संगीत, नृत्य और मनोरंजन के साथ दूरदर्शन ने मनाया 67वां स्थापना दिवस

Doordarshan celebrated its 67th Foundation Day with music, dance, and entertainmentदिलीप गुहा

नई दिल्ली: भारत के प्रतिष्ठित सार्वजनिक सेवा प्रसारक दूरदर्शन ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के मंडी हाउस स्थित दूरदर्शन भवन, कॉपरनिकस मार्ग में संगीत, नृत्य और मनोरंजन से सजी शाम के साथ अपना 67वां स्थापना दिवस मनाया। “Doordarshan@67 – Kal Bhi Apna, Aaj Bhi Apna” थीम पर आयोजित इस समारोह में दूरदर्शन की छह दशकों से अधिक की उल्लेखनीय यात्रा और पीढ़ियों से भारतीयों के साथ उसके निरंतर जुड़ाव को रेखांकित किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए दूरदर्शन की महानिदेशक रीना सोनवाल कौली ने सभी अतिथियों और गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव, प्रसार भारती के सीईओ, प्रधान महानिदेशक, प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समारोह में शामिल होने के लिए आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, “दूरदर्शन का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास है। ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ के आदर्श वाक्य के साथ यह अब अपने 67वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। हम सभी इस गौरवशाली इतिहास के साक्षी हैं।”

राष्ट्र निर्माण में दूरदर्शन के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि शैक्षिक कार्यक्रमों और रामायण तथा महाभारत जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों के माध्यम से प्रसारक ने देश को एक सूत्र में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भी लोगों को अपने कार्यक्रमों के माध्यम से सूचित और एक-दूसरे से जोड़े रखने में दूरदर्शन की भूमिका को रेखांकित किया।

दूरदर्शन में हो रहे तकनीकी बदलावों का उल्लेख करते हुए कौली ने कहा कि प्रसारण के क्षेत्र में हो रहे विकास के साथ दूरदर्शन भी कदमताल कर रहा है। नेटवर्क में आधुनिक आउटसाइड ब्रॉडकास्ट (OB) वैन, 4K कैमरे तथा उन्नत ग्राफिक्स और वीडियो एडिटिंग प्रणालियों को शामिल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उसके 35 चैनलों में से 13 चैनल वर्तमान में हाई डेफिनिशन (HD) के साथ-साथ स्टैंडर्ड डेफिनिशन (SD) में प्रसारित हो रहे हैं।

OTT प्लेटफॉर्म, स्मार्टफोन और स्मार्ट टीवी से बदलते मीडिया परिदृश्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने 2024 में प्रसार भारती के OTT प्लेटफॉर्म ‘Waves’ के शुभारंभ का भी उल्लेख किया। इस मंच पर दूरदर्शन के चैनलों के साथ उसके कई लोकप्रिय पुराने कार्यक्रम और धारावाहिक भी दर्शकों के लिए उपलब्ध हैं।

प्रसार भारती के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने डिजिटल युग की प्रमुख चुनौतियों में से एक ध्यान भटकाव पर बात की। उन्होंने कहा कि स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल ने ध्यान भटकने की प्रवृत्ति को धीरे-धीरे एक लत में बदल दिया है और कई बार लोग केवल ध्यान भटकाने के लिए ही किसी न किसी माध्यम की तलाश करते हैं। घटती ध्यान-अवधि को लेकर जारी चर्चाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञापन जगत में अक्सर यह माना जाता है कि यदि किसी संदेश को शुरुआती कुछ सेकंड में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया, तो दर्शक आगे बढ़ चुका हो सकता है।

हालांकि, स्क्रीन की बढ़ती संख्या के बावजूद जोशी ने मानव चेतना और उसकी आंतरिक शक्ति में अपने विश्वास को दोहराया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर मौजूद “आंतरिक लौ” और “आंतरिक प्रकाश” आज भी उसका मार्गदर्शन करते हैं।

प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी ने दूरदर्शन की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसकी शुरुआत शैक्षिक प्रयोगों से हुई थी और धीरे-धीरे इसका विस्तार समाचार, मनोरंजन, खेल, कृषि, संगीत, कला और संस्कृति जैसे विविध क्षेत्रों तक हुआ।

समारोह में लोकप्रिय गायिका ज्योति नूरां की विशेष संगीत प्रस्तुति मुख्य आकर्षण रही। उनकी दमदार और भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं शिखा खरे और उनके समूह की शानदार ‘Rhythm Without Borders’ फ्यूजन नृत्य प्रस्तुति ने समारोह में रंग भर दिया।

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