UNGA में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का विरोधियों पर तीखा हमला, विरोध में कई देशों के प्रतिनिधि बाहर निकले
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने संबोधन के दौरान आलोचकों के साथ-साथ कुछ सहयोगी देशों पर भी तीखा हमला बोला। उनके भाषण की शुरुआत होते ही दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि सदन से बाहर निकल गए। कुछ प्रतिनिधियों ने विरोध में हूटिंग और नारेबाजी भी की, जिसके बाद सत्र के अध्यक्ष को व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी, ईरान के नेतृत्व, तुर्किये, ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई लोगों और देशों को निशाने पर लिया। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जमकर प्रशंसा की।
प्रतिनिधियों के वॉकआउट पर नेतन्याहू की प्रतिक्रिया
भाषण शुरू होते ही दर्जनों राजनयिक सदन से बाहर चले गए। इस दौरान कुछ ने हूटिंग भी की। नेतन्याहू ने वॉकआउट करने वाले प्रतिनिधियों पर तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई और लोग भी वहां हैं जो उनका भाषण सुनना नहीं चाहते, तो वे भी बाहर जा सकते हैं।
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की कार्रवाई को कठिन बताया, लेकिन कहा कि प्रधानमंत्री के तौर पर यह उनके लिए सबसे आसान फैसलों में से एक था।
ईरान ने उठाया परमाणु मुद्दे पर ‘डबल स्टैंडर्ड’
इससे एक दिन पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने UNGA में अपने संबोधन में परमाणु मुद्दे को लेकर इजरायल और ईरान के साथ अलग-अलग व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया था।
उन्होंने कहा कि इजरायल के पास परमाणु हथियार होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण ईरान पर केंद्रित है और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बावजूद प्रतिबंध ईरान पर लगाए जाते हैं।
नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल इस समय “सात मोर्चों पर युद्ध” लड़ रहा है। इनमें गाजा, कब्जे वाला वेस्ट बैंक, सीरिया, लेबनान, ईरान, यमन के हूती और इराक में मौजूद मिलिशिया शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इजरायल यह लड़ाई जीतेगा और उसके पास दूसरा विकल्प नहीं है। नेतन्याहू ने इस दौरान अपने बड़े भाई योनातन नेतन्याहू के शब्दों का भी हवाला दिया, जिनकी 1976 में युगांडा के एंटेबे अभियान के दौरान मौत हुई थी।
तुर्किये और एर्दोगन पर निशाना
नेतन्याहू ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और तुर्किये सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने अंकारा पर इजरायल के खिलाफ यहूदी-विरोधी दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाया। तुर्किये के राष्ट्रपति कार्यालय ने पलटवार करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल एर्दोगन पर हमला करने के लिए करना शांति, कानून के शासन और संवाद के उन मूल्यों के खिलाफ है, जिनका प्रतिनिधित्व संयुक्त राष्ट्र करता है।
तुर्किये ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा नेतन्याहू के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट का भी उल्लेख किया। एर्दोगन ने इस सप्ताह UNGA में अपने भाषण में गाजा में इजरायल की कार्रवाई को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे और इसे “राज्य आतंकवाद” तथा “नरसंहार की मानसिकता” से जोड़ा था।
नेतन्याहू ने ब्रिटेन और फ्रांस की भी आलोचना की। दोनों देश ऐतिहासिक रूप से इजरायल के साझेदार रहे हैं, लेकिन हाल के समय में गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायल की कार्रवाई को लेकर उनकी आलोचना बढ़ी है। नेतन्याहू ने इजरायल पर उपनिवेशवाद के आरोपों को खारिज करते हुए ब्रिटेन और फ्रांस पर सवाल उठाए कि ये वही देश हैं, जहां से “उपनिवेशवाद” जैसी अवधारणाएं आईं।
ट्रंप की खुलकर तारीफ
नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना “दोस्त” बताते हुए उनकी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इजरायल के लिए अमेरिका और ट्रंप से बड़ा साझेदार कोई नहीं रहा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त अभियानों में साथ काम किया और दोनों देशों के पायलटों ने ईरान के ऊपर संयुक्त मिशन उड़ाए।
नेतन्याहू ने गाजा में बंधक बनाए गए लोगों की वापसी के प्रयासों में भी अमेरिका के साथ सहयोग का जिक्र किया और इजरायल पर लगाए जा रहे नरसंहार के आरोपों को खारिज किया।
न्यूयॉर्क के मेयर पर हमला
नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी को भी अपने निशाने पर लिया। ममदानी पहले कह चुके हैं कि अगर नेतन्याहू न्यूयॉर्क आए तो वह उनकी गिरफ्तारी की मांग करेंगे। नेतन्याहू ने कहा कि ममदानी उन्हें न्यूयॉर्क आने से रोकने और उन्हें “चुप” कराने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके। उन्होंने गाजा में इजरायल के खिलाफ नरसंहार के आरोपों को भी खारिज किया।
ममदानी ने जवाब देते हुए नेतन्याहू के आरोपों को “बेबुनियाद झूठ” बताया और कहा कि इनका उद्देश्य फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायली कार्रवाई को सही ठहराना है।
नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऐसे समय पहुंचे जब अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) का गिरफ्तारी वारंट उनके खिलाफ जारी है। ICC ने 2024 में कहा था कि गाजा में युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों के संदर्भ में नेतन्याहू की जिम्मेदारी को लेकर पर्याप्त आधार हैं। नेतन्याहू इन आरोपों से इनकार करते हैं।
इसके विपरीत, ट्रंप प्रशासन ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अमेरिका आने के लिए वीजा नहीं दिया। अब्बास ने रामल्लाह से रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेश के जरिए UNGA को संबोधित किया।
UN के बाहर भी प्रदर्शन
नेतन्याहू के भाषण के दौरान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर भी विरोध प्रदर्शन हुए। अमेरिका स्थित संगठन Jewish Voice for Peace के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र पर एक ऐसे नेता की मेजबानी करने का आरोप लगाया, जिसके खिलाफ युद्ध अपराधों के आरोप हैं।
प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका द्वारा इजरायल को दिए जा रहे समर्थन को खत्म करने और गाजा में युद्ध रोकने की मांग की। कई प्रदर्शनकारियों ने “Stop the Genocide” जैसे बैनर भी प्रदर्शित किए। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें अभिनेत्री सुसान सारंडन भी शामिल थीं।
नेतन्याहू का UNGA भाषण ऐसे समय हुआ है जब इजरायल में उनकी राजनीतिक स्थिति और आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। विश्लेषक एरियल कोहेन ने कहा कि नेतन्याहू का भाषण अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के साथ-साथ घरेलू इजरायली जनता को ध्यान में रखकर दिया गया प्रतीत होता है।
नेतन्याहू का न्यूयॉर्क दौरा भी संक्षिप्त रहा। UNGA में संबोधन के बाद उनका इजरायल लौटने का कार्यक्रम है, जहां चुनावी अभियान जारी है।
