से परिचित कराने और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
वीर रस की कविताओं से गूंजा सभागार
समारोह का एक प्रमुख आकर्षण अंतरराष्ट्रीय कवि एवं भाजपा प्रवक्ता गजेंद्र सोलंकी का काव्य पाठ रहा। उन्होंने वीर रस की प्रभावशाली कविताओं के माध्यम से सभागार में देशभक्ति और राष्ट्र चेतना का वातावरण निर्मित किया। उनकी प्रस्तुति को उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक सुना और तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
गजेंद्र सोलंकी ने अपनी कविताओं और वक्तव्य के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बंगाल ने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में साहित्य, पत्रकारिता, सामाजिक जागरण और क्रांतिकारी गतिविधियों के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने बंगाल की उस ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख किया, जिसने भारतीय राष्ट्रीय चेतना को व्यापक स्तर पर प्रभावित किया। उनके काव्य पाठ में राष्ट्रभक्ति, साहस और स्वाभिमान के भाव प्रमुख रहे।
शंभू शिखर ने हास्य-व्यंग्य से बांधा समां
समारोह में प्रसिद्ध हास्य कवि शंभू शिखर ने अपनी हास्य एवं व्यंग्य रचनाओं से उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया। उनकी चुटीली शैली, सहज भाषा और प्रभावशाली प्रस्तुति ने समारोह के वातावरण को जीवंत बना दिया।
शंभू शिखर ने हास्य-व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति के दौरान सभागार में हंसी और तालियों की गूंज सुनाई देती रही। उन्होंने दुर्गा पूजा और बंगाली समाज की सांस्कृतिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी मेल-जोल और सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करते हैं।
उन्होंने दुर्गा पूजा को केवल धार्मिक अनुष्ठान न मानकर सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का पर्व बताया। उनके काव्य पाठ ने समारोह में गंभीर विमर्श के साथ मनोरंजन और सांस्कृतिक रंग भी जोड़ दिया।
बंगाल की सांस्कृतिक विरासत पर व्यापक चर्चा
समारोह में वक्ताओं ने बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय साहित्य, कला, संगीत, पत्रकारिता, शिक्षा और सामाजिक सुधार आंदोलनों में बंगाल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
बंगाल की सांस्कृतिक चेतना ने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में बंगाल की परंपरा ने सामाजिक जागरण को गति दी, वहीं कला और संगीत ने भारतीय सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं।
वक्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाला बंगाली समाज आज भी अपनी भाषा और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति गहरा लगाव रखता है। दिल्ली में आयोजित दुर्गा पूजा इसी सांस्कृतिक निरंतरता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
दुर्गा पूजा समितियों के सम्मान का उद्देश्य
अखिल भारतीय बंग परिषद द्वारा आयोजित स्वाभिमान समारोह में दिल्ली की विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों और उनके प्रतिनिधियों के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। आयोजकों के अनुसार, राजधानी में दुर्गा पूजा के आयोजन को सफल बनाने में इन समितियों की वर्षों से महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इन समितियों द्वारा धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामाजिक गतिविधियां और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया जाता है। समारोह के माध्यम से ऐसे संगठनों और व्यक्तियों के योगदान को सम्मानित करने का प्रयास किया गया, जो लंबे समय से बंगाली समाज की सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं।
आयोजकों ने कहा कि समाज की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना केवल किसी एक संस्था या समिति की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों, विशेषकर युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
नई पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने पर जोर
समारोह में वक्ताओं ने नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में युवा पीढ़ी को अपनी भाषा, साहित्य, संगीत, कला और परंपराओं से परिचित कराना जरूरी है।
दुर्गा पूजा जैसे आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पूजा पंडाल केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र नहीं होते, बल्कि वे कला, संगीत, साहित्य और सामुदायिक संवाद के भी महत्वपूर्ण मंच बनते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण तभी संभव है, जब उन्हें नई पीढ़ी के साथ संवाद करते हुए आगे बढ़ाया जाए। आधुनिक तकनीक और सामाजिक माध्यमों का उपयोग भी इस दिशा में प्रभावी माध्यम बन सकता है।
पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक परंपरा का संतुलन
समारोह में पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। विशेष रूप से मूर्तियों के निर्माण और विसर्जन से जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता व्यक्त की गई।
आयोजकों और वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल सामग्री से निर्मित मूर्तियों को बढ़ावा देने तथा विसर्जन के लिए निर्धारित एवं वैज्ञानिक व्यवस्थाओं को अपनाने से धार्मिक परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
योगिता सिंह द्वारा इको-फ्रेंडली मूर्तियों और बेहतर विसर्जन व्यवस्था को लेकर दिए गए आश्वासन का उपस्थित लोगों ने स्वागत किया। समाज के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दिल्ली में दुर्गा पूजा समितियों को आयोजन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सहभागिता का संदेश
अखिल भारतीय बंग परिषद का यह स्वाभिमान समारोह दिल्ली में बंगाली समाज की सांस्कृतिक एकजुटता और सामाजिक सहभागिता का महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आया। समारोह में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गौरव, राष्ट्र चेतना, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विभिन्न विषयों पर विचार व्यक्त किए गए।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है। दुर्गा पूजा जैसे पर्व विभिन्न समुदायों के बीच सांस्कृतिक संवाद और सहभागिता के अवसर प्रदान करते हैं।
समारोह के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, दुर्गा पूजा समितियों, परिषद के पदाधिकारियों और उपस्थित बंगाली समाज के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान व्यक्त विचारों और दिए गए आश्वासनों से दिल्ली में आगामी दुर्गा पूजा आयोजनों को लेकर उत्साह का वातावरण देखने को मिला।
स्वाभिमान समारोह ने एक ओर जहां बंगाली समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और दुर्गा पूजा की परंपरा को रेखांकित किया, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों, व्यवस्थित विसर्जन व्यवस्था और बड़े स्तर पर दुर्गा पूजा के आयोजन की दिशा में नई संभावनाओं का संकेत भी दिया। समारोह में उपस्थित लोगों ने उम्मीद जताई कि दिल्ली में दुर्गा पूजा आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक, व्यवस्थित, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रूप में आयोजित होगी।
