भारत ने पाकिस्तान-चीन सीमा पैनल को खारिज किया, ‘इसकी कोई कानूनी वैधता नहीं’

India angered by US body USCIRF's remarks on RSS; Ministry of External Affairs calls the commission a 'biased organization'.
(Screenshot/Twitter Video)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: भारत ने बुधवार को पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग को खारिज कर दिया। भारत का कहना है कि इस आयोग के पास अवैध कब्जे वाले भारतीय इलाकों से जुड़ी व्यवस्थाओं पर फैसला लेने का कोई कानूनी आधार नहीं है। यह प्रतिक्रिया आयोग की इस्लामाबाद में हुई पहली बैठक के बाद आई है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मामले पर भारत का रुख “साफ़ और एक जैसा” रहा है। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच कोई सीमा नहीं है। साथ ही, इस बात पर ज़ोर दिया कि भारतीय इलाकों से जुड़ा ऐसा कोई भी सहयोग स्वीकार्य नहीं है और इसका भारत की संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “इस मामले पर हमारा रुख साफ़ और एक जैसा है। पाकिस्तान और चीन के बीच कोई सीमा नहीं है। हम तथाकथित संयुक्त आयोग को खारिज करते हैं, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।”

भारत का हमेशा से यह कहना रहा है कि 1963 में पाकिस्तान का शक्सगाम घाटी समेत कुछ इलाकों को चीन को सौंपना गैर-कानूनी और अस्वीकार्य था। नई दिल्ली ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का भी विरोध किया है, क्योंकि इसका एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है। जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश “भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे”। उन्होंने आगे कहा, “हमने 1963 के तथाकथित ‘चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते’ को कभी मान्यता नहीं दी और हमेशा यही कहा है कि यह गैर-कानूनी और अमान्य है।”

प्रवक्ता ने कहा, “हम इन कब्जे वाले इलाकों की स्थिति बदलने या अवैध कब्जे को वैध बनाने की किसी भी कोशिश का दृढ़ता से विरोध और उसे खारिज करते हैं, क्योंकि इससे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर असर पड़ता है।” उन्होंने यह भी कहा, “भारतीय इलाकों को लेकर चीन और पाकिस्तान के बीच सीमा से जुड़ा कोई भी तथाकथित सहयोग पूरी तरह से अस्वीकार्य होगा और इन इलाकों पर भारत की संप्रभुता पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।”

पाकिस्तान से “अपने अवैध और जबरन कब्जे वाले इलाकों को तुरंत खाली करने” की मांग करते हुए जायसवाल ने कहा कि ऐसे कदम सिर्फ़ “दिखावा” हैं। भारत की प्रतिक्रिया में संयुक्त आयोग, 1963 के समझौते और पाकिस्तान व चीन द्वारा उन इलाकों की स्थिति पर चर्चा करने या उन्हें बदलने की किसी भी कोशिश को खारिज करने की बात दोहराई गई, जिन्हें भारत अपना मानता है।

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