तमिलनाडु विधानसभा में सीएम विजय: ‘रिश्वत को लोन की ईएमआई की तरह किस्तों में वसूला जाता था’

CM Vijaya in Tamil Nadu Assembly: 'Bribes were collected in installments, like loan EMIs'चिरौरी न्यूज

चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने सोमवार को विधानसभा में डीएमके पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ठेकेदारों से ‘पार्टी फंड’ के नाम पर रिश्वत वसूली जाती थी। उन्होंने दावा किया कि यह रकम ठेके की कुल राशि के 7.5 से 10 प्रतिशत तक होती थी और इसे लोन की ईएमआई की तरह किस्तों में वसूला जाता था।

विजय ने ये आरोप विपक्ष की ओर से बार-बार मांगे जा रहे सबूतों के जवाब में लगाए। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक दस्तावेज में कथित तौर पर इस संबंध में जानकारी मौजूद है। विजय ने विधानसभा में दस्तावेज के कुछ हिस्सों का हवाला भी दिया।

वीरानम योजना का भी किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने 1970 के दशक में डीएमके सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए गठित सरकारिया आयोग का जिक्र किया। उन्होंने वीरानम जल योजना से जुड़े टेंडर का हवाला देते हुए दावा किया कि आयोग की रिपोर्ट में 16 करोड़ रुपये के टेंडर पर 2.5 प्रतिशत ‘पार्टी फंड’ की मांग का उल्लेख था।

विजय ने कहा कि इस मुद्दे को 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता और पूर्व मंत्री सी. पोनैयन ने भी उठाया था। उन्होंने पुरुशोत्तम नामक व्यक्ति के बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि कुल 29 लाख रुपये रिश्वत के तौर पर लिए गए थे। विजय ने आरोप लगाया कि यह रकम एकमुश्त नहीं बल्कि किस्तों में वसूली गई थी, बिल्कुल लोन की ईएमआई की तरह।

ठेकेदारों से 7.5 से 10 प्रतिशत ‘पार्टी फंड’ लेने का आरोप

विजय ने आगे जिस ED दस्तावेज का हवाला दिया, उसके आधार पर आरोप लगाया कि डीएमके सरकार के कार्यकाल में नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग के तहत काम करने वाले ठेकेदारों से ‘पार्टी फंड’ के नाम पर रकम ली जाती थी।

उन्होंने कहा कि दस्तावेज में कथित तौर पर ठेके की राशि का 7.5 से 10 प्रतिशत तक ‘पार्टी फंड’ लेने का उल्लेख है। विजय ने सवाल उठाया कि जब यह फंड सत्ता में मौजूद पार्टी के फायदे के लिए लिया जा रहा था, तो उस समय सत्ता में कौन था? इसके जवाब में उन्होंने कहा—डीएमके।

मुख्यमंत्री विजय ने आरोप लगाया कि ED दस्तावेज में कथित तौर पर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनके बेटे तथा उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन समेत कुछ अन्य लोगों को कथित लाभार्थियों के रूप में नामित किया गया है।

विजय ने पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी से जुड़े ED के कथित निष्कर्षों का भी हवाला दिया और उन पर अपने आधिकारिक पद का गलत इरादे से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

IAS अधिकारियों की भूमिका का भी दावा

विजय ने आरोप लगाया कि कुछ IAS अधिकारी भी मंत्रियों के साथ कथित तौर पर इस पूरे मामले में शामिल थे। उन्होंने ‘रथीश’ नामक एक व्यक्ति का जिक्र करते हुए उसे कथित तौर पर ‘अनधिकृत शक्ति के रूप में काम करने वाला केंद्रीय व्यक्ति’ बताया।

विजय ने दावा किया कि उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद रथीश दुबई में छिपा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि उनके आरोप अदालत की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं हैं। उन्होंने दोहराया कि विपक्ष जिस ‘पार्टी फंड’ के सबूत की मांग कर रहा है, उसके लिए ED दस्तावेज ही पर्याप्त आधार प्रदान करता है।

 

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