ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने रचा इतिहास, विश्व चैंपियनशिप में भारत को 14 साल बाद महिला युगल पदक

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने शुक्रवार, 21 अगस्त को बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में भारत के लिए इतिहास रच दिया। भारतीय जोड़ी ने एक गेम से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जिया यी फान और झांग शू शियान की जोड़ी को 16-21, 21-15, 21-13 से हराकर महिला युगल के सेमीफाइनल में जगह बना ली। इस जीत के साथ भारत ने विश्व चैंपियनशिप में महिला युगल का पदक पक्का कर लिया है।
यह जीत महज खिताब की ओर एक और कदम नहीं है, बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व है। भारत ने विश्व चैंपियनशिप में महिला युगल पदक का 14 साल लंबा इंतजार खत्म किया है। इससे पहले अश्विनी पोनप्पा और ज्वाला गुट्टा ने 2011 में कांस्य पदक जीता था। उसके बाद से भारतीय महिला युगल जोड़ी इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के पोडियम पर जगह नहीं बना सकी थी।
जॉली और गोपीचंद ने घरेलू दर्शकों के सामने जबरदस्त जुझारूपन दिखाते हुए इस सूखे को समाप्त किया। क्वार्टर फाइनल से पहले भारतीय जोड़ी शानदार फॉर्म में थी। उन्होंने राउंड ऑफ 64, राउंड ऑफ 32 और प्री-क्वार्टर फाइनल में सीधे गेमों में जीत दर्ज की थी और इनमें से प्रत्येक मुकाबला एक घंटे से भी कम समय में समाप्त हुआ था। हालांकि, चौथी वरीयता प्राप्त चीनी जोड़ी के खिलाफ चुनौती कहीं अधिक कठिन थी।
जॉली और गोपीचंद इससे पहले जिया और झांग के खिलाफ अपने तीनों मुकाबले हार चुकी थीं। ऐसे में क्वार्टर फाइनल उनके लिए इस मजबूत चीनी जोड़ी के खिलाफ पहली जीत हासिल करने की बड़ी परीक्षा भी था।
धीमी शुरुआत, जोरदार वापसी
पहले गेम की शुरुआत भारत के लिए बेहद खराब रही। जॉली ने शुरुआती दो अंक गंवाए। पहला अंक बेसलाइन पर गलती से और दूसरा दाईं ओर शटल लौटाने के असफल प्रयास से गंवाया। चीनी जोड़ी ने जल्द ही 4-0 की बढ़त बना ली। इसके बाद 57 शॉट की असाधारण लंबी रैली हुई, जिसका अंत भारतीय खिलाड़ियों द्वारा शटल को बाहर भेजने के साथ हुआ।
भारत ने चीनी जोड़ी की एक दुर्लभ गलती के बाद अपना खाता खोला और स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने जोरदार उत्साह के साथ इसका स्वागत किया। भारत के हर अंक पर ऐसा शोर उठ रहा था, मानो मैच जीत लिया गया हो। ‘इंडिया जीतेगा’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच हर रैली के साथ माहौल और जोशीला होता गया।
हालांकि, जिया और झांग की ताकत और बेहतरीन तालमेल ने उन्हें बढ़त बनाए रखने में मदद की। चीनी जोड़ी 8-2 से आगे निकल गई, लेकिन इसके बाद भारत ने धीरे-धीरे अपनी लय हासिल करनी शुरू की। गोपीचंद ने शक्तिशाली स्मैश लगाने शुरू किए, जबकि जॉली ने नेट पर अपने खेल को बेहतर किया। भारतीय जोड़ी ने लगातार छह अंक हासिल कर स्कोर 8-9 कर दिया।
चीनी जोड़ी ने दबाव में संयम बनाए रखा और ब्रेक तक 11-8 की बढ़त बरकरार रखी। हालांकि, भारत ने गेम को हाथ से निकलने नहीं दिया। जॉली ने अपने आक्रामक खेल में सटीकता हासिल की और गोपीचंद लगातार चीनी डिफेंस को चुनौती देती रहीं। अंतर कम बना रहा, लेकिन शुरुआती अंकों में हुआ नुकसान भारत के लिए भारी पड़ा। जिया और झांग ने पहला गेम 21-16 से अपने नाम कर लिया।
दूसरे गेम में भारत ने पलटा पासा
दूसरे गेम में भारत बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आया। जॉली ने पहला अंक हासिल करते हुए साफ संकेत दे दिया कि भारतीय जोड़ी पीछे हटने वाली नहीं है। चीन ने शुरुआती बढ़त जरूर बनाई, लेकिन भारत लगातार करीब बना रहा और लंबी रैलियों में बार-बार अपनी पकड़ मजबूत करता रहा।
एक रैली में शटल के अनुकूल उछाल का फायदा भारत को मिला और 48 शॉट की रैली जीतकर भारतीय जोड़ी ने स्कोर 4-5 कर दिया। इसके बाद मुकाबला कौशल के साथ-साथ धैर्य और मानसिक मजबूती की भी परीक्षा बन गया।
मैच में पहली बार भारतीय जोड़ी ब्रेक से ठीक पहले बढ़त बनाने में सफल रही। दर्शकों ने शोर और बढ़ा दिया, लेकिन चीनी खिलाड़ी दबाव में नहीं टूटीं। एक बेहद लंबी और कठिन रैली के बाद भारत ने चैलेंज लिया, लेकिन रिव्यू असफल रहा और इसके बाद भारतीय जोड़ी के पास गेम के बाकी हिस्से के लिए कोई चैलेंज नहीं बचा।
दोनों भारतीय खिलाड़ी अपनी पूरी क्षमता तक धकेली जा रही थीं, लेकिन उन्होंने इसका जवाब और अधिक आक्रामक खेल से दिया। जॉली के जश्न मनाने का अंदाज भी लगातार ज्यादा आक्रामक होता गया, जिससे साफ था कि भारतीय जोड़ी को जीत की संभावना महसूस होने लगी थी। कोच पुलेला गोपीचंद भी उन्हें शांत रहने के लिए कहते नजर आए, लेकिन भारतीय जोड़ी का आत्मविश्वास स्पष्ट था।
15-14 के स्कोर पर हुई 43 शॉट की रैली भारतीय जोड़ी के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बनी। भारत ने यह रैली जीती, मुकाबले पर नियंत्रण हासिल किया और दूसरा गेम 21-15 से जीतकर निर्णायक गेम में प्रवेश किया।
ऐतिहासिक निर्णायक गेम
निर्णायक गेम भी लगभग उसी अंदाज में आगे बढ़ा, जिसमें दोनों जोड़ियां एक-दूसरे को जरा भी मौका देने को तैयार नहीं थीं। लेकिन इस बार एक बड़ा अंतर था—भारत के हर अंक के साथ दर्शकों का शोर और तेज होता जा रहा था और हर रैली के साथ स्टेडियम का माहौल और अधिक रोमांचक बनता गया।
जॉली और गोपीचंद ने इस दबाव को आत्मसात करते हुए अपना संयम बनाए रखा। चीनी जोड़ी वापसी का रास्ता तलाशती रही, लेकिन भारतीय खिलाड़ी अब वह घबराई हुई जोड़ी नहीं थीं जो पहले गेम में 4-0 से पीछे हो गई थीं।
भारतीय जोड़ी ने न केवल जिया और झांग के खिलाफ अपने पिछले हार के रिकॉर्ड को पलटा, बल्कि भारत के 14 साल लंबे इंतजार के दबाव को भी पीछे छोड़ दिया। निर्णायक गेम के अंतिम अंक के साथ स्कोरबोर्ड पर 21-13 दर्ज हुआ और भारत ने ऐतिहासिक जीत हासिल कर ली।
जॉली और गोपीचंद ने वह कर दिखाया जो 2011 के बाद से भारत की कोई महिला युगल जोड़ी नहीं कर सकी थी—विश्व चैंपियनशिप में पदक पक्का करना।
भारत ने 2011 के बाद से बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के हर संस्करण में पदक जीतने का सिलसिला बरकरार रखा है, लेकिन इस पदक का महत्व विशेष है। महिला युगल का पोडियम एक दशक से भी अधिक समय से भारत की पहुंच से बाहर था।
अब जॉली और गोपीचंद ने न केवल इस लंबे इंतजार को खत्म किया है, बल्कि सेमीफाइनल में पहुंचकर खिताब की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। चीन की इस जोड़ी के खिलाफ लगातार तीन हार के बाद सबसे बड़े मंच पर मिली यह वापसी वाली जीत भारतीय बैडमिंटन के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बन गई है।
