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संजू सैमसन को ड्रॉप करने का फैसला गंभीर के लिए था बेहद मुश्किल

decision to drop Sanju Samson was extremely difficult for Gambhir.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने खुलासा किया है कि इंग्लैंड के खिलाफ T20I सीरीज के दौरान संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर करने का फैसला उनके लिए इतना मुश्किल था कि वह पूरी रात सो नहीं पाए थे। गंभीर ने इसे अपने दो साल के कोचिंग करियर का सबसे कठिन फैसला बताया। उन्होंने कहा कि संजू सैमसन से इस बारे में उनकी बेहद ईमानदार बातचीत हुई थी और उन्होंने खुद उन्हें इस फैसले की वजह समझाई थी।

इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की T20I सीरीज के पहले मुकाबले में भारत को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद टीम मैनेजमेंट ने उस समय शानदार फॉर्म में चल रहे संजू सैमसन को बाहर कर उनकी जगह युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मौका दिया। सूर्यवंशी ने मैनचेस्टर में अपना T20I डेब्यू किया था।

संजू सैमसन के लिए यह फैसला इसलिए भी बड़ा था क्योंकि वह भारत की पिछली T20I सफलता के अहम खिलाड़ियों में शामिल रहे थे। हालांकि, बाद में अफगानिस्तान के खिलाफ 3-0 की सीरीज में उन्होंने फिर प्लेइंग इलेवन में वापसी की और लगातार दो अर्धशतक लगाकर अपनी फॉर्म का परिचय दिया।

उस रात मैं सो नहीं पाया था

गौतम गंभीर ने JioStar से बातचीत में कहा कि पिछले दो वर्षों में कोच के तौर पर यह एकमात्र ऐसा मौका था जब वह पूरी रात सो नहीं पाए। उन्होंने कहा कि उन्हें पता था कि एक ऐसे खिलाड़ी को बाहर करना आसान नहीं था, जो हाल ही में शानदार प्रदर्शन कर चुका था।

गंभीर ने कहा, “मेरे दो साल के सफर में यही एक रात थी जब मैं सो नहीं पाया। मैंने यह बात संजू को भी बताई थी, क्योंकि मुझे पता था कि T20 फॉर्मेट में मेरे कोचिंग करियर का यह शायद सबसे मुश्किल फैसला था। एक खिलाड़ी जो प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहा हो, उसे तीन या चार मैचों के बाद बाहर करना आसान नहीं था।”

उन्होंने आगे बताया कि उस समय वैभव सूर्यवंशी भी अच्छी फॉर्म में थे और टीम को सीरीज जीतने के लिए शीर्ष क्रम में रन बनाने वाले बल्लेबाज की जरूरत थी।

“शायद इसकी वजह यह थी कि वैभव भी उसी तरह की फॉर्म में था और हमें सीरीज जीतनी थी। जब आप भारत के लिए खेलते हैं या भारत को कोच करते हैं, तो आप हर संभव सीरीज जीतना चाहते हैं। संजू के साथ मेरी बहुत ईमानदार बातचीत हुई। मैंने उनसे कहा कि यही एक कारण है कि वैभव उस तरह की फॉर्म में था और हमें शीर्ष क्रम में रन बनाने के साथ-साथ एक मजबूत प्लेटफॉर्म की जरूरत थी,” गंभीर ने कहा।

गंभीर के मुताबिक, संजू ने भी इस फैसले को सकारात्मक तरीके से लिया। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच हुई बातचीत बेहद सहज और ईमानदार थी।

युवा खिलाड़ियों को भी करना होगा अपने मौके का इंतजार

गौतम गंभीर ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी युवा खिलाड़ी का शानदार फॉर्म में होना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसे तुरंत प्लेइंग इलेवन में जगह मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि टीम मैनेजमेंट लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों के साथ अचानक सिर्फ कुछ खराब मैचों के बाद नहीं छोड़ सकता।

उन्होंने कहा, “मैं जानता हूं कि यह मुश्किल है। लेकिन मैंने वैभव को समझाया कि मुझे पता है कि तुम अच्छी फॉर्म में हो, लेकिन कभी-कभी जो खिलाड़ी लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, उनके साथ आपको अपने मौके का इंतजार करना पड़ता है।”

गंभीर ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया या बाहरी चर्चा के आधार पर टीम की प्लेइंग इलेवन तय नहीं होती। उनके मुताबिक, अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि कोच और कप्तान को कौन-सी टीम मैच जिताने के लिए सबसे बेहतर लगती है।

उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया या बाहर का शोर प्लेइंग इलेवन तय नहीं करता। प्लेइंग इलेवन इस बात से तय होती है कि ड्रेसिंग रूम में कोच और कप्तान को कौन मैच जिता सकता है, बेस्ट प्लेइंग इलेवन कौन-सी है और किसने इतने लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन किया है।”

पॉपुलर नहीं, सही फैसले लेना जरूरी

गंभीर ने कहा कि टीम मैनेजमेंट सिर्फ इसलिए किसी स्थापित खिलाड़ी को बाहर नहीं कर सकता क्योंकि कोई युवा खिलाड़ी अच्छी फॉर्म में है। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ से दो साल में जिस कॉम्बिनेशन ने टीम को लगातार सफलता दिलाई है, उसे कुछ असफलताओं के बाद अचानक बदलना सही नहीं होगा।

उन्होंने कहा, “हम उस कॉम्बिनेशन को अचानक नजरअंदाज नहीं कर सकते, जिसने पिछले डेढ़ या दो साल में इतना प्रभाव डाला है। सिर्फ तीन या चार असफलताओं के बाद उन्हें ड्रॉप करके किसी बेहद प्रतिभाशाली और अच्छी फॉर्म में चल रहे युवा खिलाड़ी को मौका देना हमेशा सही नहीं होता।”

गंभीर ने आगे कहा, “कभी-कभी आपको अपने मौके का इंतजार करना होता है। हम ड्रेसिंग रूम में वह सुरक्षा और भरोसा बनाए रखना चाहते हैं। मेरे लिए लोकप्रिय फैसले लेना बहुत आसान है, लेकिन सही फैसले लेना शायद सबसे मुश्किल काम है। और हमने संजू और अभिषेक के साथ बने रहने का सही फैसला लिया है।”

श्रेयस अय्यर की भी गंभीर ने की तारीफ

गौतम गंभीर ने T20I कप्तान श्रेयस अय्यर की नेतृत्व क्षमता की भी तारीफ की। दोनों पहले इंडियन प्रीमियर लीग में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए साथ काम कर चुके हैं। 2024 में अय्यर टीम के कप्तान थे, जबकि गंभीर मेंटर की भूमिका में थे और टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया था।

श्रेयस के साथ अपने अनुभव को याद करते हुए गंभीर ने कहा कि 2024 में KKR से जुड़ने के बाद उन्हें अय्यर की नेतृत्व क्षमता को करीब से देखने का मौका मिला। उन्होंने खास तौर पर उनके निस्वार्थ रवैये और टीम को प्राथमिकता देने की क्षमता की तारीफ की।

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